झील के बीच जगमंदिर में शाही शादी,कार्गो नाव से दूषित होती पिछोला,ट्रक रोक रहे रास्ता दूध तलाई का !
राजस्थान के उदयपुर में शाही शादियों का सिलसिला जारी है। अम्बानी से लेकर रवीना टण्डन तक यहाँ अपनी शादियो का आयोजन कर चुके है। हर कोई रईस चाहता है कि उसके अपने की शादी उदयपुर जैसे रूमानी शहर में हो। इस चाहत का व्यावसायिक दोहन यहाँ के झील किनारे और बीच झील वाले होटल बड़े आराम से करते है।
शाही शादी के दौरान जग मंदिर पर बेतहाशा लाइटिंग कर सजाया जाता है जिससे पीछोला में रहने वाले पक्षी परेशान हो जाते है और साथ ही जग मंदिर में होने वाली शादियों के कारण उठने वाले शोर से झीलों में रहने वाले प्रवासी पक्षी परेशान होकर झील छोड़ चुके है। यही कारण है इस साल पिछोला में सबसे कम प्रवासी पक्षी आये है। निश्चित ही झील का परीस्थिकी तंत्र इन कार्गो बॉट्स ,पार्टियों और कोलाहल के कारण खत्म होता जा रहा है।
जब भी जग मंदिर में शाही शादी होती है तो तैयारियों में लगी कार्गो बॉट्स पैलेस से जगमंदिर तक सामान से इस कदर भर के भेजी जाती है कि उसमें से सामान नीचे गिरने की पूरी संभावना बनी रहती है । (देखिये फ़ोटो ) साथ ही शादियों में होने वाली झूठन और अपशिस्ट निस्तांतरण भी झील के बीचों बिच एक प्रश्न बना हुआ है। इन होटल वालों के पास वैसे तो नगर निगम से गिनी चुनी जेट्टिया ही स्वीकृत है वही ये होटल वाले अवैध तरीके से अपने होटल पर दो अवैध जेट्टिया संचालित करते है जिसमे से एक जेट्टी इनके स्टाफ के लिए होती है दूसरी इनके सामान को लाने ले जाने के लिए जबकि प्रशाशन ने इन्हे अपनी होटल को एक ही जेट्टी संचालित करने को दे रखी है। हाल ही पीछोला झील में नगर निगम और RTO ने पीछोला झील में कार्यवाही कर ताज लेक पैलेस होटल,ओबेराय उदयविलास होटल ,द होटल लीला होटल ,जगत निवास होटल ,उदयकोठी होटल की नावों पर कार्यवाही की थी लेकिन रसूख के आगे दोनों विभागों के प्रतिनिधि और अधिकारी इतने बेबस थे कि उन्हें राजपरिवार से जुड़े HRH और ताज लेक पैलेस होटल ग्रुप की अमानको पर चलती नावों (ताज लेक पैलेस की एक ही नाव पर कार्यवाही हुई जबकि आज भी इनकी नावों पर दोनों ओर पीली पट्टी पर नंबर नहीं लिखे गए है) जग मंदिर में पार्टीयो के कारण कई ट्रक्स दूध तलाई मार्ग पर खड़े हो जाते है और आधा रास्ता रोक लेते है। दूध तलाई मार्ग पर जाम लग जाता है।
जिम्मेदार असफर या तो डरते है कार्यवाही करने से या उन्हें मैनेज कर लिया जाता है। माना कि शाही शादियां उदयपुर की पहचान है ,व्यवसाय देती है लेकिन इसका मतलब ये नही कि पहचान और व्यवसाय के लिए उदयपुर शहर की जीवदायिनी पीछोला की हत्या कर दी जाय।