सेण्ट्रल एकेडमी स्कूल में फीस वृद्धि के खिलाफ अभिभावक आक्रोशित,मैनेजमेंट ने डराया !
उदयपुर में प्राइवेट स्कूल की मनमानी फीस वृद्धि और जिला प्रशाशन और शिक्षा विभाग की मूकदर्शिता कोई नया खेल नहीं है। कई स्कूल अभिभावक तो इस बात से चुप रह जाते है कि कही उनके बच्चे का भविष्य स्कूल खराब न कर दे ,ये सोच कर चुपचाप स्कूल वालों की मनमानी सहना आम बात हो गया है। स्कूल वालों ने भी फीस बढ़ाने के साथ पैसे वसूलने के नए हथकंडे अपना लिए है।
पहले स्कूल वाले अपनी किताबों के सेट (जिन्हें अभिभावकों को हज़ारों रुपए में खरीदना होता है )अपनी सेटिंग की दुकानों पर रखवा कर किताब वालो से मोटा कमिशन वसूलते है फिर जुलाई में आकर फीस निर्धारण करते है ताकि बीच सत्र में अभिभावक अपने बच्चे को स्कूल से हटा नहीं पावे। कमोबेश सारे उदयपुर के स्कूल ऐसा ही करते है।
स्कूल फीस वृद्धि के विरोध में उदयपुर के सेंट्रल एकेडमी स्कूल के अभिभावक स्कूल में एकत्र हुए। सारे अभिभावक एकत्रित होकर अपना मत व्यक्त करने गए। स्कूल की हर साल फ़ीस वृद्धि को लेकर कोई सुनने को तैयार नहीं हुआ।
चेयरमैन ने अभिभावकों से कहा कि -" कहीं भी जाओ ,कलेक्टर के पास, मजिस्ट्रेट के पास ! 10 प्रतिशत वृद्धि होकर रहेगी।"अभिभावकों से दुर्व्यवहार किया और कहा कि आप अपने बच्चे स्कूल से निकाल लो।
जब कि अभिभावक रिक्वेस्ट कर रहे थे। पुरा मामला गरम हो गया और नारेबाजी शुरू हो गयी। स्कूल प्रशाषन कोई बात करने पर राजी नहीं हुआ और अभिभावकों को धमकाया कि फीस तो बढेगी नहीं तो टीसी ले लो।अभिवावकों ने कहा आप फीस जुलाई में डिक्लेयर कर रहे हो। पहले करते तो हम टीसी ले लेते।अभिवावको की सुनवाई न होने पर पेरेंट्स ने स्कुल प्रशासन के खिलाफ जम कर नारेबाजी की। चेयरमैन रिपोर्टर को भी कवरेज करने से मना कर अपने चेम्बर्स के बाहर चार गार्ड लगा कर बैठ गए जबकि मिडिया पर्सन और पेरेंट्स केवल बात कर अपनी व्यथा बताकर विकल्प या समाधान चाह रहे थे।
लोगों ने न्युज पैपर का हवाला देकर कहा सरकार ने आदेश दिए हैं प्राईवेट स्कूल मनमाने ढंग से फीस वृद्धि नहीं कर सकते है। परन्तु मिश्रा जी ने कहा -"मैं नहीं मानता जो भी चाहे सोमवार सुबह टीसी ले जा सकते है। "