उदयपुर के गोवर्धन सागर की पाल में रिसाव,हो सकता है कभी भी बड़ा हादसा !
झीलों की नगरी उदयपुर लबालब भरी झीलों से गुलज़ार होती नज़र आ रही है। जहाँ पीछोला और गोवर्धन सागर लबालब हो चुके है ,वहीं फतहसागर में पीछोला से पानी की आवक जारी है और सीसारमा का जलस्तर अभी भी तीन फ़ीट के आसपास चल रहा है। लोगों को उम्मीद है कि अगले दौर की वर्षा में फतहसागर भी छलक उठे।
लेकिन जैसे ही झीलें पूरी भरने जा रही है वैसे ही सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासनिक लापरवाही देखने को आ रही है। गोवर्धन सागर पर शिकारबाड़ी वाले रास्ते की तरफ घाट से लगते मंदिर के पास की पाल में कई जगह तड़क पड़ गयी है और लगभग 8 जगहों से छोटे छोटे छिद्रों से पानी का रिसाव जारी है। आपको बताते चले कि पाल के ये छोटे रिसाव और छिद्र कभी भी किसी भी भूगर्भिक हलचल के दौरान बड़े होकर गोवर्धन सागर की पाल को खत्म कर सकते है। इसी वर्ष गोवर्धन सागर में नाव संचालन भी शुरू किया है जिसके चलने से हिलने वाली पानी की हिल्लोरे भी पुरानी पाल को नुकसान पंहुचा रही है।
साथ ही पूरे गोवर्धन सागर में गन्दगी का आलम आप न्यूज़ पोस्ट किये गए फोटो से लगा सकते है।गोवर्धनविलास झील पर नियमित तौर पर घूमने आने वाले लोगो में से पंकज पारीख यहाँ की सफाई व्यवस्था से खासे नाराज नज़र आये वहीं रघुराज सिंह,देशबंधु शर्मा,मुकेश मोड़ और डॉ पी सी मुर्डिया ने बताया कि वर्षों से वे यहाँ नियमित आ रहे है पर कभी किसी अधिकारी ने पाल के रख रखाव की तरफ ध्यान नहीं दिया।गोवर्धनविलास झील की सफाई के जिम्मेदार ठेकेदार के कर्मचारी सफाई करने के बाद जलीय गन्दगी को घाट के आसपास फेंक दे रहे है और दिन भर में यही गन्दगी पुनः उड़कर झील में गिर रही है। वैसे भी इस झील में सफाई के लिए ठेकेदार के कर्मचारी वार त्यौहार ही नज़र आते है। नगर निगम उदयपुर न तो गोवर्धन सागर पार्क का ढंग से रखरखाव कर पा रहा है और न ही झील की ढंग से सफाई।
आपको बताते चले कि स्थानीय निवासियों ने पूर्व में भी पाल के रिसाव की जानकारी सम्बंधित अधिकारियों तक पहुचाँयी थी और अधिकारियों ने निरिक्षण भी किया था लेकिन पाल को ठीक करने के कोई प्रयास नहीं किये गए। प्रशाशन की नींद तभी टूटती है जब आमजन को अपने जीवन से हाथ धोना पड़ता है क्योंकि समय और जागरूकता दोनों का अभाव स्थानीय प्रशाशन का शौक है।