वर्तमान 4 महीनों के खर्च में आ सकती है झील साफ़ करने वाली नयी सोलर आधारित डिवीडिंग मशीन
पीछोला झील सदियों से उदयपुर वासियों की प्यास बुझाती चली आ रही है। इसी झील के कारण यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता में चार चाँद लगे हुए है और पर्यटन फल फूल रहा है। लेकिन विगत कुछ सालों से झील में जलकुंभी,कचरे ,पॉलीथिन और जलीय घास की भरमार हो चली है। हालाँकि झील के किनारे जहाँ होटलें,रेस्टोरेंट हैं और पर्यटकों की बोट आती जाती है,वहाँ थोड़ा बहुत पानी साफ नजर आता है। लेकिन फिर भी पीछोला झील के कुम्हारिया तालाब,,अमरकुंड, रंगसागर और स्वरूपसागर में गन्दगी की भरमार है और जलीय जीवो सहित मछलिया काल की ग्रास बनती जा रही है।
वर्ष 2017 से झील का स्वामित्व नगर निगम के पास है और NLCP प्रोजेक्ट के तहत 5 वर्ष पहले 2.75 करोड़ में डिविडिंग मशीन खरीदी गयी और इसी डिवीडिंग मशीन से झीलों की सफाई करवाई जा रही है । लेकिन ये मशीन और इसका नियोजन विवादों के घेरे में है। एक RTI के अनुसार नगर निगम उदयपुर पीछोला की सफाई पर हर साल औसतन 1 करोड़ 6 लाख 66 हजार 666 रुपए खर्च कर रहा है और 2014 से 2020 तक कुल 4.80 करोड़ रुपए झील की सफाई पर खर्च हो चुके हैं।
झील सुरक्षा व विकास समिति उदयपुर के सदस्य तेजशंकर पालीवाल के अनुसार इस डिविंडिंग मशीन पर प्रतिदिन अधिकतम 9 हजार रुपए का खर्च आ सकता है, लेकिन RTI में रोज औसतन 29 हजार का खर्च बताया गया है।
वहीँ एक प्रश्न अब भी अनुत्तरित है कि जब झील में पेट्रोल /डीजल चलित मशीनों/इंजीन का उपयोग पर रोक है तो डीजल चलित डिवीडिंग मशीन कैसे झील में संचालित की जा रही है। क्या सुरसा के मुँह की तरह ईंधन खाने वाली इस डिवीडिंग मशीन से जलीय जीवों और झील के पारिस्थिकी तंत्र को नुकसान नहीं हो रहा है ? चूँकि बाजार में ग्रीन ईंधन जैसे सोलर एनर्जी से चलने वाली डिवीडिंग (वीड हार्वेस्टर ) उपलब्ध है और ये बैटरी और रिमोट से संचालित भी किये जा सकते है। इसके साथ ही इनकी कीमत भी कुछ लाखों में (लगभग 12 -30 लाख) में ही है और उदयपुर की हर झील में इस तरह की मशीने लगा कर सफाई की जा सकती है। वहीं कुछ मशीन ऐसी भी उपलब्ध है जो झील के पेटे में से जलीय घास की जड़ों तक को खिंच लेती है जिससे इनके दोबारा उग आने की समस्या से निजात भी मिल सकती है। ये मशीनें बैटरी,सोलर के साथ एलपीजी गैस से भी चलायी जा सकती है।
कुल मिलाकर वर्तमान में इस मशीन से जुड़े अन्य उपक्रमों सहित औसतन प्रतिवर्ष 1 करोड़ 6 लाख 66 हजार 666 रुपए खर्च हो रहे हैं। इसका मतलब ये हुआ कि प्रतिमाह 8.88 लाख और प्रतिदिन 29629 रुपए खर्च हो रहे हैं। इतने पैसे में तो हर चार माह में नयी सोलर एनर्जी से चलने वाली डिवीडिंग (वीड हार्वेस्टर) खरीद कर झीलों की सफाई की जा सकती है। साथ ही एक ही मशीन के भरोसे झील की सफाई दांव पर नहीं लगेगी और कई ऑपेरटर्स को काम पर लगाकर रोजगार सृजन किया जा सकता है।
इन मशीनों की जानकारी के लिए केवल इंटरनेट पर 'SOLAR WEED HARVESTER FOR LAKES' कीवर्ड डाल कर और भी जानकारी ली जा सकती है।
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