खुलासा : MB हॉस्पिटल में कोरोना सैंपल के लिए लगाए ईएनटी डॉक्टर्स और PG डॉक्टर के बजाय लैब टेक्नीशीयन !
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कोरोनोवायरस नमूनों के संग्रह के लिए कान, नाक और गले (ईएनटी) विशेषज्ञ डॉक्टर्स और स्नातकोत्तर (PG ) प्रशिक्षु डॉक्टरों को नियुक्त करने का निर्देश दिया था।
इन नमूनों को एकत्र करने के लिए प्रशिक्षित और योग्य कर्मियों आवश्यकता होती है। इसलिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने सभी राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों से अनुरोध किया कि वे ईएनटी की सेवाओं का उपयोग करके COVID-19 मामलों के नमूनों के संग्रह का करें।केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी अमित विश्वास ने कहा कि सभी मुख्य सचिवों और स्वास्थ्य सचिवों को इस बावत पत्र लिखा गया था ।
पत्र में कहा गया है कि देश COVID-19 के एक अभूतपूर्व प्रकोप के बीच में है और इस प्रकोप से निपटने के लिए सरकार की रणनीति के प्रमुख घटकों में से एक है, संभावित संक्रमित व्यक्तियों के गले और स्वाब के नमूनों का पता लगाना और संग्रह करना।
इस उद्देश्य के लिए राज्यों के सभी सरकारी / निजी मेडिकल कॉलेजों में काम करने वाले इन पेशेवरों (ईएनटी विशेषज्ञों) की सेवाओं का मसौदा तैयार किया जा सकता है।पत्र में कहा गया था "सभी मेडिकल कॉलेजों को अपनी सेवाओं की पेशकश करने के लिए राज्य सरकारों के साथ संपर्क करने का निर्देश दिया जा सकता है। अनुरोध किया जाता है कि इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई तत्काल की जाए और इसकी रिपोर्ट मंत्रालय को दी जाए।"
इसने सभी एसीएस / प्रमुख सचिव स्वास्थ्य / चिकित्सा शिक्षा और निदेशक चिकित्सा शिक्षा को सलाह दी कि वे चिकित्सा संस्थानों को इन लाइनों पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करें ताकि इस तरह के नमूनों को पेशेवर रूप से लिया जाए।
इसके विपरीत महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय के कार्यालय अधीक्षक ने दिनाँक 4 अप्रैल 2020 को आदेश क्रमांक एस.ओ./सामान्य/फा.का.आदेश/2020-21 के द्वारा राज्य सरकार के आदेश का ज़िक्र कर कोरोना आइसोलेशन वार्डों में कोरोना वायरस के संदिग्ध भर्ती रोगी की Nasal Swab /Naso -Pharyngeal Swab /Blood सैंपल जाँच के लिए लैब टेक्नीशीयनो को नियुक्त कर दिया। आदेश में कहा गया है कि पहले सात दिन तक ईएनटी रेसिडेंट्स के अधीन ये लैब टेक्नीशीयन सैंपल लेंगे और बाद में स्वयं ही ये लैब टेक्नीशीयन स्वयं ही सैंपल लेंगे। इस आदेश में शुरुआत में 6 लैब टेक्नीशीयनो को नियुक्त किया गया था।
इसके बाद महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय के कार्यालय अधीक्षक ने दिनाँक 15 अप्रैल 2020 को आदेश क्रमांक एस.ओ./स.प्र.अ./फा.आदेश (Covid -19 )/2020-21/662 के द्वारा 4 लैब टेक्नीशीयनो को नियुक्त कर दिया गया।
आपको बताते चले कि उदयपुर के महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय के साथ में रविंद्र नाथ टैगोर मेडिकल कॉलेज संचालित होता है जिसमें कई PG रेसीडेंट्स पढाई के साथ अपनी सेवाएं देते है और साथ ही महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय में ईएनटी डॉक्टर्स की भी कमी नहीं है फिर इस महामारी के सैंपल लेने के लिए भारत सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ़ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर के मेडिकल एजुकेशन विंग के 8 अप्रैल के आदेश File No. Z 20015 /127/2019 -ME-I के अनुसार कोरोनोवायरस नमूनों के संग्रह के लिए कान, नाक और गले (ईएनटी) विशेषज्ञ डॉक्टर्स और स्नातकोत्तर (PG ) प्रशिक्षु डॉक्टरों को नियुक्त करने के आदेश की अवहेलना क्यों की गयी ?
आपको बताते चले कि यदि रोगी से एकत्र वायरल सामग्री की अपर्याप्त मात्रा ली जाती है तो गलत नेगेटिव रिजल्ट आ सकते हैं। जिन नमूनों को संग्रहीत किया जाता है या अनुचित तरीके से संभाला जाता है, उनके परिणाम भी नेगेटिव ही आते है। यदि रोगी को संक्रमण के दौरान बहुत जल्दी परीक्षण किया जाता है और परीक्षण में वायरस की अपर्याप्त मात्रा का पता लगाया जाता है, तो परीक्षण में नेगेटिव रिजल्ट आ सकते हैं। अनुचित नमूना लेने से गलत नेगेटिव रिजल्ट आ सकते है।
लैब टेक्नीशीयन यदि कान, नाक और गले (ईएनटी) विशेषज्ञ डॉक्टर्स और स्नातकोत्तर (PG ) प्रशिक्षु डॉक्टरों की अनुपस्थिति में सैंपल ले रहे है तो रिजल्ट्स और सैंपल की प्रमाणिकता में संदेह पैदा होना स्वाभाविक है। क्यों महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय के कार्यालय अधीक्षक ने अपने (ईएनटी) विशेषज्ञ डॉक्टर्स और स्नातकोत्तर (PG ) प्रशिक्षु डॉक्टरों की ड्यूटी सैंपल लेने में नहीं लगायी जबकि उदयपुर में संभाग का सबसे बड़ा मेडिकल कॉलेज है।
आपको बताते चले कि उदयपुर में पाये गए सभी 4 कोरोना पॉजिटिव अभी कुछ दिन पहले नेगेटिव हो गए थे। नेगेटिव होने के कुछ दिनों बाद इनमे से दो मरीज हॉस्पिटल के क्वारंटाइन में ही दुबारा पॉजिटिव हो गए। जबकि ऐसे केस विरले ही है कि हॉस्पिटल के क्वारंटाइन में ही कोरोना पॉजिटिव मरीज नेगेटिव आने के बाद दुबारा पॉजिटिव हुए हो। दुबारा पॉजिटिव होने वालेज्यादातर केस ऐसे है जिन्हें नेगेटिव होने के बाद हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गयी थी।
एक सच्चाई ये भी है कि सच्चाई मेडिकल विज्ञानं अभी भी इस बात को ठीक से नहीं समझ नहीं पाया हैं कि प्रारंभिक संक्रमण के बाद नेगेटिव परीक्षण करने वाले लोगों का परीक्षण फिर से सकारात्मक कैसे हो जाता है ?इस बारे में और अधिक अध्ययन की आवश्यकता है।