मोदी सरकार का पासपोर्ट को नागरिकता प्रमाण मानने से इंकार ,लाखों नकली भारतीय कामगार मुश्किल में !
जहाँ समूचा विपक्ष और पाक प्रायोजित वर्ग नागरिकता संसोधन कानून CAA के विरोध में देश विरोधी प्रोटेस्ट कर रहा था वही चुपचाप मोदी सरकार द्वारा एक ओर मुद्दा विपक्ष के साथ देश विरोधियों को पकड़ा दिया है । गृह मंत्रालय & मिनिस्ट्री ऑफ़ एक्सटर्नल अफेयर्स ने सभी देशों को एक नोटिस भेजा है कि भारतीय पासपोर्ट केवल हवाई अड्डों, जहाज बंदरगाहों आदि के माध्यम से यात्रा और पारित करने के उद्देश्य के लिए एक वैध दस्तावेज है। लेकिन भारतीय नागरिकता के प्रमाण के रूप में पासपोर्ट का इस्तेमाल नहीं माना जाएगा।
सरकार ने भी घोषणा की है कि एक वर्ष के भीतर नागरिकता कार्ड भारतीय नागरिकों को भारतीय नागरिकता के केवल वैध प्रमाण के रूप में दिए जाएंगे।अधिकांश खाड़ी देशों ने एक कानून बनाया है जिसमे सभी श्रमिकों को नागरिकता कार्ड प्राप्त करना होगा। इसका मतलब है कि कई बांग्लादेशी, पाकिस्तानी और अन्य मुस्लिम जो खाड़ी देशों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, हमेशा अपने साथ दो पासपोर्ट लिए घूमते हैं। भारतीय कामगारों को सभी खाड़ी देशों में सबसे ज्यादा भूगतान किया जाता है।
बांग्लादेश समेत पाकिस्तान के मुस्लिम कामगार कई भारतीय पासपोर्ट बना कर वहाँ भारतीय के रूप में काम कर ज्यादा पैसा ले रहे हैं, लेकिन भारतीय नागरिकता कार्ड प्राप्त नहीं कर सकते है क्योंकि इसे नकली भारतीय पासपोर्ट की तरह नहीं खरीदा जा सकता है।उन्हें खाड़ी जेलों में रखा जाएगा या उन्हें खाड़ी से बाहर निकाल दिया जाएगा और फिर से प्रवेश नहीं किया जा सकता है। अनुमानित तौर पर 50 लाख से 1 करोड़ लोगों के पास पड़ोसी देश से नकली भारतीय पासपोर्ट हैं और वे खाड़ी में नौकरियों को तुरंत खो देने वाले है ।
इसे वास्तव में प्रभावी रणनीति कहा जाता है कि बड़े पैमाने पर फर्जी पासपोर्ट के खतरे के साथ भारत का नाम पडोसी देशों के लोग अरब देशों में खराब कर सुरक्षा को खतरा दिखा रहे थे। सभी खाड़ी देशों ने इस उपाय को मंजूरी दे दी थी क्योंकि वे उन आतंकवादियों से छुटकारा पाना चाहते हैं जो आजकल मुस्लिमों के रूप में काम करते हैं। वे चाहते हैं कि इन नौकरियों को स्थानीय युवा को दिया जाए। इमरान खान ने इस नए मुद्दे के कारण तुरंत मलेशिया सहित अपनी 3 अन्य देशों की यात्रा रद्द कर दी है।
बांग्लादेश अब कह रहा है - अगर साबित कर दिया जाता है तो वे अपने लोगों को वापस लेने के लिए तैयार हैं बजायकि उन्हें खाड़ी जेलों में भेजा जाय । भारत में विपक्ष वोट बैंक की राजनीति खेल रहा हैं, उन्हें जब इस तथ्य के बारे में पता चलेगा कि तो सभी शांतिपूर्ण तरीके से उनके खिलाफ हो जाएंगे। तो अब वे किस विरोध का विरोध कर रहे हैं?