22 दिसम्बर 2022 : पीएम नरेंद्र मोदी आज दोपहर में एक उच्च स्तरीय बैठक में देश में कोविड-19 से संबंधित स्थिति की समीक्षा करेंगे। इससे पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी आज कोरोना केसों की समीक्षा के लिए अपने-अपने राज्य के अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे।
चीन में कोरोना के बढ़ते मामले को देखते हुए भारत में भी इसे लेकर आशंकाओं के बादल गिर आये है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार अलर्ट पर है और कोरोना को लेकर बैठकों का दौर भी शुरू हो गया है। देश में कोविड-19 की स्थिति पर बुधवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ बैठक की।
चीनी वैरिएंट BF-7 सितंबर महीने में ही आ गया था भारत में
मंडाविया ने बताया कि कोरोना का खतरनाक चीनी वैरिएंट BF.7 सितंबर महीने में ही भारत आ गया था। वडोदरा में एक एनआरआई महिला में इसके लक्षण मिले थे। महिला अमेरिका से वडोदरा आई थी। उसके संपर्क में आए दो अन्य लोगों की भी जांच हुई थी। हालांकि उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। बाद में महिला ठीक हो गई थी। इसके अलावा BF.7 के दो अन्य केस अहमदाबाद और ओडिशा में भी मिले थे।
ओमिक्रॉन का ही एक सबवैरिएंट है BF.7
BF.7 ओमिक्रॉन का ही एक सबवैरिएंट है. बड़ी बात ये है कि इस वैरिएंट में इम्युनिटी को चकमा देने की ताकत है। इसी वजह से अगर किसी को पहले कोरोना हुआ भी हो, वो फिर इस वैरिएंट से संक्रमित हो सकता है। वैक्सीन लेने के बाद भी शख्स इस वैरिएंट की चपेट में आ सकता है, लेकिन केस की गंभीरता कम रहेगी।
भारत को नहीं है इस नए वैरिएंट से डरने की जरूरत
भारत को इस नए वैरिएंट से डरने की जरूरत नहीं है. लोगों को किसी भी तरह का पैनिक नहीं दिखाना है. सिर्फ सावधानी बरतने की जरूरत है. कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का पालन हो, ये जरूरी है. भीड़-भाड़ वाले इलाकों में जाने से बचें, बाहर जाते समय मास्क लगाकर रखें. यहां ये समझना भी जरूरी है कि भारत में पिछले एक साल में जो भी सब वैरिएंट आए हैं, वो सभी ओमिक्रॉन से ही जुडे़ हुए हैं. और भारत में ओमिक्रॉन वैरिएंट के पहले से मामले आ रहे हैं और कई लोग इससे संक्रमित भी हो चुके हैं. ऐसे में भारत में लोगों की ओमिक्रॉन के खिलाफ इम्युनिटी मजबूत है. इसलिए स्थिति गंभीर बनेगी, ऐसा नहीं लगता।
राहत : भारत में तबाही नहीं मचा पाया चीनी वैरिएंट
आशंकाओं के बीच इन आंकड़ों ने एक बड़ी राहत भी दी है। जिस वैरिएंट BF.7 ने चीन में तबाही मचा दी है, उसका खास असर भारत में अब तक देखने को नहीं मिला है। ये खतरनाक वैरिएंट सितंबर में ही भारत में दस्तक दे चुका है, लेकिन तबाही नहीं मचा पाया। अब तक इससे संक्रमित महज चार ही मरीज मिले हैं। इस तरह से देखा जाए तो भारत ने अपनी पुख्ता तैयारियों और सावधानियों के बदौलत इसके संक्रमण पर रोक लगाने में कामयाबी पाई है। हालांकि, अभी इसे लेकर और एहतियात बरतने की जरूरत है।
भारतीय टीकाकरण ने बचाया
देश में बड़े पैमाने पर हुए टीकाकरण ने कोरोना संक्रमण रोकने में अहम भूमिका निभाई है। करोड़ों लोगों को बूस्टर डोज भी दी गई थी, जिसका असर अब साफ दिख रहा है। सितंबर से दिसंबर का महीना कोरोना संक्रमण के लिए आदर्श माना जाता है, सर्दियों में ये अधिक तेजी से फैलता है। लेकिन इन तीन महीनों में सामने आए चार केस बता रहे हैं कि बड़े पैमाने पर चलाए गए टीकाकरण अभियान ने अपना असर दिखाया है। भारत में प्रमुख रूप से दो वैक्सीन कोविशील्ड और कोवैक्सीन लोगों को दी गई थी। इसमें भारत बायोटेक की कोवैक्सीन पूरी तरह स्वदेशी है।