उदयपुर के बेदला शिकारबाड़ी में पैंथर परिवार की दस्तक,सुबह शाम घुमने वाले रहे सावधान !
उदयपुर शहर के आसपास के आबादी क्षेत्र पैंथर परिवार के लिए मुफीद जगह बनते जा रहे है। पैंथर की चहलकदमी कभी शिकारबाड़ी(गोवर्धन विलास) तो कभी गुलाब बाग़ और दूध तलाई के आसपास कई बार देखने को मिल रही है।लेकिन इस बार बेदला की शिकारबाड़ी रोड़ पर पैैंथर का कुनबा बेखौफ होकर पहाड़ी चट्टानों पर घूूमते हुए नजर आ रहा है। पैैंथर के कुनबे को देखकर आसपास के ग्रामीण और मार्बल फैक्ट्रियों में काम करने वाले लोग दहशत में हैंं।
सुबह जल्दी बेदला के आसपास ,सुखेर और अम्बेरी की ओर पैदल घूमने वालों और वाहन सवारों को सावधानी बरतने की ताकीद की जाती है और अल सुबह अगर इन इलाकों में यदि आपको यकायक कुत्तों के एक साथ भोकने की आवाज़ आये तो समझ जाइये कि शायद पैंथर आसपास हो सकता है।
शुक्रवार देर शाम को तीन पैैंथर एक साथ शिकारबाड़ी रोड़ से सटी पहाड़ी पर सुस्ताते नजर आए। वही उपस्थित एक व्यक्ति ने उनका वीडियो बना लिया। वीडियो में पैैंथर चट्टान पर अलग अलग जगह बैठे हैंं। पैैंथर शाम होते ही आसपास की फैक्ट्रियों ओर गांव की तरफ बढ़ते हैंं। अब तक इन्होंने किसी इंसान को नुकसान नहीं पहुंचाया लेकिन कई बार कुत्तों और पालतू जानवरों का शिकार कर देते हैंं। बेदला क्षेत्र की पहाडिय़ों पर राज-दरबारों के समय की कई ओदियां(शिकारगाह) बनी हुई हैंं। ऐसे में इस इलाके से लेकर चिरवा तक के पहाड़ों में कई पैैंथर और वन्यजीव विचरण करते रहते हैंं।
पूर्व में वैसे भी उदयपुर के आसपास कई जंगली वन्य जीव आसानी से पाए जाते थे और धीरे धीरे वन्य क्षेत्र में पाबन्दी के बावजूद कई निर्माण होते चले गए और पैंथर के शिकार खत्म होते चले गए। अब पैंथर को खरगोश ,नेवले जैसे छोटे शिकार भी वन क्षेत्र में नहीं मिल पा रहे और मजबूरन इन्हे शहर की तरफ रुख करना पड रहा है।