पीछोला झील में नहीं रुके गड़बड़झाले एक साल से, नहीं चेतता प्रशासन और पूरे कुँए में भांग !
उदयपुर की पीछोला झील में हो रहे गड़बड़ झालो और झीलों पर होटल वालों द्वारा किये गए कब्ज़ों की विस्तृत खबर न्यूज़ एजेंसी इंडिया ने 28 जनवरी 2018 को अपने पाठकों तक पहुचायी थी जिसमे न केवल होटल वालो द्वारा पीछोला में अवैध नावों का संचालन का ज़िक्र था बल्कि अवैध नावों के फोटो,वीडियो के साथ नावों में रेस्टोरेंट के साथ शराब परोसे जाने की सूचना भी दी गई थी। साथ ही अपने पाठकों को सबसे पहले बता दिया कि कुछ नाव जिस्मफरोशी के लिए देर रात किराये भी दी जाती है।
http://newsagencyindia.com/current-news/lake-picholaa-lake-murdered-by-udaipur-hotels/
न्यूज़ के साथ ये भी बताया था कि कैसे कुछ होटल सड़क उपलब्ध होने के बाद भी पीछोला झील द्वारा पर्यटकों को होटल (जैसे द लीला पैलेस होटल),उदय निवास होटल) पर लाकर धड़ल्ले से नियमों की धज्जियां उड़ा रहे है।
इस न्यूज़ में ये भी बताया गया था कि होटल वालों ने कई अवैध जेटिया लगा रखी है और इन जेटियो पर भी देर रात शराब पार्टियां होती है। यहाँ तक कि देर रात को बीच झील में पांटून लगाकर जोड़ो को कैंडल लाइट डिनर की सुविधा भी ये होटल वाले कपल को दे रहे है गोया कि पूरी झील के मालिक ये होटल वाले हो।
इसके साथ ही आपको बताते चले कि झील के मालिकाना हक नगर निगम उदयपुर के पास है और बोटिंग और जेट्टी प्लेटफॉर्म की स्वीकृति भी यही विभाग देता है लेकिन इसकी फाइल्स और सूचना कहाँ और किस अधिकारी के पास है ,इस बारे में सभी अधिकारी अनभिज्ञ नज़र आये ।
या तो ये अधिकारी बताना नही चाहते थे या जान बूझ कर अनजान बन अपने होटल वालो से संबंध प्रगाढ़ कर रहे थे। बानगी ये है कि राजस्थान के प्रमुख दैनिक अखबार द्वारा जब इस बारे में पता किया गया तब भी अधिकारियों ने यही जवाब दिया। इसका मतलब साफ है कि या तो नगर निगम के अधिकारी एक साल से कुछ छिपा रहे है या उन्हें न झील की फिक्र है और न ही इससे प्राप्त होने वाले राजस्व की।
प्रगाढ़ संबंधों के चलते कई होटल वाले अवैध जेटिया बनाते चले जा रहे है और अवैध नाव चला रहे है।
यहाँ ये बात महत्वपूर्ण है कि धारा 5 के तहत नियमानुसार केवल नाव को किराए और टेंडर के आधार पर ही चलाया जा सकता है अर्थात नाव केवल पर्यटकों को किनारे से होटल तक लाने के लिए है लेकिन ये होटल वाले पीछोला के मालिक बन झील में अपने पर्यटकों को बेख़ौफ़ घूमा कर रोज़ लाखों रुपये कूट रहे है। एक ओर बात ये है कि जेट्टी का साल भर का किराया/शुल्क इतना कम है कि एक नाव का दो फेरा ही साल भर का शुल्क वसूल लेता है।
इसके साथ ही नाव चलाने के लिए नाव संचालको को परिवहन विभाग से लाइसेंस लेने के लिए नगर निगम उदयपुर और सिंचाई विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होता है लेकिन ये प्रमाण पत्र कौन जारी कर रहा है और कितने प्रमाण पत्र अब तक जारी किए गए है इस प्रश्न पर नगर निगम और सिंचाई विभाग के अधिकारी बगले जाँकते नज़र आते है।
न्यूज़ एजेंसी इंडिया ने आज से 4 महीने पहले जब इस बात का ज़िक्र अधिकारियों से किया तो उन्होंने कहाँ था कि जेट्टी लगाने की फ़ाइल ही गायब है और हमने किसी को कोई परमिशन नही दी है । इनके पास पूर्व में सिंचाई विभाग की परमिशन है। मतलब साफ था कि या तो अधिकारियों को जेट्टी से मिलने वाले राजस्व से कोई वास्ता नही था या उन्हें झील की कोई फिक्र नही थी या संबध इतने प्रगाढ़ थे कि वे एक साल तक कार्यवाही करने से बचते रहे।
दुख की बात तो ये है कि इन नावों को चलाने के लिए लाइसेंस और फिटनेस की फीस 500 रुपये अर्दवार्षिक है जो कि एक व्यक्ति के नाव किराये से भी कम है और कमोबेश जेट्टी का वार्षिक किराया भी इतना कम है कि एक नाव के एक बार के संचालन में ही पूरे साल का पैसा आ जाता है।साथ ही न्यूज़ एजेंसी इंडिया ने पूर्व में ये भी बताया था कि होटल वाले एक लाइसेंस की आड़ में कई नावे चला कर मनमानी कर रहे है।
यहाँ तक कि इंटरनेट पर इन होटल वालों ने कई वेबसाइटों पर झील में खाने की सुविधा संग अन्य कई सुविधाओं का जिक्र बेख़ौफ़ किया हुआ है।
होटल वालों की हिम्मत और पैसे के दम पर होने वाले संबंधों की बानगी देखिये कि जब एक दिन पहले परिवहन विभाग ने तीन होटल की पार्टी बोट को सीज़ कर उनके लाइसेंस निरस्त कर दिए थे फिर भी आमेट हवेली होटल की नाव अगले दिन सुबह बेख़ौफ़ संचालित हो रही थी।(देखे वीडियो) मतलब साफ है कि ये होटल वाले इतने बेख़ौफ़ है कि इन्हें प्रशाशन का भय तक नही है या सभी इनके संबधी है ।