सूरजपोल चौराहे पर 8 करोड़ की लागत से बनने वाली पार्किंग पर निषेधाज्ञा का वाद खारिज !
उदयपुर के सूरजपोल चौराहे पर पुराने तांगा स्टैंड पर 8 करोड़ की लागत से बनने वाली मैकेनाइज्ड पार्किंग जो कि 6375 वर्ग फीट पर 86 कारें खड़ी करने के लिए 6 मंजिला मल्टीस्टोरी बनाई जानी थी। अब इसके निर्माण का रास्ता प्रशस्त होता नजर आ रहा है। मैकेनाइज्ड पार्किंग के खिलाफ पर अस्थाई निषेधाज्ञा के प्रार्थना पत्र को मंगलवार को सभी पक्षों की बहस को सुनने के बाद न्यायालय ने नामंजूर कर दिया है। इसके साथ ही नगर निगम उदयपुर की ओर से पेश किए गए प्रार्थना पत्र को भी अदालत ने स्वीकार कर लिया है।
इससे पहले शहर के सिविल न्यायालय उत्तर में तीज का चौक निवासी सुरेश पुत्र ख्याली लाल नागोरी ,नेहरू बाजार निवासी अशोक पुत्र राजेश आचार्य और अंबा माता की घाटी तीतरडी निवासी कृष्ण गोपाल पुत्र विष्णु शंकर आमेटा ने राजस्थान सरकार जरिए जिला कलेक्टर ,सार्वजनिक निर्माण विभाग जरिए मुख्य अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी खंड उदयपुर, जिला परिवहन अधिकारी जरिए प्रादेशिक परिवहन अधिकारी और स्मार्ट सिटी लिमिटेड जरिए सीईओ के खिलाफ स्मार्ट सिटी के तहत सूरजपोल चौराहे पर निर्माणाधीन होने वाली मल्टी स्टोरी पार्किंग को लेकर अंतरिम स्थाई निषेधाज्ञा का प्रार्थना पत्र एवं स्थाई निषेधाज्ञा का वाद न्यायालय में पेश किया था।
वाद की प्रारंभिक बहस में सभी पक्षों को सुनने के बाद मंगलवार को कोर्ट कमिश्नर द्वारा पेश की गई रिपोर्ट के आधार पर पीठासीन अधिकारी रुपेंद्र चौहान ने सूरजपोल पर निर्माणाधीन पार्किंग पर रोक लगाने के अंतरिम अस्थाई निषेधाज्ञा के प्रार्थना पत्र की सुनवाई के बाद नामंजूर कर दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान वादी के अधिवक्ता महेश बागड़ी और वरिष्ठ अधिवक्ता महेश भट्ट ने तर्क दिए कि पूर्व में निर्माणाधीन पार्किंग की जगह तांगा स्टैंड था और ताँगों का संचालन बंद हो जाने के बाद यहां पर सड़क बना दी गई थी जिसका लोग भी उपयोग कर रहे थे। यह सड़क 30 फीट चौड़ी है और पार्किंग स्थल के उत्तर से दक्षिण की तरफ मात्र 27 फीट और एक तरफ वाहन खड़े होने पर यह चौड़ाई 15 फीट ही रह जाती है जिससे भविष्य में ट्रैफिक जाम होने से परेशानी उत्पन्न होने की संभावना बनी रहेगी। साथ ही चौराहे की लाइट हटा देने से चौराहे पर जाम होने की समस्या पैदा हो सकती है और जो पार्किंग का निर्माण किया जा रहा है उसमें भी तकनीकी खामियां हैं। वाहन के घूमने पर 90 डिग्री का कोण बनेगा जिससे भारी ट्रैफिक जाम की समस्या उत्पन्न होगी। निर्माण में भारी राशि का उपयोग किया जा रहा है जो वाहन पार्किंग के अनुपात में बहुत अधिक है।
मामले में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अधिवक्ता जनार्दन भाकर एवं नगर निगम के अधिवक्ता भूपेंद्र जैन ने तर्क देते हुए कहा कि पार्किंग का निर्माण लंबे समय से चल रहा है जो लगभग पूर्ण हो चुका है। इसके साथ ही पार्किंग पूर्णता वैज्ञानिक आधारों पर तकनीकी रूप से मैकेनाइज्ड बनाई जा रही है। वादग्रस्त स्थल पर केवल पिलर का निर्माण कराया जा रहा है पार्किंग स्ट्रक्चर को अन्यत्र तैयार करके उनके ऊपर केबल फिट किया जाना ही शेष है तकनीकी बातों का पूरी तरह निर्माण में ख्याल रखा गया है और पूर्व में भी वहां पर वाहन पार्किंग हुआ करती थी। यहां कभी सड़क बनी ही नहीं और पहले तांगा स्टैंड था जब वाहनों का आगमन नहीं होता था।
सिविल न्यायालय शहर उत्तर के पीठासीन अधिकारी रुपेंद्र चौहान ने अपने फैसले में लिखा कि निर्माणाधीन पार्किंग के उत्तरी तरफ सड़क की सफेद पट्टी व डिवाइडर के मध्य 36 फीट की सड़क व पश्चिम की तरफ 29 फीट 6 इंच की सड़क कोर्ट कमिश्नर राजेश उपाध्याय ने अपनी रिपोर्ट में बताई है और साथ ही 24 फोटोग्राफ्स भी पेश किए हैं ,जहां पर पार्किंग का निर्माण कराया जा रहा है वहां पूर्व में भी गाड़ियां खड़ी रहती थी। पार्किंग के निर्माण के बाद भी इस स्थान पर आवागमन हो सकता है।

https://play.google.com/store/apps/details?id=com.wincompete&hl=en
Disclaimer : All the information on this website is published in good faith and for general information purpose only. www.newsagencyindia.com does not make any warranties about the completeness, reliability and accuracy of this information. Any action you take upon the information you find on this website www.newsagencyindia.com , is strictly at your own risk