सरकार से भी आगे मेक माई ट्रिप जैसी ऑनलाइन ट्रेवल एजेंसिया !
जहाँ एक और सम्पूर्ण विश्व कोरोना महामारी के चंगुल से बाहर निकलने का प्रयास कर रहा है, वहीँ देश की कई ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसियां "गंजो को ऐसी कंगी बेच रही है जिससे बाल आना संभव नहीं है।"
कोरोना WHO द्वारा घोषित ऐसी वैश्विकमहामारी है जिसने सारे देशों के पहिये रोक दिए है, सायकिल से लेकर हवाई जहाज तक सब बंद है, ऐसा इतिहास में पहली बार हुआ है।
कोरोना दानव के फैलते हुए पंजे को काटने के लिये संक्रमण ग्रस्त देशों के लिए लॉक डाउन एकमात्र प्रमुख हथियार है, ऐसा लॉक डाउन जो कई देशों में अनिश्चित कालीन समय के लिये बढ़ाया जा सकता है, कोरोना जिसके आगे इटली जैसे देश समर्पण कर चुके है और ब्रिटेन, ईरान, और अमेरिका जैसे सुपर पावर देश नतमस्तक होकर अवधि बढ़ा रहे है। लॉक डाउन जिसकी अवधि निर्धारित करना किसी भी देश के लिये वर्तमान समय मे अत्यंत मुश्किल है।
हमारे देश भारत मे मोदी जी की बुद्धिमता से समय पर लिये गए लॉक डाउन के निर्णय की वजह से कोरोना अन्य यूरोपीय देशों की तुलना में नियंत्रण में है, फिर भी लॉक डाउन की अवधि और किस राज्य के किस शहर में लॉक डाउन कैसे खोला जाएगा ?, खोला जाना उचित है या नहीं ? अवधि बढ़ाना हो तो कब तक ? यह सब तय करने के लिये देश के शीर्ष नेतृत्व और राज्य सरकारों के साथ ही कई क्षेत्रों के सैकड़ों विशेषज्ञों द्वारा रात दिन कई कई घंटों की बैठक़ कर रहे है। गंभीर चिंतन, आकलन और पूर्वानुमानों के साथ देश की 130 करोड़ जनता की स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के बारे में सोचा जा रहा है, क्योंकि कोरोना कोई सर्दी जुकाम नहीं है जिसे नजरअंदाज किया जा सकें।इसकी गंभीरता को इटली और अमेरिका की स्थिति देखकर समझा जा सकता है, जहाँ हर रोज सैकड़ो लाशें निकल रही है। जहाँ संक्रमित लोंगो का आंकड़ा लाखों में है।
चूंकि हमारे देश मे मोदी जी जैसे राष्ट्राध्यक्ष है इसलिए देश की 95 % जनता अक्षरशः उनके निर्देशों का पालन कर रही है।
अब इस विकट लेकिन नियंत्रित स्थिति में भी ऑनलाइन ट्रेवल एजेंसियां अपनी स्वार्थ सिद्धि से बाज नही आ रही है। उन्हें या तो यह समझ नही आ रहा कि यह समय पर्यटन का नही या फिर ये इतने बडे ज्ञानी है कि इन्होंने लॉक डाउन की अवधि भी निश्चित कर ली है।
अब इस विकट लेकिन नियंत्रित स्थिति में भी ऑनलाइन ट्रेवल एजेंसियां अपनी स्वार्थ सिद्धि से बाज नही आ रही है। उन्हें या तो यह समझ नही आ रहा कि यह समय पर्यटन का नही या फिर ये इतने बडे ज्ञानी है कि लॉक डाउन की अवधि भी निश्चित कर ली।
यह समय लॉक डाउन का पालन कर घर मे बंद रहने का है।वर्तमान स्थिति यह है कि हर जिले में होटलों को भी क्वारनटाइन सेंटरों में बदल जा सकता है ,लेकिन इन कंपनियों को केवल बुकिंग से होने वाला मुनाफा नज़र आ रहा है।दुःखद के साथ हास्यास्पद बात यह है कि इन कंपनियों के साथ संबंध रखने वाली होटलों में ऑनलाइन साइट पर 15 अप्रैल से बुकिंग भी चालू कर दी गई है।मेक माय ट्रिप से संबंधित होटलों में बुकिंग कैंसल करने पर कैंसलशन चार्जेज नही लिया जा रहा है। लेकिन कई होटलों औऱ रिसॉर्ट्स में लिया जाने वाला पैसा नॉन रिफंडेबल है यानी कि वापस नही लौटाया जाता।मेक माय ट्रिप में जो विकल्प बताए गए है, उनमें दर्शायी गई अधिकतर होटलों में कैंसलशन चार्जेज के बारे में कोई स्पस्टीकरण नही है। मतलब साफ है कि होटल वालो के साथ ही ऐसी ऑनलाइन ट्रेवल कंपनिया लालच में ऐसा काम कर रही है जिसे धोखाधड़ी कहना ही उचित होगा।
जयवन्त भैरविया की कलम से !