दस्तावेज़ पूरे होने पर 21 दिन में होना चाहिए नामांतरण, शिकायत पर हो सकती है अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही !
स्थानीय निकाय विभागों से संपत्ति हस्तांतरण करवाना आम जनता के लिए हमेशा से टेढ़ी खीर बना हुआ है । जब कोई सामान्य आदमी अधिकारियों के पास संपत्ति हस्तांतरण के लिए जाता है तो उसे तरह-तरह के दस्तावेजों के साथ अनावश्यक जानकारियां मांगी जाती है, जिससे आमजन परेशान हो जाता है और अंततः उसे दलालों का सहारा लेना पड़ता है। इस पर संज्ञान लेते हुए राजस्थान सरकार के स्वायत्त शासन विभाग ने जनता को सहूलियत देते हुए स्थानीय निकाय को आगाह किया है कि बार-बार आवेदकों से चक्कर नहीं लगवाए जाएं और संबंधित कागज पूरे होने पर 21 दिन के भीतर नामांतरण कर दिया जावे।
नाम हस्तांतरण प्रकरण होने चाहिए त्वरित निस्तारित !
उदयपुर सहित राज्य के कई जिलों में प्रॉपर्टी नाम हस्तांतरण में अनावश्यक विलंब किया जाता है । इन मामलों में सेट बैक या लेआउट प्लान या भवन निर्माण स्वीकृति आदि के लिए कनिष्ठ अभियंता या अन्य अधिकारी से मौका निरीक्षण कराया जाकर स्थानीय निकाय की विभिन्न शाखाओं से कई प्रकार की रिपोर्ट ली जाकर अनावश्यक जाँचो /औपचारिकताओं के लिए आवेदकों से चक्कर लगवाए जाते है और कई महीनों तक उनके काम को लंबित रखा जाता है।
उदयपुर शहर के कई लोगों से बात करने पर पता चला कि कई लोगों के महीनों से नामांतरण अटके पड़े है और कार्यवाही पूरी होने का इंतजार कर रहे है।
जबकि यदि नाम हस्तांतरण के प्रकरणों का सहज रूप से निस्तारण किया जाए तो इससे जहां एक और फीस,लीज रेंट में वृद्धि आदि से सरकार को राजस्व की प्राप्ति समय पर होगी बल्कि नगरीय निकायों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी । वहीं इसके साथ आमजन को भी बेहतरीन सुविधा मिलेगी ।संपत्ति के नियमन होने, हस्तांतरण होने या उत्तराधिकार के आने के बाद नए भूस्वामी से नाम हस्तांतरण के बिना कर वसूली में भी कठिनाई आती है इसलिए ऐसे कामों को त्वरित एवं समय बद्ध रूप से कराने की आवश्यकता है।
आपको बताते चलें राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 की धारा 118 में निम्नांकित प्रावधान है-"जब कभी या तो ऐसी सूचना द्वारा या अन्यथा ऐसा अंतरण ,नगर पालिका की जानकारी में आए और ऐसी जांच करने के पश्चात ,जो आवश्यक हो, नगरपालिका रजिस्टर में उस व्यक्ति के स्थान पर जो मुलतः दायी है ,अन्तरिती का नाम प्रतिस्थापित कर दिया जाएगा। राजस्थान नगरी क्षेत्र (कृषि भूमि का गैर कृषिक प्रयोजन के लिए उपयोग की अनुज्ञा और आवंटन) नियम, 2012 के नियम 27 के प्रावधान है कि नाम के अंतरण भूमि के अंतरण के मामले में अंतररिती के पक्ष में नाम के अंतरण के लिए स्थानीय प्राधिकारी को आवेदन के साथ रजिस्ट्री कृत विक्रय विलेख, दान विलेख या वसीयत या अन्य सुसंगत दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएंगे। प्रत्येक अंतरण के लिए आवेदन के साथ ₹10 प्रति वर्ग मीटर की दर से अंतरण निश्चित की जाएगी परंतु मौत के मामलों में नियम के अधीन कोई फीस प्रभारित नहीं की जा सकेगी।
नाम हस्तांतरण के मामलों में आवेदन पत्र के साथ केवल वही दस्तावेज लिए जाते हैं जिनसे भूखंड स्वामी के नाम हस्तांतरण प्रमाणित होता हो, ऐसे दस्तावेजों की सूची निम्न प्रकार है-
सेल डीड या गिफ्ट डीड या हक त्याग अथवा कोर्ट के आदेश पर नामांतरण- ऐसी स्थिति में सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म ,फोटो आईडी (आधार कार्ड /ड्राइविंग लाइसेंस/ पासपोर्ट /वोटर आईडी में से कोई एक) रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड या सेल डीड और हक त्याग की प्रमाणित कॉपी या कोर्ट के ऑर्डर की प्रमाणित कॉपी (कोर्ट केस की अवस्था मे)
वसीयत के आधार पर नामांतरण के लिए सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म फोटो , फ़ोटो आईडी (आधार कार्ड /ड्राइविंग लाइसेंस /पासपोर्ट वोटर /आईडी ,रजिस्टर्ड वसीयत या अन रजिस्टर्ड वसीयत, शपथ पत्र (दो गारंटर) के साथ ,मृत्यु प्रमाण पत्र ,लीज डीड पट्टा अगर उपलब्ध है तो।
डेथ सर्टिफिकेट के आधार पर नामांतरण के लिए सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म ,फोटो आईडी (आधार कार्ड /ड्राइविंग लाइसेंस/ पासपोर्ट /वोटर आईडी ),मृत्यु प्रमाण पत्र ,लीज दीड (पट्टा) अगर उपलब्ध है।
मामले पर संज्ञान लेते हुए राजस्थान सरकार के स्वायत्त शासन विभाग ने आदेश क्रमांक: प.8(ग)(1) नियम /डीएलबी/20/ 39126 दिनांक 15 जनवरी 2020 को लोगों को राहत देते हुए आदेश जारी किए कि अब नाम हस्तांतरण के किसी भी प्रकरण में ना तो मौके की जांच कराई जावे और ना ही लेआउट/ नक्शे की जांच कराई जावे। आवेदक द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों में केवल उत्तराधिकार एवं पंजीकृत अथवा पंजीकृत वसीयत के मामलों में समाचार पत्र में विज्ञप्ति प्रकाशित कराने की कार्रवाई की जावे विक्रय पत्र या गिफ्ट डीड के ऐसे मामलों में जहां नगरी निकाय से पट्टा जारी होने के बाद एक से अधिक बार हस्तांतरण हुआ हो तो भी समाचार पत्र में विज्ञापन विज्ञप्ति प्रकाशित कराई जावे अन्य मामलों में विज्ञप्ति प्रकाशित करवाने की आवश्यकता नहीं है अर्थात मूल क्रेता अथवा आवंटी द्वारा विक्रय पत्र अथवा गिफ्ट डीड किया जावे तो उसके लिए विज्ञप्ति प्रकाशित कराने की आवश्यकता नहीं होगी लेकिन पश्चात वरती हस्तांतरण में आवश्यक होगी ।
विज्ञप्ति किसी एक राज्य स्तरीय प्रमुख समाचार पत्र में आवेदक के खर्चे पर प्रकाशित कराई जावे। इसके समानांतर ही भूखंड पर बकाया की रिपोर्ट लेकर बकाया राशि तथा निर्धारित अंतरण फीस जमा कराने की कार्रवाई भी कर ली जावे । नाम हस्तांतरण की संपूर्ण कार्यवाही 21 दिन में संपादित कर ली जावे।
उपयुक्त आदेश में कहा गया है कि समय सीमा में निस्तारण नहीं करने वाले या अनावश्यक चक्कर लगवाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जावेगी।