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Current News / वीडियो:स्वरुपसागर में लीकेज से बह रहा लाखों लीटर रोज पानी,1847 में पहले भी फूट चूका स्वरूपसागर !

clean-udaipur वीडियो:स्वरुपसागर में लीकेज से बह रहा लाखों लीटर रोज पानी,1847 में पहले भी फूट चूका स्वरूपसागर !
News Agency India August 02, 2019 02:41 PM IST

वीडियो:स्वरुपसागर में लीकेज से बह रहा लाखों लीटर रोज पानी,1847 में पहले भी फूट चूका स्वरूपसागर !

उदयपुर शहर की लाइफ लाइन है झीलें। झीलें जो कि उदयपुर वासियों को पीने का पानी उपलब्ध करवाती है बल्कि पर्यटन का आधार बन लोगों का पेट पालने में मदद भी करती है। समूचा पीछोला बांध/झील मिट्टी की फ़ीलिंग और मज़बूत दीवारों के बीच सैकड़ो लीटर MFCT पानी को आज तक रोक कर रखे है जो मेवाड़ी निर्माण कला की उत्कृष्ट्ता का अनुपम नमूना है।

इतिहास स्वरूपसागर का

रंग सागर के उत्तर में स्वरुप सागर है जिसके पानी में कलालों का शिव मंदिर होने के कारण इसे कलाल्या शिव सागर भी कहते है। महाराणा स्वरुप सिंह के समय इसका पूर्वी बाँध टूट गया,उसको 1847 में दुबारा बनवा कर इस हिस्से का नाम स्वरुप सागर रखा गया। महाराणा सज्जन सिंह जी ने पीछोला के बीच के सारे बाँधो को एक साथ मिलाकर एक पीछोला का रूप दे दिया।

दूध तलाई,अमरकुण्ड ,रंगसागर ,स्वरुप सागर पीछोला झील के विस्तार का ही हिस्सा है। पहले पीछोला की सीमा केवल सिताब पोल तक ही थी और इसके आगे अमर चाँद बड़वा द्वारा बनाया गया अमर कुंड था और इसके चारो ओर पक्के घाट और फव्वारे लगे हुए हुए थे जिसे बाद में दक्षिण उत्तर दिशा के घाट को तोड़ कर महाराणा सज्जन सिंह ने इसे पीछोला में शामिल करवा लिया।

कहाँ और कितना हो रहा लीकेज :

सबसे बड़ा लीकेज हाथीपोल के पास मीट मार्केट से लगती स्वरूपसागर की पाल के ठीक नीचे है। (देखे वीडियो) लीकेज इतना बड़ा है कि लगभग 10 लीटर पानी प्रति सैकंड व्यर्थ बह कर नालियों में बहा जा रहा है। हाल ही नगर निगम के अधिकारियों ने दौरा कर मौके को देखा और पानी का इस्तेमाल दिल्ली गेट फ़व्वारे की निरर्थक योजना की बात कही। भला बारह महीने थोड़े ही बहता है ये पानी जिससे ये फव्वारे चलाएंगे। मजे की बात ये है कि किसी अधिकारी ने लीकेज रोकने अथवा बंद करने की बात नहीं कही।

साथ ही ऊपर पाल की तरफ अख़ाडे के पास से भी लगभग इतना ही पानी नालियों में बह रहा है। कोई जिम्मेदार यह नहीं सोच रहा कि अगर ये लीकेज रोक दिए जाए तो उदयपुर शहर को 15 दिन से ज्यादा का पानी अतिरिक्त मिल जाये और झीलें भी ज्यादा दिन तक भरी रह कर खूबसूरत रह सके। लेकिन झील से जुड़े स्थानीय निकायों (नगर निगम उदयपुर,पुलिस विभाग, प्रादेशिक परिवहन विभाग,प्रदुषण निंयत्रण विभाग,नेशनल लेक कंज़र्वेशन प्रोजेक्ट और नगर विकास प्रन्यास) और अन्य झील संरक्षण से जुड़े संगठन अब तक चुप ही बैठे है। पानी बह जाये तो बह जाये,इन्हे क्या ?

नोट : उपरोक्त तथ्य लोगों की जानकारी के लिए है और काल खण्ड ,तथ्य और समय की जानकारी देते यद्धपि सावधानी बरती गयी है , फिर भी किसी वाद -विवाद के लिए अधिकृत जानकारी को महत्ता दी जाए। न्यूज़एजेंसीइंडिया.कॉम किसी भी तथ्य और प्रासंगिकता के लिए उत्तरदायी नहीं है।


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