जयपुर, 24 मार्च। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए मंगलवार को विश्वविद्यालय के स्वराज सभागार में एक दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट वर्कशॉप का आयोजन किया। इस कार्यशाला में राजस्थान सरकार के उप मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे।
विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यशाला में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (एबीआरएसएम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. नारायण लाल गुप्ता, संगठन मंत्री श्री महेंद्र कपूर, कुलसचिव श्री कैलाश चंद्र शर्मा सहित बोर्ड ऑफ स्टडीज के सदस्य, संकाय सदस्य एवं शोधार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। यह कार्यशाला पाठ्यक्रम निर्माण, अध्यादेश क्रियान्वयन तथा एनईपी की मूल भावना को संकाय सदस्यों तक संप्रेषित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई।
मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए राज्य के उप मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने कार्यशाला के आयोजन में कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय ने इस फैकल्टी डेवलपमेंट वर्कशॉप के माध्यम से प्रदेश के शिक्षा जगत में एक नई मिसाल कायम की है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि एमडीएसयू राजस्थान का पहला विश्वविद्यालय है जिसने एनईपी 2020 के अनुरूप अध्यादेशों का निर्माण कर उन्हें संस्थागत स्वरूप प्रदान किया है। डॉ. बैरवा ने कहा, शिक्षक राष्ट्र के निर्माता और ज्ञान के प्रकाश स्तंभ होते हैं। एक शिक्षक केवल किताबी ज्ञान नहीं देता, बल्कि चरित्र निर्माण, सही दिशा का मार्गदर्शन और आत्मनिर्भरता भी सिखाता है। सरकार केवल नीतियाँ बना सकती है, किंतु उन्हें लागू शिक्षकों द्वारा ही किया जा सकता है।
राजस्थान सरकार की उच्च शिक्षा संबंधी उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी राजकीय महाविद्यालयों में च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम एवं सेमेस्टर सिस्टम लागू कर दिया गया है। उच्च शिक्षा को कौशल आधारित एवं व्यावहारिक बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। लघु, सीमांत, बंटाईदार किसानों एवं खेतीहर श्रमिकों के बच्चों के लिए सत्र 2024-25 से शुल्क माफी की व्यवस्था की गई है। छात्राओं के लिए 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण तथा ब्लैक बेल्ट योग्य छात्राओं को प्रतिशत बोनस अंक का प्रावधान, 71 नवीन राजकीय महाविद्यालयों की स्थापना जिनमें 36 सामान्य शिक्षा, 25 कन्या एवं 9 कृषि महाविद्यालय सम्मिलित हैं। एआई, रोबोटिक्स एवं 3डी प्रिंटिंग जैसे भविष्योन्मुखी पाठ्यक्रम प्रमुख तकनीकी संस्थानों में शुरू किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य स्पष्ट है। केवल डिग्री नहीं, दक्षता भी दें, नौकरियाँ भी दें और नवाचार भी दें। राजस्थान के युवा देश के स्टार्टअप इको-सिस्टम में न केवल प्रतिभागी बनें, बल्कि लीडर और रोजगार देने वाले भी बनें। उन्होंने महर्षि दयानंद सरस्वती की महान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस विश्वविद्यालय ने उस परंपरा को जीवंत रखते हुए एनईपी के क्रियान्वयन में अग्रणी भूमिका का निर्वहन कर रहा है। उन्होंने देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के स्वप्न को साकार करने हेतु सभी शिक्षकों से मिलकर काम करने का आह्वान किया।
कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के संदर्भ में राज्य सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि एनईपी एक व्यापक एवं गतिशील दस्तावेज है, जिसका सफल कार्यान्वयन केवल विश्वविद्यालय स्तर पर नहीं, बल्कि सरकार एवं विश्वविद्यालयों के समन्वित प्रयास से ही संभव है।