उदयपुर को कोरोना से मुक्ति दिलाने वाले जिला पुलिस अधीक्षक का सन्देश !
उदयपुर में जैसी ही कोरोना पॉजिटिव मरीज के मल्ला तलाई से मिलने की खबर आयी वैसे ही उदयपुर को उदयपुर जैसा शहर बनाने वाले दो अधिकारी कमर कस कर इसे रोकने के लिए जुत गए। इनमे से पहली अधिकारी थी जिला कलेक्टर महोदया और दूसरे जिला पुलिस अधीक्षक (SP) कैलाश विश्नोई। दोनों ने समन्यवय के साथ प्लान बनाकर मल्ला तलाई को कोरोना मुक्त बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जहाँ कलेक्टर महोदया ने तुरंत मल्ला तलाई को सील कर कर्फ्यू लगाने के आदेश दिए वही पुलिस अधीक्षक अपनी टीम के साथ मौके पर पहुँच कर कर्फ्यू का पालन करवाने हेतू अपनी टीम का निर्देशन करते नज़र आये। शुरुआत में ही कर्फ्यू में आवश्यक सेवाओं जैसे दूध ,सब्जी और दवाई आदि की दुकानों को भी मल्लातलाई में बंद कर दिया गया।
अब बारी थी मल्ला तलाई में कर्फ्यू का अक्षरश पालन करवाने की,क्योंकि इलाके में दूध और दवाई की दुकाने बंद थी ,इस पर जिला पुलिस अधीक्षक कैलाश विश्नोई के निर्देश पर पुलिस ने लोगों के घरो तक दवाइयाँ पहुचायी और दूध तक घरों में पहुँचाया गया। कई जरूरतमंद लोगों के घरों तक खाना भी पहुँचाया गया। यही कारण रहा कि मल्ला तलाई की जनता ने भी पुलिस अधीक्षक कैलाश विश्नोई के निर्देशों का पालन भी किया। इसके साथ ही मल्ला तलाई इलाके में घर घर जाने वाली टीम के साथ सुरक्षा के लिए पुलिस के जवान भी उपलब्ध करवाए।
पुलिस अधीक्षक कैलाश विश्नोई ने जहाँ कर्फ्यू के पूरी तरह पालन के लिए अपनी टीम को मोटीवेट किया वही लोगों को जरुरत के सामानो की आपूर्ति भी करवायी। मल्ला तलाई के लोगो का दिल अब विश्नोई साहब जीत चुके थे। स्थानीय लोगो ने उनके आदेशों का पालन करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। किसी भी बाहर के व्यक्ति को मल्ला तलाई में जाने से पुलिस द्वारा रोक दिया गया और मल्ला तलाई वाले लोगो को बाहर आने पर रोक लगा दी गयी। पुलिस अधीक्षक कैलाश विश्नोई ने अपने 100 से ज्यादा अधिकारियों और सिपाहियों को मल्ला तलाई में लगा कर आदेशों का सख्ती से पालन करवा कर कोरोना महामारी को आगे बढ़ने से रोक दिया।
वास्तव में जिला कलेक्टर के साथ पुलिस अधीक्षक के तत्परता से लिए निर्णयों की वजह से ही आज उदयपुर कोरोना मुक्त हो पाया है। आप दोनो उदयपुर के रत्न हो। आपका ये योगदान उदयपुर सदैव याद रखेगा और आपका ऋणी रहेगा।
परिणाम ये हुए कि मल्ला तलाई इलाका उदयपुर का कोरोना हॉट स्पॉट बनने से बच गया और इसका पूरा श्रेय कलेक्टर आनंदी के साथ पुलिस अधीक्षक कैलाश विश्नोई और उनके पुलिस बल को भी जाता है।