जयपुर,8 जनवरी। 78वें सेना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों के अन्तर्गत भवानी निकेतन शिक्षा समिति परिसर में चार दिवसीय ‘नो योर आर्मी’ प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। प्रदर्शनी में सेना के आधुनिक उपकरणों और हथियारों को प्रदर्शित किया गया है। इस प्रदर्शनी में भारतीय सेना के शौर्य की अनेक गाथाओं को प्रदर्शित किया गया है। ऐसा ही एक किस्सा है, दुश्मन के YIHA-III ड्रोन का जिसे हमारी सेना ने निष्क्रीय कर दिया था।
आज जब हम सुरक्षित अपने घरों में रहते हैं, तब हमारी सीमाओं पर वीर जवान तिरंगे की रक्षा कर रहे होते हैं।
शौर्य और बलिदान की अमर गाथाएं—
भारतीय सेना का इतिहास वीरता, पराक्रम और बलिदान से भरा हुआ है। 1947 से लेकर आज तक, हर युद्ध और हर ऑपरेशन में सैनिकों ने अद्भुत साहस का परिचय दिया है।
आधुनिक तकनीक और अनुशासन का संगम—
आज भारतीय सेना आधुनिक हथियारों, अत्याधुनिक तकनीक और विश्वस्तरीय प्रशिक्षण से लैस है। लेकिन इन सब से ऊपर है उसका अनुशासन, समर्पण और देश के प्रति अटूट निष्ठा।
भारतीय सेना ने मार गिराया YIHA-III ड्रोन—
ऑपरेशन “सिंदूर” के दौरान दुश्मन द्वारा चलाए गए ऑपरेशन “बुनयान उल मरसूस” में YIHA-III ड्रोन का व्यापक उपयोग किया गया। 10 मई, 2025 की सुबह यह ड्रोन मुख्यालय 80 इन्फैंट्री ब्रिगेड के ऊपर देखा गया, जिसे हमारी टुकड़ियों ने सफलतापूर्वक मार गिराया। ड्रोन का मलबा बरामद किया गया, जिसमें 10 किलोग्राम का वारहेड सुरक्षित अवस्था में मिला। फॉरेंसिक जांच में यह सामने आया कि ड्रोन ने पाकिस्तान के सियालकोट क्षेत्र से उड़ान भरी थी और इसमें लक्ष्य के रूप में मुख्यालय 80 इन्फैंट्री ब्रिगेड, नौशेरा के निर्देशांक पहले से फीड किए गए थे।
गौरतलब है कि YIHA-III तुर्की और पाकिस्तान द्वारा संयुक्त रूप से विकसित एक हाई-प्रिसीजन कामिकाज़े ड्रोन है, जिसे Baykar और NASTP ने तैयार किया है। इसमें UMTAS एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) वारहेड लगाया गया है, जो एक ट्यूबलर बॉडी में फिट है। यह ड्रोन फिक्स्ड ट्राइसाइकिल लैंडिंग गियर से लैस है, जिससे इसे रनवे के साथ-साथ कैटापुल्ट सिस्टम से भी लॉन्च किया जा सकता है। लॉन्च के बाद यह हवा में लंबे समय तक मंडरा सकता है, लक्ष्य की पहचान करता है और फिर ऊपर से सीधी वर्टिकल डाइव करते हुए हमला करता है। इसकी मारक क्षमता लगभग 200 किलोमीटर तक है और इसे स्वॉर्म मोड में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। बावजूद इसके, भारतीय सेना ने इस ड्रोन को आसानी से मार गिराया था।