मेवाड़ तैयार करता है देश भर के लिए हर्बल गुलाल, होली पर इस बार रिकॉर्ड उत्पादन !
मेवाड़ के जंगलों में तैयार हर्बल गुलाल देश भर में सुगंध फैलाती है। इसे बहुत कम लोग जानते हैं, लेकिन यह सच है। मेवाड़ की वन सुरक्षा एवं प्रबंध समितियां तथा महिला स्वयं सहायता समूह जो हर्बल गुलाल बनाती है, उसकी मांग दिल्ली, मुम्बई जैसे मेट्रोसिटीज में ही नहीं, बल्कि देश भर में है। यह हर्बल गुलाल शरीर को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाती। इस बार विभिन्न समूहों ने दस टन से अधिक हर्बल गुलाल तैयार की जो पिछले सालों से लगभग दो गुनी से अधिक है। उदयपुर में भी वन विभाग हर्बल गुलाल जनता को बिक्री के लिए उपलब्ध कराता है।
उदयपुर जिले में चौकडिय़ा तथा अन्य वन सुरक्षा एवं प्रबंध समिति तथा स्वयं सहायता समूहों ने पहली बार छह टन से अधिक हर्बल गुलाल तैयार की है। इसके अलावा मेवाड़ में एक दर्जन से अधिक वन सुरक्षा एवं प्रबंध समितियां हर्बल गुलाब हर साल बनाती हैं। जहां इस साल व्यापक रूप से हर्बल गुलाल बनाई गई, उनमें झिंडोली, बांसी, भींडर के सेमलिया, कानोड़, कोडिय़ात, जोरमा, सायरा, गोगुंदा, सूरजगढ़, ग्वालियाबेरी, डांग, मेरपुर, देवला, कूकावास, मावली के मानसिंह जी की बावड़ी शामिल है। वन सुरक्षा एवं प्रबंध समिति से जुड़े रमेश रेगर बताते हैं कि उदयपुर के हर्बल गुलाल की मांग महाराष्ट्र के मुंबई, पुणे के अलावा दिल्ली सहित विभिन्न मेट्रो सिटी में बनी रहती है। इस बार विभिन्न समूहों ने दो टन से अधिक हर्बल गुलाल विभिन्न प्रांतों में भेजी हैं।
कई सितारा होटल, कारपोरेट ऑफिसेज भी मेवाड़ में तैयार हर्बल गुलाल ही मंगवाते हैं। यही नहीं, विदेशों में भी उदयपुर के हर्बल गुलाल की मांग बढ़ी है। आस्ट्रेलिया सहित करीब एक दर्जन से अधिक देशों के दूतावासों को उदयपुर जिले में तैयार हर्बल गुलाल भेजी गई।
बताया गया कि विभिन्न सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं जंगल से फूल चुनकर लाती हैं। उनका रस निकालकर उसे आरारोट में मिलाकर उसे धूप में सुखाया जाता है। जिसके सूखने के बाद इसे मशीन से महीन कर सौ तथा दो सौ ग्राम की पेकिंग की जाती है। इस समूची प्रक्रिया में किसी तरह का केमिकल या केमिकलयुक्त रंगों या सोपस्टोन का उपयोग नहीं किया जाता। हर्बल गुलाल के लिए गुलाब, गैंदा, पलाश, नारंगी तथा जाखरड़ा के फूलों को उपयोग लिया जाता है। गुलाब से गुलाबी, पेड़ों की पत्तियों से हरी, गैंदे के फूल से पीली, पलास से नारंगी तथा जाखरड़ा से बैंगनी रंग का गुलाल तैयार होता है। उदयपुर में वन विभाग पचास और सौ रुपए की दो पेकिंग में हर्बल गुलाल बेच रहा है। हर्बल गुलाल विक्रेता पुष्कर डांगी का कहना है कि कोरोना वायरस इफेक्ट के चलते कारपोरेट तथा विभिन्न संस्थाओं और संगठनों ने होली कार्यक्रम स्थगित कर दिए हैं लेकिन इसका मेवाड़ में बनी हर्बल गुलाल पूर्व में मिले आर्डरों के चलते पहले ही बिक चुकी है।