झील किनारे अवैध निर्माण पर सरकार खामोश और जनता में रोष !
उदयपुर में अगर आपकी जेब में पैसे है तो आप झील किनारे भी आलीशान घर बनवा सकते है। झील के सामने ऊंचाई पर आने वाले निर्माण निषिद्ध क्षेत्रों जैसे अम्बावगढ़ आदि इलाकों में अपनी होटल अथवा घर बना सकते है। आप चाहे तों उदयपुर का वेनिस कहलाने वाली आयड़ नदी के किनारे फार्म हाउस तक बनवा सकते है बस आपकी जेब में दम और सेटिंग करने का हुनर आपमें होना चाहिए।
अगर आपकी जेब में पैसा है तो आप झील संरक्षण के लिए बने नियंत्रित निर्माण क्षेत्र ,भवन उपविधि 2013 के नियमो की धज्जियाँ उड़ा सकते है। आप लोगों को गुमराह कर सकते है कि आपका निर्माण 'नियंत्रित निर्माण क्षेत्र ,भवन उपविधि 2013 के नियमो' के नियमों के तहत नहीं आता है अथवा आंशिक आता है। ऐसा ही एक वाक़या अभी सोशल मीडिया पर जोरदार तरीके से उठाया जा गया है जिसमे फतहसागर झील किनारे एस पी बंगले के पास होता विशालकाय निर्माण है जो कि शायद होटल निर्माण होता दिख रहा है।
बरहाल नगर निगम के डी टी पी ऑफिसर सिराजुद्दीन के अनुसार अमुक निर्माण जोन 2 निर्माण निषिद्ध क्षेत्र में आता है जिसमे कुल क्षेत्र का 35 प्रतिशत हिस्सा निर्माण हेतु प्रयोग में लिया जा सकता है पर इस प्रकरण में भी दो पेच पकडे गए है।
- पहला कि नगर विकास प्रन्यास की वेब साइट पर उपलब्ध निर्माण क्षेत्रों के मैप के अनुसार अमुक निर्माण जोन 1 में आता है लेकिन अधिकारी इसे जोन 2 का जबरदस्ती बतलाना चाह रहे।
- दूसरा जोन 2 के नियमोँ की भी पूरी तरीके से धज्जियां उड़ाकर 100 क्षेत्र पर निर्माण कर दिया गया है।
दूसरी उदयपुर का वेनिस कहलाने वाली आयड़ नदी के किनारे लोग अवैध रूप से मिटटी डलवाकर फार्म हाउस बनवा रहे है। (देखिये फोटो )ऐसा ही एक प्रकरण आप पुला आयड़ पुलिया के ठीक किनारे होता देख सकते है जहाँ निर्माण निषिद्ध क्षेत्र में रातो रात फार्म हाउस खड़ा कर दिया गया और किसी अधिकारी को ये अवैध निर्माण इसलिए नहीं दिख पाया क्योंकि मामला शहर के एक बड़े पैसे वाले से जुड़ा था।
ऐसे ही दो काम साईफन कॉलोनी मे अवैध रूप से बिना पट्टे और बिना स्वीकृति सैट बैक छोडे सड़क सीमा मे निर्माण कार्य चल रहे है लेकिन सरकारी एजेंसीया आँखे बंद कर ऐसे कृषि भूमि पर अवैध निर्माण कार्य को अंजाम देने मे सहयोग कर रही है। इसकी शिकायत भी यूआईटी मे की जा चुकी है लेकिन क्या कारण है कि इस पर कोई कार्रवाई नही हो रही है ?
द स्टडी स्कूल अमबावगढ़ इलाके में भी आप तीन अवैध निर्माण होते देख सकते है और एक निर्माण में तो पहाड़ तक चीर दिया गया है और जिम्मेदार हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए है।
थोड़े समय पहले उदयपुर भाजपा कार्यालय में ही तीसरी मंज़िल पर अवैध निर्माण के दौरान एक मजदुर की मृत्यु हो गयी लेकिन मज़ाल है कि कोई अफसर वहाँ का निर्माण रोक पाता ?
गरीब का एक छज्जा भी थोड़ा बाहर आ जाए तो तोडने के लिए पुलिस फोर्स को भी लगा दिया जाता है लेकिन तथाकथित रोबदार और मालदार लोगों के भव्य और अनैतिक निर्माण सरकार को दिखायी देना बंद हो जाते है । पैसा नियमों को बदल देता है।