राजाजी को आया गुस्सा,इशारों में गाली देकर ख़बरनवीसों को ललकारा !
सुना है कल जनपद कल्याण समिति की बैठक में प्रतिभाशाली मंत्रीगणों के साथ पक्ष वाले और विरोधी सभा सद आये थे। लेकिन जनता को सूचना पहुँचाने वाले खबरनवीसों को बैठक से बाहर करने का आदेश दिया गया। नाराज होकर विरोधी सभासद ये कह कर बाहर निकल गए कि सभा में होने वाली बातें ही अगर जनता तक नहीं पहुँचेगी तो ये कैसे पता पड़ेगा कि बंद सभा में क्या होता है? लेकिन विरोधी सभासदों में कुछ भीतरघात से पक्षद्रोही होकर सभा में बैठ कर जानना चाह रहे थे कि आज मजमा कैसा लगेगा ।
विरोधी सभासदों में नेता का चुनाव नहीं होने से अब तक एकता नहीं दिखायी है और यही कारण है मंत्रीगण सहित कई अन्य लोग इनके लिए अस्वीकार्य भाषा का प्रयोग चुपके चुपके करते रहते है। लेकिन सुनने में आया है कि 10 योद्धा जयपुर प्रदेश से नामित होकर जल्द आएंगे जनपद में ।
बरहाल खबरनवीसों (यहाँ ये बताते चले कि राजाजी ने यहाँ पर भी अपने कुछ ख़ास बैठा रखें है जो समय समय पर सूचना देते है कि कौन किसके साथ है ? कौन राजाजी के शाषण के खिलाफ लिखता है। यहाँ तक कि ये ख़ास ही तय करके बताते है कि कौन खबरनवीस नया ,छोटा ,बड़ा ,प्रभावशाली या अप्रभावशाली है ? कभी कभी ये यदा कदा छोटे राजकुमार के कक्ष में कितनी बार कानाफूसी करते नज़र आ जाते है।) पर भी राजाजी अपनी पकड़ समझतें है।
कुल मिलाकर राजाजी बड़े चतुर है । उन्होंने न केवल विपक्षी सभासदों को एक नहीं होने में कसर नहीं छोड़ी वही खबरनवीसों के तंत्र में भी सेंधमारी कर रखी है ।
लेकिन सवाल ये हैं कि आखिर अब तक जनपद कल्याण समिति की बैठकों में खबरनवीसों को बाकायदा निमंत्रण देकर बुलाया जाता था तो इस बार बाहर क्यों कर दिया गया ? राजाजी ने कहा कि ख़बरनवीसों की उपस्थिति में विरोधी सभासदों में जोश आ जाता है। सभा की कार्यवाही में इस कारण हस्तक्षेप होता है। या ये भी कारण रहा होगा कि कही इन खबरनवीसों की उपस्थिति में जनपद की समस्याओं पर सभा का ध्यान केंद्रित न हो जाय। वैसे भी जनपद के हालात दयनीय है। सड़को पर इतने गड्ढे हो गए है कि आम जनता के रथ हिचकोले मार रहे है। बगीचों में पानी भरा हुआ है। कहीं गरीबों के व्यापार को राजाजी के सैनिक उखाड़ फेंक रहे है तो कहीं रसूखदारों को खुश किया जा रहा है। कही जनपद के मुख्य बाजार की दुकानों में बारिश में पानी आचमन कर रहा तो कई जगह जनपद की झीलें रिस रही है। वहीं इसमें गटर और नालियों का पानी पहुँच रहा है। कहीं पुरा महत्व की इमारते लापरवाही से टूट रही है। (क्योंकि इस बार काम करवाने वालों को डर नहीं है कि राजाजी निम्न स्तर के निर्माण पर कुपित होंगें!)
लेकिन एक बात ये कि आखिर राजाजी को गुस्सा क्यों आता है ? क्यों राजा जी के मुख से अक्सर अपशब्द निकल जाते है। किस बात की खींज है खबरनवीसों से ? या ये खींज नहीं होकर दंभ रूपी भ्रम है। यहीं दम्भ इनके कुछ ख़ास मातहतों में भी देखा जाता है। यहाँ तक कि बड़े राजकुमार ज्यादा कुछ बोलते नहीं और छोटे राजकुमार किसी की सुनते नही। छोटे राजकुमार का स्वभाव भी इन दिनों बदल गया है। कुछ खास गुप्तचरों के माध्यम से उन्हें लगता है जनपद इनकी जागीर है। ये भी आम जनता को आम ही समझते है लेकिन आम जनता कभी आम नहीं होती ये सनद रहे।
ये जनता जिस दिन हक़ीक़त समझ गयी,उस दिन से उल्टे दिनों की शुरूआत हो सकती है।
वहीं जनपद की दूसरी सेनाएं भी लामबंद हो रही है। जगह जगज अलख जगाने के सुर लगाए जा रहे है।
नोट : उपरोक्त व्यंग्य एक कल्पना है और किसी जीवित इंसान,वस्तु, व्यक्ति विशेष, संस्था,शहर या स्थान विशेष से इसका कोई सम्बन्ध नहीं है। यदि कोई ऐसा सम्बन्ध पाया जाता है तो ये सिर्फ एक संयोग होगा। न्यूजएजेंसीइण्डिया.कॉम किसी भी तरह से किसी भी वाद विवाद के लिए उत्तरदायी नहीं है।