उदयपुर की झीलों में जेट्टीयों के लिए कोई नियम कायदे नहीं, मन मर्जी चाहे जैसी बना लीजिए!
उदयपुर में झीलों को लेकर इन दिनों जनता,प्रशाषन और मीडिया तीनों सक्रिय दिखायी दे रहे है। जनता के दिल में बसती है झीलें इसलिए जनता गाहे बगाहे उदयपुर की झीलों से जुड़े मुद्दे प्रशाषन के कम सुनने वाले कानों तक लाती रहती है।
फिलहाल उदयपुर की झीलों में नाव संचालन के साथ जेट्टीयों का मुद्दा गर्म है। पीछोला में 78 वैध नावों के साथ कई अवैध नावों की भरमार है। लेकिन इसके साथ ही झील में होटल माफिया सहित अन्य लोगों ने मनमर्जी से पीछोला झील में जेट्टीयां उतार रखी है।
इनमें से उदयपुर की एक नामी गिरामी पाँच सितारा होटल भी शामिल है और सच तो ये है कि झीलों में हर तरफ जेट्टीयां ही जेट्टीयां बिखरी पड़ी है जिन्हें इंस्पेक्शन के पहले या तो छुपा दिया जाता है या हटा दिया जाता है।
महत्वपूर्ण बात ये है कि उदयपुर नगर निगम ने आज तक झील में उतारे जाने वाली जेट्टी/प्लेटफार्म के लिए न तो कोई नियम बनाये है और न कोई शर्त। यही कारण है कि जेट्टी लगाने की अनुमति मिलने के साथ ही होटल वाले अपने मन मर्जी आकार की जेट्टीयां उदयपुर की झीलों में उतार देते है और सूत्र बताते है कि देर रात इनका व्यवसायिक दोहन तक किया जाता है।
हद तो तब हो जाती है कि जेट्टी जो कि नाव संचालन के लिए दी जाती है ,उस पर वेटिंग लाउन्ज जैसी सुविधाएं दी जा रही है। बाकायदा जेट्टीयों पर गार्ड केबिन बनाये गए है। झील निहारने के लिए बैंच और टेबल तक लगायी गयी है। कुछ होटल वालों ने तो बाकायदा पीछोला किनारे पर अपने हिसाब से वास्तु परिवर्तन कर लिया है। साथ ही जेट्टीयों के लिए नियम कायदे नही होने से कई होटल वालों ने ऐसी विशालकाय जेट्टीयां झील में उतार रखी है जैसे कोई पोर्ट हो।
ऐसे में लाज़मी प्रश्न ये है कि जेट्टीयां नावों में बैठने के लिए प्लेटफॉर्म है अथवा वेटिंग लाउन्ज ? इस तरह जेट्टीयों पर पर्यटकों का बैठना कभी दुःस्वप्न भी बन सकता है।
झील में कई जगहकिनारों पर पुरानी जेट्टियाँ पड़ी है जिनके मालिकों ने इसे हटाने की जेहमत आज तक नहीं उठायी है। कुछ होटल वालों ने बिना अनुमति होटल के पीछे छूपी हुई जेट्टियाँ लगा रखी है और पूछने पर बताते है कि ये जेट्टी तो हमने स्टाफ के आने जाने के लिए बनायी है लेकिन अनुमति के बारे में पूछने पर ये लोग बगलें झाँकने लग जाते है। ऐसा नहीं है कि स्थानीय प्रशाशन को इस बात की भनक नहीं है लेकिन कहीं गोली बिस्किट के सम्बन्ध आड़े आ जाते है तो कहीं संगठित लॉबी से लड़ने का डर ईमानदार अधिकारी को आगे आने नहीं देता।
मजे की बात ये है कि जिनको नाखून दिये गए है वो ही गोली बिस्किट की आड़ में नाखूनों को छुपाए बैठे है और कुछ तो दो कदम आगे चल कर अपने वरद हस्तों को मुश्किल में से निकलने के तोड़ तक बताते है।

https://play.google.com/store/apps/details?id=com.wincompete&hl=en
Disclaimer : All the information on this website is published in good faith and for general information purpose only. www.newsagencyindia.com does not make any warranties about the completeness, reliability and accuracy of this information. Any action you take upon the information you find on this website www.newsagencyindia.com , is strictly at your own risk.