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clean-udaipur पेयजल झीलों के पेटे से सीवर लाइन निकालना था एक आत्मघाती कदम- तेज शंकर पालीवाल !
News Agency India February 02, 2021 07:02 AM IST

पेयजल झीलों के पेटे से सीवर लाइन निकालना था एक आत्मघाती कदम- तेज शंकर पालीवाल !

उदयपुर, 21 फरवरी, उदयपुर की झीलों के पेटे से सीवर लाइनो को हटाने का कार्य बजट के अभाव में नही रुके, इसके लिए राज्य सरकार बजट में विशेष प्रावधान करे। साथ ही आयड़ नदी पेटे में गंदे पानी के प्रवाह को रोकने के लिए बिछाई जा रही लाइनों व मेनहोल में आधुनिक सेंसर तथा झील-बांधो के सुधार के लिए भी बजट में प्रावधान किया जाए। यह मांग रविवार को झील संवाद में रखी गई।

संवाद में विशेषज्ञ डॉ अनिल मेहता ने कहा कि विगत चार पांच वर्षों से सीवर लाइनों को झीलों से बाहर करने की मांग चली आ रही है। इस पर व्यापक सहमति भी बन चुकी है। ऐसे में बजट के अभाव में यह महत्वपूर्ण कार्य नही रुकना चाहिए। आयड़ नदी में बिछाई जा रही लाइन में सेंसर लगने जरूरी है ताकि यह निगरानी बनी रह सके कि सामान्य दिनों में लाइनों से नदी में प्रवाह नही हो रहा तथा बरसात में नदी का पानी पाइपों में प्रवेश नही कर रहा । मेहता ने कहा कि पीछोला, फतेहसागर, बड़ी, उदयसागर के बांध ( पाल) शताब्दियों पुराने है। इनकी वर्तमान ताकत, भीतरी संरंचना की स्थिति की जांच होकर सुधार व संरक्षण के लिए भी योजना बनना जरूरी है। राज्य सरकार को बजट में इन सभी के लिए विशेष प्रावधान करना चाहिए।

झील विकास व संवर्धन समिति के सदस्य तेज शंकर पालीवाल ने कहा कि पेयजल झीलों के पेटे से सीवर लाइन निकालना एक आत्मघाती कदम था। मूल योजना में झील परिधि में सीवर लाइने बिछा कर सीवर को झील से दूर ले जाना ही था। लेकिन तब ये तर्क दिया गया कि इससे परिधि के बड़े क्षेत्र में रोड काटकर जमीन के नीचे सीवर लाइन बिछानी पड़ेगी, बहुत खर्चा होगा और इसलिए सबसे आसान है कि झील पेटे से ही लाइन निकाल दो। अब इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। पालीवाल ने कहा कि स्वरूप सागर झरिया के रिसते पानी के उपचार व उपयोग पर शीघ्र कार्य व बजट स्वीकृत होना जरूरी है।

इसी संदर्भ में गांधी मानव कल्याण समिति के निदेशक नंद किशोर शर्मा ने कहा कि झीलें पेयजल का स्त्रोत होने के साथ साथ महत्वपूर्ण लिमनोलॉजिकल ( सरोवर विज्ञानीय) , हाइड्रोलॉजिकल( जल विज्ञानीय) तथा इकोलॉजिकल ( पारिस्थितिकीय) विरासत भी है। यदि इनका समग्र संरक्षण नही हुआ तो भविष्य अंधकार पूर्ण हो जाएगा। अतः उदयपुर संभाग की अनमोल विरासत व जीवन रेखा समस्त झीलों के संरक्षण पर राज्य सरकार से विशेष प्रावधान करने का आग्रह है।

संवाद से पूर्व पिछोला के बरीघाट पर आयोजित श्रमदान में प्लास्टिक, पालीथिन व अन्य गंदगी हटाई गई।श्रमदान में जल योध्दा देव राज सिंह सोलंकी ,कृष्णा कोष्टी ,मोहन सिंह चौहान, द्रुपद सिंह , तेज शंकर पालीवाल एवं नंद किशोर शर्मा ने भाग लिया।

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