खाद्य सुरक्षा वाले नहीं, छुटकर व्यापारी भी हैं संकट में, जार के पत्रकारों ने पहुंचाई मदद !
उदयपुर, 2 अप्रैल। जो परिवार गरीब हैं और खाद्य सुरक्षा योजना के तहत दर्ज हैं, उन तक तो सरकार ने ही दो महीने का गेहूं पहुंचा दिया है और अन्य जरूरतों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इससे बड़ी समस्या उन परिवारों के सामने आ रही है जो छुटकर व्यापार करते हैं और दिहाड़ी श्रमिक से कुछ ऊपर के वर्ग में माने जा सकते हैं। ऐसे परिवार मदद मांगने में भी लोकलाज के चलते हिचक रहे हैं। इनमें उनकी हालत परेशानी वाली है जो अपने घर से दूर अन्य शहर में हैं। उनकी बचत खत्म हो चुकी है और चाहकर भी अपने पुश्तैनी निवास पर अपनों के पास पहुंच नहीं पा रहे।
जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ राजस्थान (जार) के जिलाध्यक्ष नानालाल आचार्य ने बताया कि ऐसे ही एक परिवार की जानकारी जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ राजस्थान (जार) से जुड़े पत्रकारों को हुई। उन्होंने उस परिवार की पूरी व्यथा जानी तो पता चला कि एक महीने पहले तीन बच्चों की फीस में एक लाख खत्म हो गए, फिर भाई का इलाज निजी अस्पताल में करवाया तो उसमें भी बचत खत्म हो गई। जो कुछ बचा था, वह इतने दिन के लॉकडाउन में चुकता गया। वे बार-बार अपने गांव जाने की भी कोशिश करते रहे, लेकिन मदद नहीं मिली। इसी जद्दोजहद में वे कलक्ट्रेट में रिपोर्टिंग के लिए खड़े जार के सदस्य गोपाल लोहार, भरत मिश्रा से मिले।
उनकी पीड़ा सुनते ही उन्होंने जार के सभी सदस्यों से सम्पर्क किया और जार के दिनेश भट्ट सहित अन्य सदस्यों की सहायता से गुरुवार को सेक्टर-14 में रहने वाले इस परिवार तक मदद पहुंच गई।
जिलाध्यक्ष आचार्य ने इस तरह के परिवारों की मदद में निरंतर आगे आते रहने का आह्वान करते हुए जार सदस्यों से आग्रह किया है कि जो परिवार लोकलाज के भय से पीड़ा बताने से हिचक रहे हैं, पता चलने के बाद मदद जरूर करें, बस उनका नाम या पहचान उजागर न करें। व्यक्ति के आत्मसम्मान का पूरा ख्याल रखें।
सभी को रामनवमी की शुभकामनाओं के साथ
नानजी आचार्य