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News Agency India September 01, 2021 11:03 PM IST

राजस्थान द्वारा पेट्रोल डीजल को जीएसटी के अधीन लाने का विरोध

जयपुर, 17 सितंबर। लखनऊ में आयोजित जीएसटी परिषद की 45 वीं बैठक में राजस्थान की ओर से तकनीकी शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. सुभाष गर्ग ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पत्रों का हवाला देते हुए यह मांग पुरजोर तरीके से उठाई कि राज्य का बकायाजी.एस.टीक्षतिपूर्ति 5603.50 करोड़ का केन्द्र सरकार तत्काल भुगतान करे तथा भविष्य में जी.एस.टीक्षतिपूर्ति का भुगतान समय पर किया जाये इसके साथ ही जी.एस.टी क्षतिपूर्ति की अवधि को आगामी 5 वर्ष तक बढ़ाया जाए।

परिषद में राजस्थान द्वारा पेट्रोल डीजल को जीएसटी के अधीन लाने का विरोध किया गया क्योंकि इससे राज्य सरकार की आमदनी पर बुरा असर पड़ेगा। तकनीकी शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. सुभाष गर्ग द्वारा इसे वैट के अंतर्गत ही रखने की वकालात की गई।

उन्होंने कहा कि पेट्रोल डीजल को जीएसटी में तभी लाया जा सकता है जब इससे होने वाले वित्तीय नुकसान की केन्द्र सरकार वर्तमान एवं भविष्य में शत प्रतिशत भरपाई करें।

वहीं पूर्व में 40 लाख रुपये के टर्न ओवर तक के ईंट भट्टों पर टैक्स नहीं लगता था परन्तु परिषद द्वारा इस छूट को सिर्फ 10 लाख रुपये के टर्न ओवर तक ही सीमित रखने का प्रस्ताव किया गया। इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए राज्य के मंत्री डॉ. सुभाष गर्ग द्वारा ईंट भट्टों का भवन निर्माण के क्षेत्र में आ रही समस्याओं का हवाला दिया गया। इस पर परिषद द्वारा विचार-विमर्श करते हुए अब 20 लाख तक की सीमा के ईंट भट्टों को टैक्स नेट से बाहर रखा गया है।

तकनीकी शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. सुभाष गर्ग द्वाराजी.एस.टी.एनबोर्ड में राजस्थान राज्य को नामित करने हेतु सुझाव दिया गया कि पूर्व में नामित हो चुके राज्यों को पुनः मौका नहीं देकर अन्य राज्यों को मौका दिया जाए। सुझाव को परिषद द्वारा मान लिया गया तथा अब शीघ्र हीजी.एस.टी.एनबोर्ड में राजस्थान का प्रतिनिधित्व हो पाएगा। गौरतलब है कि पूर्व में राज्यों का प्रतिनिधित्व वर्णानुक्रम में करने से राजस्थान राज्य को अनेक वर्षों बाद मौका मिल पाता।

जीएसटी परिषद में ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स द्वारा लिए गए निर्णयों के संबंध में राजस्थान द्वारा यह कहा गया कि चूंकिजी.ओ.एममें 4-5 राज्य आपस में मंत्रणा कर निर्णय लेते है। अतः यह उचित होगा किजी.ओ.एमद्वारा सभी राज्यों से राय ली जाए तत्पश्चात ही किसी निर्णय पर पहुँचा जाए। इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया।

डॉ. सुभाष गर्ग द्वारा आभूषण निर्माताओं की समस्या को भी उठाया गया जिन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट का रिफण्ड नहीं मिल पा रहा है। इस संदर्भ में जीएसटी परिषद द्वारा अगली बैठक में इस पर चर्चा करने का आश्वासान दिया गया। बैठक में राज्य के वित्त सचिव टी. रविकांत एवं वाणिज्यिक कर विभाग के मुख्य आयुक्त रवि जैन भी उपस्थित रहे।

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