स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 में उदयपुर नगर निगम पीछे, छीन सकता है ओडीएफ प्लस प्लस का तमगा !
किसी समय राजस्थान और भारत का सबसे साफ रहने वाला शहर आज राजस्थान और भारत के अन्य नगरों की तुलना में स्वच्छता के मामले में पिछड़ता चला जा रहा है। उदयपुर नगर निगम की स्वास्थ्य शाखा के कर्मचारी जितनी संजीदगी से काम करना चाहिए ,उतना शहर की सड़कों और गलियों पर स्वच्छता के संबंध में काम करते दिखाई नहीं देते हैं। उस पर बानगी देखिए कि कचरा साफ करने के बाद ढेर एक जगह इकट्ठा कर दिया जाता है और कई बार दो-दो दिन तक उसको उठाया नहीं जाता। नालिया साफ करके उसका मलबा नालियों के किनारों पर डाल दिया जाता है जिसे उठाने की जहमत नगर निगम उदयपुर के कर्मचारी कई बार तीन तीन चार चार दिन तक नहीं करते हैं।
साथ ही आप उदयपुर शहर में मुख्य सड़कों के किनारे पड़े कंटेनर और उसके बाहर बिखरे कचरे को दिन में कभी भी देख सकते हैं। कंटेनरों के पास खड़े आवारा मवेशी कंटेनरो से कचरा निकाल कर सड़क पर फैला देते हैं। रेलवे स्टेशन और बस स्टेशन के साथ में पर्यटन स्थलों पर कचरा आप साफ तौर पर देख सकते हैं।
हद तो तब हो गई कि उदयपुर को ओडीएफ प्लस प्लस का दर्जा मिल चुका है लेकिन आज भी उदयपुर शहर में लोगों का सड़कों पर खुले में शौच जाना बदस्तूर जारी है। इसकी बानगी स्वराज नगर मछला मगरा से नीचे स्थित सड़क पर आप देख सकते हैं कि कई लोग सुबह-सुबह वहां निवृत्त होकर चले जाते हैं और मल एवं कचरा वहां वैसे ही पड़ा रहता है।
इसके साथ में झीलों से जो जलकुंभी और अन्य कचरा निकाला जाता है ,वह झील किनारे ऐसे ही पटक दिया जाता है। कई बार इस कचरे को आठ आठ दिन तक नहीं उठाया जाता है। ऐसी एक शिकायत अंबापोल के आसपास लोगों ने की है, जहां पर जलकुंभी कई दिनों तक पड़ी रहती है और उसे उठाने की निगम सुध नहीं लेता है।
नगर निगम स्वच्छता सर्वेक्षण के प्रति कितना जागरूक है इसका अंदाजा आप स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 के संबंध में लगाए गए फ्लेक्स और बैनरों की संख्या को देखकर लगा सकते हैं कि पूरे उदयपुर शहर में 60 से भी कम फ्लेक्स बैनर इत्यादि लगाए गए हैं। जब नगर निगम उदयपुर ही उदयपुर के लोगों को स्वच्छता के बारे में जागरूक करने के लिए पहल नहीं कर पा रही है तो लोग स्वच्छता के प्रति अपनी जिम्मेदारी कैसे समझेंगे ?