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Current News / मेवाड़ के 140 साल पुराने नायाब फ़ोटो और उस समय के फोटोग्राफी यन्त्र !

clean-udaipur मेवाड़ के 140 साल पुराने नायाब फ़ोटो और उस समय के फोटोग्राफी यन्त्र !
News Agency India May 05, 2019 08:24 AM IST
गणगौर का दरबार बड़ी नाव में

गणगौर का दरबार बड़ी नाव में

मेवाड़ के 140 साल पुराने नायाब फ़ोटो और उस समय के फोटोग्राफी यन्त्र !

शहर कोतवाली घण्टाघर

शहर कोतवाली घण्टाघर

सेल्फी स्टीक वीथ कोडेक फोटोग्राफी बल्ब

सेल्फी स्टीक वीथ कोडेक फोटोग्राफी बल्ब

फोटोग्राफी एक नायाब शौक है और पुराने समय से लोग इसके दीवाने रहे है। फोटोग्राफी का इतिहास भारत में ज्यादा पुराना नहीं है।खास कर राजस्थान के मेवाड़ में फोटोग्राफी का दौर कोई ज्यादा अच्छा नहीं रहा और यही कारण है कि उदयपुर और मेवाड़ से जुड़े पुराने फोटो बहुत कम देखने को मिलते है।
फोटो अतीत में झांकने की एक चमत्कारिक खोज है इससे पहले के समय में पोट्रेट के द्वारा अतीत के चिलमन में झांक सकते थे।

1880 में कोडेक कम्पनी ने फोटोग्राफी को काफी सुलभ किया था। इससे पूर्व लकडी का बड़ा कैमरा आता था जिसमें लेन्स का संयोजन चमड़े की धोकनी के द्वारा किया जाता था नेगेटिव कांच के चांदी मिश्रित स्लाइड के रूप में शटर बाक्स मे बम्बई से आते थे। फोटो लेने वाले फोटोग्राफर और जिसका फोटो लेने है उसे एक गहन अध्ययन और समय संयोजन के साथ तैयारी के साथ लिया जाता था और इस प्रोसेसिंग में बडी गजब की तैयारी करनी पड़ती थी।

लाईट प्रचलन में नहीं था और बादल छाने, शाम होने पर फोटो लेना चेलेंजिग हो जाता था तब सौर बारूद की चिमटी जला कर समय संयोजन के साथ फोटो क्लिक किया जाता था। आधुनिक काल में में बड़े से बड़ा फोटोग्राफर इस विधी के द्वारा फोटो नहीं खिंच सकते है। पुराने श्वेत श्याम फोटो आज भी उस समय की फोटोग्राफी का बेहतरीन प्रदर्शन है जिनकी चमक आज भी बरकरार है ।

फिर कोडेक कम्पनी ने बड़े एक्सरे नुमा प्लास्टिक के श्वेत श्याम नेगेटिव निकाले और उन कैमरों में टाईमर भी लगा था जिससे फोटो खींचने और खिंचवाने वाले सभी का फोटो एक साथ आ सके। इस तरह सेल्फी की शुरुआत कोडेक कम्पनी ने सौ साल पहले ही कर दी थी जिसका परिष्कृत रूप आज हम देख रहे है। उस समय फोटोग्राफी कला सीखने के लिए बोम्बे जाना पड़ता था।

फिर 1920 के आसपास श्वेत श्याम फोटो का प्रचलन बढ़ा लेकिन महंगा शौक पत्रकारों ,र‌ईसो या शौकिन लोगों तक ही सीमित था तब तक श्वेत श्याम विडियो भी बनने लग ग‌ए थे।

मेवाड़ में फोटो ग्राफी महाराणा स्वरूप सिंह के काल में शुरू हुई। परन्तु महाराणा सज्जनसिंह जी के काल में चित्तौड़ में दरबार किया गया उसकी प्रतिलिपि न्यूज़एजेंसीइंडिया के पास है। यह बात 1880 के लगभग की है। फिर फतहसिह जी के काल के कुछ फोटो हैं। इनका शासनकाल लम्बा था फिर महाराणा भूपालसिंह के काल के बहुत से फोटो है ये सभी ब्लेक एंड वाइट है ।

70 के दशक में रंगीन छाया चित्र बनने लगे और कोडेक ने 24 फोटो और 32 फोटो वाली रील बजार मे उतारी परन्तु कोई लेब नहीं होने ये बडी सिटी में डेवलप होने जाती थी लेकिन तब तक सिंगल श्वेत श्याम सिंगल नेगेटिव यहां लोग डेवलपर लाकर धोने लग ग‌ए थे। परन्तु इनकी शीट, रसायन सभी विदेश से आता था।

एक समय ऐसा भी था कि फोटो ग्राफर नेगेटिव मे मानवीय गलती से लाईट जल जानें पर नेगेटिव करप्ट हो जाने पर दुकान बन्द कर भाग जाया करते थे क्योंकि शादी करने वाला तों फोटो खिंचवाने के लिए वापस शादी करने से रहा।

 

संकलनकर्ता और इतिहासकार :
जोगेन्द्र पुरोहित
घाणेराव घाटी ,उदयपुर (राजस्थान)

शोध :दिनेश भट्ट (न्यूज़एजेंसीइंडिया.कॉम)

लकड़ी का बाकस जिसमें ये नेगेटिव आते

लकड़ी का बाकस जिसमें ये नेगेटिव आते

कांच का नेगेटिव

कांच का नेगेटिव

महाराणा भुपालसिह जी के बाल्यकाल का फोटो

महाराणा भुपालसिह जी के बाल्यकाल का फोटो

प्लास्टिक सिंगल शोट नेगेटिव

प्लास्टिक सिंगल शोट नेगेटिव

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