आखिर मार ही दिये सूरजपोल के 50 से ज्यादा जिंदा पेड़ पौधे नगर निगम और स्मार्टसिटी उदयपुर ने !
जहाँ एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वृक्षारोपण और जल संरक्षण को बढ़ावा देने की बात कर रहे है वही नगर निगम उदयपुर की उध्यान शाखा के निर्दयी कर्मचारी हरे पौधों को मारने में कोई कोताही नहीं बरत रहे है। जिन्दा पौधों को मारने की बेहतरीन विधा में नगर निगम उदयपुर की उध्यान शाखा के लापरवाह कर्मचारीयों का कोई सानी नहीं है।
कर्मचारियों की कार्यकुशलता का परिचय इस बात से दिया जा सकता है कि सूरजपोल पर न्यूज़एजेंसीइंडियाडॉटकॉम की टीम ने गमलों में और अन्य किनारों पर पौधे लगाए थे जो 5 महीनों में बड़े होकर फूल तक देने लगे थे।लेकिन सूरजपोल नव निर्माण के दौरान जितने भी छोटे पौधे उद्यान विभाग के कर्मचारियों ने शिफ़्ट किये वे सब के सब मर गए। जब बड़े गमलें शिफ्ट करने की बारी आयी तो गमलों को ज़मीन पर रख पटक कर मिटटी निकाल दी गयी और बेजुबान पौधों को निकाल फेंका गया। इनमे से बहुत सारे मृत पौधे और पेड़ अब भी गार्डन में पड़े हुए है। कई पेड़ पौधे (जो निर्माण कार्य में बीच में आरहे है ) शिफ्ट करने के लिए निर्माण और उद्यान विभाग के अफसरों को कई बार आग्रह किया लेकिन चम्पा ,बोटल पाम और अमरुद के बड़े पेड़ अभी तक शिफ्ट नहीं किये गए है। जितने भी छोटे पौधे उद्यान विभाग के कर्मचारियों ने शिफ़्ट किये वे सब के सब मर गए। साथ ही न्यूज़एजेंसीइंडियाडॉटकॉम द्वारा गमलों में लगाए गए हज़ारों रूपये के पौधों को भी गमले नर्सरी शिफ़्ट करने के दौरान उखाड़ फेंका गया।
समझ नहीं आता कि कोई हरे पौधों के लिए इतना निर्दयी कैसे हो सकता है ? वो भी तब जब वो उध्यान शाखा का ही कर्मचारी हो ! क्यों वृक्षारोपण और संवर्धन अब तक स्मार्टसिटी और नगर निगम के मुख्य मुद्दों में शामिल नहीं किया गया ? क्यों उदयपुर शहर पुरानी हरीतिमा खोकर कंक्रीट का जंगल बनता जा रहा है ?
सवाल अनेक है ! लेकिन हम तो पूछते रहेंगे !