उरी की रात: जब पाकिस्तान के ड्रोन गिरे CISF के जज़्बे के आगे, 19 जवानों ने पेश की वीरता की मिसाल
मई की वीरान रात थी — 6 और 7 मई 2025 की दरमियानी घड़ी। भारत ने कुछ ही घंटे पहले ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत की थी, जो पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में हिंदुस्तान की हिम्मत का नया अध्याय बना था। लेकिन जवाबी आग में झुलस चुका पाकिस्तान चैन से कब बैठने वाला था?
हमला — बिजलीघर को बनाया निशाना
रात करीब सवा एक बजे नियंत्रण रेखा के उस पार से जोरदार गोलेबारी शुरू हुई। निशाना था उरी जलविद्युत परियोजना (UHEP-I और II) — वो परियोजना जो जम्मू-कश्मीर की रगों में बिजली बनकर दौड़ती है। उसी वक्त रडार पर दिखे दो संदिग्ध ड्रोन – हथियार लदे, लक्षित उरी पावर स्टेशन की ओर बढ़ते हुए।
मोर्चे पर थे कमांडेंट रवि यादव और उनकी टीम
फायरिंग की आवाज़ों के बीच CISF कमांडेंट रवि यादव और उनकी 18 सदस्यीय टीम ने मोर्चा संभाल लिया। एक ओर गोलाबारी, दूसरी ओर हवा में मंडराते ड्रोन — लेकिन टीम के हौसले पत्थर की तरह मजबूत।कुछ ही पलों में फायर कंट्रोल यूनिट सक्रिय हुई। सटीक निशाने से दोनों ड्रोन को गिराया गया। विस्फोट के साथ आसमान में उठी आग की लपटें मानो दुश्मन की मंशा को वहीं राख कर गईं।
हिम्मत की दूसरी तस्वीर — बचाव अभियान
गोलेबारी अभी थमी भी नहीं थी कि एक और मोर्चा खुला — NHPC कॉलोनी की सुरक्षा। वहां परिवारों में डर फैल चुका था। CISF जवान एक-एक दरवाजा खटखटाते हुए निकले।
“सभी को बाहर निकालो, कोई पीछे मत रह जाए!” – यही आदेश गूंज रहा था।महिलाएं, बच्चे, और कर्मी – सबको सुरक्षित बेस कैंप तक पहुंचाया गया। अगल-बगल से गोलियां गुजर रही थीं, लेकिन CISF का हर जवान ढाल बनकर खड़ा रहा। नतीजा – एक भी नागरिक हताहत नहीं हुआ।नई दिल्ली में गूंजा नामकुछ महीने बाद, CISF वीरता सम्मान समारोह में जब इन 19 जवानों के नाम पुकारे गए, पूरा हाल तालियों से गूंज उठा। क्योंकि यह सिर्फ एक सुरक्षा अभियान नहीं था – यह कहानी थी जज़्बे, निष्ठा और मातृभूमि के प्रति कर्तव्य की।