स्कूल फीस मामले में राजस्थान हाई कोर्ट से प्रदेश के लाखों अभिभावकों को राहत !
स्कूल फीस वसूली के मामले में राजस्थान हाई कोर्ट से प्रदेश के लाखों अभिभावकों को राहत मिली है। राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत महंती और न्यायमूर्ति महेंद्र गोयल की खंडपीठ ने निजी स्कूलों को 9 अक्टूबर तक किसी भी तरह की फीस जमा करने से रोक दिया है। अदालत अधिवक्ता सुनील समदरिया की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सीजे इंद्रजीत महन्ती की खंडपीठ ने गुरुवार को एकलपीठ के आदेश पर 9 अक्टूबर तक रोक लगा दी है। वहीं अब न्यायालय मामले की अंतिम सुनवाई 5 अक्टूबर को करेगा। अगली सुनवाई सोमवार के लिए रखी गई है।
राज्य सरकार, जो अपील में एक पक्ष भी है, ने कहा कि माता-पिता से 70 प्रतिशत ट्यूशन फीस इकट्ठा करने का एकल पीठ का फैसला आधारहीन था और उसका कोई आधार नहीं था। अपीलकर्ताओं के अनुसार, निजी स्कूलों के प्रबंधन ने शुल्क नियमों के सभी मानदंडों को धता बताते हुए आरटीई अधिनियम के उल्लंघन में ट्यूशन फीस तय की।
अपीलकर्ताओं ने तर्क दिया कि निजी स्कूलों ने कोविद -19 महामारी के दौरान स्कूलों में खर्च की गई राशि का अदालत को ब्योरा नहीं दिया। इसलिए एकल पीठ के आदेश को रद्द किया जाना चाहिए।

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सरकार की तरफ से पेश हुए एडिशनल एडवोकेट जनरल राजेश महर्षि ने कहा कि गुरुवार के आदेश से अब कोई भी स्कूल अभिभावकों से फीस नहीं ले सकता है।
इससे पहले उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने 7 सितंबर को एक अंतरिम आदेश जारी किया था जिसमे कहा गया था कि स्कूल तीन किश्तों में 70 प्रतिशत ट्यूशन फीस जमा कर सकते हैं।उच्च न्यायालय राजस्थान में कैथोलिक शिक्षा संस्थानों की सोसायटी, प्रोग्रेसिव स्कूल एसोसिएशन और अन्य द्वारा प्रस्तुत याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
एकलपीठ के फैसले पर रोक लगने से स्कूल संचालक अब अभिभावकों से फीस वसूली नहीं कर सकेंगे। सरकार की ओर से पैरवी करने वाले अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश महर्षि ने बताया कि आज के आदेश से अब राज्य सरकार के 7 अप्रेल और 9 जुलाई के फीस स्थगन के आदेश प्रभावी हो गए हैं। इसके अनुसार अब कोई भी स्कूल अभिभावकों से फीस वसूली नहीं कर सकता है।
उन्होंने बताया कि कल जारी हुई अनलॉक-5 की गाइडलाइन के अनुसार राज्य सरकार फीस को लेकर नई पॉलिसी बनाने जा रही है। राजस्थान सरकार किसी भी स्कूल के खिलाफ नहीं है। हमारी पॉलिसी में सभी पक्षों को ध्यान में रखा जाएगा।
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