क्या वायरस फैलाना और हिंसा करना है अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता ?
विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में एक आम भारतीयों को कई अधिकार दिए है, अधिकारों के साथ ही भारतीयों के कई कर्तव्य और उत्तरदायित्व भी है जिनका पालन करना सभी के लिये अत्यंत जरूरी है। जहाँ एक ओर ए पी जे अब्दुल कलाम समर्थक लोग है जिन्हें धर्म के आगे देश दिखायी देता है ,वही देश मे कुछ ऐसे जिन्ना समर्थक लोग भी है जिनके लिये देश का कोई नियम कानून मायने नही रखता, ये लोग देश में मिली आजादी का दुरुपयोग कर हिँसा, तोड़फोड़, पत्थर बाजी, आगजनी, गालीगलौज करते है। यहाँ तक कि ये लोग इनकी तीमारदारी और जाँच करने वाले मेडिकल टीम के लोगों पर हमला करने से भी बाज नहीं आते है।
हद तो तब हो जाती है जब ये लोग पुलिस पर भी हमला करने लग जाते है। देश की संसद द्वारा बनाये गए किसी भी कानून का विरोध करने के लिये ये सड़को पर महीनों जाम लगा देते है, न सुनना चाहते है और न समझना, अनपढ़ को समझाना इन लोगों को समझाने से ज्यादा आसान है। वर्तमान में कोरोना जैसी वैश्विक महामारी में भी ये जिन्ना समर्थक कोई सहयोग नही कर रहे, कुछ जाहिल लोग तो सोशल मीडिया पर कोरोना का स्वागत करते हुए देश विरोधी जहर उगल रहे है।
प्रधानमंत्री मोदी जी के अथक प्रयासों के कारण हम कोरोना से जंग लगभग जीत ही चुके थे लेकिन दिल्ली के निज़ामुद्दीन एरिया से तबलीगी जमात से निकले जिहादियों ने मानव बम की तरह भारत के सभी राज्यों में फैल कर इस वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि कर दी। इन जिहादियों ने मानवता को शर्मसार करते हुए पुलिस पर हमले किये, इलाज के लिये आये मेडिकल स्टॉफ के साथ बत्तमीजी की, अश्लीलता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। इन संक्रमित लोगो ने सभी पर थूक थूक कर वायरस फैलाने की कोशिश भी की।
इलाज में लगे डॉक्टर इन जिन्ना समर्थकों का शारीरिक संक्रमण तो दूर कर सकते है पर जिन लोगों के मस्तिष्क संक्रमित है उस संक्रमण का इलाज डॉक्टरों के पास नहीं भारत में राजा महाराजाओं के समय से से लेकर अब तक देशभक्त मुसलमानों का भी बहुत बड़ा इतिहास रहा है, जैसे मेवाड़ के मात्रभूमि भक्त हकीम खाँ सूरी ने महाराणा प्रताप के साथ मुगलों से लोहा लिया। स्वतंत्रता संग्राम में रामप्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाक़ उल्ला खान जैसे स्वन्त्रता सैनानियों ने अपने प्राणों की आहुति दी। देश के महान वैज्ञानिक मिसाइल मैन ए पी जे अब्दुल कलाम ने देश का नाम पूरे विश्व मे रोशन किया। देश के लिये उन्होंने कई महान कार्य किये और देश के प्रथम नागरिक महामहिम राष्ट्रपति भी बने, देशभक्त मुसलमानों की सूची में और भी कई नाम है, जिन पर पूरा देश गौरवान्वित है, पढ़े लिखे मुस्लिम राष्ट्र हित के काम कर रहे है, भारतीय जनता पार्टी के नेता मुख्तार अब्बास नकवी, शाह नवाज हुसैन हिंदू मुस्लिम के मध्य कुछ कट्टरपंथियों द्वारा पैदा किये गए गतिरोध को दूर करने का प्रयास कर रहे है।
स्थिति यह है कि देश मे मुस्लिम समुदाय में दो तरह के लोग है जिनमें लगभग 70 प्रतिशत लोग समझदार है और बाकी के 30 प्रतिशत जिन्ना की मानसिकता वाले है, जो बाकी के लोगों को भी गुमराह करने का प्रयास कर रहे है। देश ने जो आजादी दी है उसका दुरुपयोग कर रहे है, इसलिए ऐसे लोगों पर अंकुश लगाना अत्यंत आवश्यक हो गया है इलाज में लगे डॉक्टर इन जिन्ना समर्थकों का शारीरिक संक्रमण तो दूर कर सकते है पर जिन लोगों के मस्तिष्क संक्रमित है उस संक्रमण का इलाज डॉक्टरों के पास नहीं, इन लोगों को महान ए पी जे अब्दुल कलाम जैसा देशभक्त नही बनाया जा सकता।
जयवन्त भैरविया की कलम से।