उदयपुर की झीलें होटलों के कब्ज़े में, प्रशाषन के पीछोला झील से जुड़े दस्तावेज़ गायब !
उदयपुर की झीलों की रूमानी खूबसूरती बयान करने के लिए अगर आपके पास शब्द है तो निश्चय ही आप शब्दों के बाज़ीगर रहा करते होंगे| सुबह के सूरज की लाल रौशनी में नहायी पीछोला झील किसी भी आदमी को अपनी ओर आकर्षित करने का माद्दा रखती है तो वही शाम को पीछोला की खूबसूरती ऐसी कि आपकी आँखे ठहर जाए ! पर इस खूबसूरती के दीदार के लिए आम पब्लिक को पीछोला झील किनारे या तो दूधतलाई आकर निहारना होता है या गणगौर घाट जाकर और हां आप गणगौर घाट के सामने अमराई रेस्टॉरेंट के किनारे पर जाकर भी इसकी खूबसूरती को आँखों में संजो सकते है|
उदयपुर की खूबसूरती यहाँ की झीलें भरने की ओर अग्रसर है और हर उदयपुर वासी इस बात से प्रफुल्लित है कि जाती बरसात झीलों का दामन पानी से भर गयी। निहायत ही खूबसूरत झीलें देखने स्थानीय नागरिकों सहित पर्यटक झीलों का दीदार करने पहुँच रहे है। ऐसा कोई उदयपुर वाला शायद ही हो जिसे झीलों को निहारना पसंद न हो।
लेकिन बेहद खूबसूरत झीलों पर यहाँ के होटल वालों का कब्ज़ा है। जी हाँ ! उदयपुर की झीलों में होटल वाले कई ऐसे अवैध काम कर रहे है जिनकी उन्हें इजाजत नहीं है और जो झीलों की सेहत पर असर भी डाल रहा है। सबसे पहले उदयपुर की कई होटल जैसे ताज लेक पैलेस,ट्राइडेन्ट ,लीला पैलेस,उदयकोठी और उदयविलास जैसी सितारा होटले है जिनकी झील में नाव में बैठने के लिए जेटियां है, उनमे से कई होटल वालों से निर्धारित मापदंड से कई गुणा बड़ी जेटिया बना कर झील में उतार रखी है। कई होटल वालो ने तो निर्धारित संख्या से ज्यादा जेटिया लगा रखी है। न्यूज़ के साथ दिए गए फोटो से आप बेहतर अंदाज़ा लगा सकेंगे कि किस तरह इन होटल वालों की जेटियाँ झील में बिखरी पड़ी है। स्थानीय लोगों के अनुसार कई होटल वाले इन जेटियों पर देर रात्रि में लोगों को डिनर करवा कर भी रूपये कूटने में लगे है।
इसके साथ ही आप झील में खाली पड़े पोन्टून (छोटा प्लेटफॉर्म) भी देख सकते है जिन पर बैठा कर कभी-कभी पर्यटकों को डिनर करवाया जाता है।इस डिनर की बुकिंग के लिए आपको गूगल की मदद लेनी होगी अथवा किसी स्थानीय गाइड की मदद से भी पोन्टून डिनर किया जा सकता है।
यदि नगर निगम जो की पीछोला झील पर मालिकाना हक़ भी रखती है,उससे परमिशन लेने के बाद भी आप इनकी होटल की तरफ अपनी नाव लेकर जरा भी पास गए तो इन होटल वालों के सुरक्षा गॉर्ड सहित अन्य कई कर्मचारी मिल कर आपको धमकी दे देंगे और उनकी होटल से दूर जाने को कहेंगे। साथ ही ये कहने से भी गुरेज़ नहीं खाते कि नाव को होटल के पास लाने की किसी को परमिशन नहीं है|
आपको बताते चले कि न्यूज़एजेंसीइंडियाडॉटकॉम की टीम के साथ भी होटल लेक पैलेस के गार्ड और अधिकारी ने कुछ ऐसा किया और धमकी दी कि उनके गार्ड सशस्त्र है। बाद में कहाँ गया कि होटल की सुरक्षा के कारण वे किसी भी नाव को पास आने नहीं देते गोया कि सड़क पर होने वाली सारी होटल्स असुरक्षित है और सिर्फ ताज लेक पैलेस ही सुरक्षित है।
अब बात करते है झील में चलती नावों की। नगर निगम उदयपुर द्वारा निर्धारित नाव कंपनी की सारी नावों पर दोनों साइड RTO के नंबर लिखे पाए गए वो भी निर्धारित पीली पट्टी पर और साथ ही नाव सवारों को लाइफ जैकेट में देखा गया। जबकि अन्य होटल वालों की नावों में सवारों को बिना लाइफ जैकेट आसानी से देखा जा सकता है और विशेष बात ये कि इनके नाव चालक भी लाइफ जैकेट नहीं पहनते है क्योकि इससे इन होटल वालो की दी गयी वर्दी रूपी शेरवानी दिखती नहीं है। झील में कई नावों को बिना RTO के नंबर लिखे तैरते देख सकते है जिन्हे होटल वाले संचालित कर रहे है।
कई होटल वाले ऐसी अवैध तौर पर दो नावों पर एक छोटा सा महलनूमा रेस्टोरेंट बनाकर संचालित कर रहे है और इन नावों पर भी रजिस्ट्रेशन नंबर मानकों पर नहीं लिखे गए है (पूरी की पूरी नाव रूपी महलनूमा रेस्टोरेंट ही अवैध है) | पहले तो दो नाव की बॉडी पर दो पावर इंजिन्स उपयोग करने के अलग नियम कायदे है और ऐसी नावों पर रेस्टॉरेंट संचालन की अनुमति भी नहीं होती है लेकिन इनकी नाव में पर्यटकों को सब कुछ मिलता है |
सबसे रोचक बात ये है कि इन अवैध नावों और जेटियों पर आज तक किसी विभाग ने कार्यवाही नहीं की है। न तो नगर निगम की गैराज शाखा ,निर्माण शाखा और न ही RTO ने कभी इन अवैध नावों पर कोई कार्यवाही करने की सोची। क्या कारण रहे कि ऐसी अनियमितता सालों से बदस्तूर जारी है और न किसी विभाग का ध्यान गया और न किसी अधिकारी का।
एक ओर रोचक बात ये है कि झील में उपस्थित जेटियों की फाइल तक नगर निगम अधिकारियों के पास नहीं है और इसका सीधा मतलब ये है कि इन जेटियों का किराया भी प्रशाषण को नहीं मिल रहा हो। दो साल पहले सिंचाई विभाग ने पीछोला झील का हस्तांतरण नगर निगम को कर दिया था लेकिन जब नगर निगम अधिकारियों जैसे मनीष अरोड़ा,मुकेश पुजारी ,शशिबाला सिंह और सत्यनारायण जी से फाइलों के बारे में पुछा गया तो उन्होंने इस बारे में अनभिज्ञता जता दी। मतलब साफ़ है कि सरकार को इन जेटियों का पैसा भी मिल नहीं पा रहा है।
एक पूरा नेक्सस झीलों के दौहन में लगा है और लाखों रूपये रोज कूट रहा है। झील संरक्षण समिति के पदाधिकारी कार्यवाही करने से बच रहे है और झीलें आम इंसान की पहुंच से दूर होती जा रही है।
एक और बात गौर करने योग्य ये है कि इन होटल्स की जेट्टियो का किराया इतना कम है कि किसी भी एक छोटी नाव के एक दिन के संचालन खर्च से इनका साल भर का किराया वसूल हो जाता है और साल भर इनकी वैध -अवैध नावें करोड़ो रूपये की चांदी कूटने में लगी रहती है | उदयपुर नगर निगम के साथ स्थानीय नगरीय निकाय विभाग को इनके पुनः किराये निर्धारण की अत्यन्त आवश्यकता है जिससे उदयपुर नगर निगम और राजस्थान सरकार को करोडो की अतिरिक्त आय मिल सके| साथ ही ऐसे निगरानी तंत्र के गठन की भी आवश्यकता है जो सिर्फ झीलों के इश्यूज के बारे में कार्यवाही कर सके,सतत निगरानी रख सके | फ़िलहाल झील सरंक्षण समिति सहित नेशनल लेक डेवलपमेंट प्रोजेक्ट सरीखे काम पीछोला को मायूस ही कर रहे है | आम उदयपुरवासी सहित गरीब पर्यटक किनारे बैठ झील को निहार रहे है और होटल्स वाले झील के अंदर अपनी दुकाने चलाकर आम लोगो के साथ सरकार को ठेंगा दिखा रहे है|
साथ ही नगर निगम से आशा की जाती है कि वो नावों के किराये में उदयपुर वासियो के लिए फ्लेक्सी फेयर जैसी व्यवस्था लागु कर ऑफ सीजन में जनता को कम किराये में झील में घूमने का अवसर प्रदान करने की व्यवस्था करे | आखिर उदयपुर की झीलों की खूबसूरती पर आप सबका हक़ है |