भारत करेगा दुनिया की सबसे बड़ी चेहरा पहचान प्रणाली स्थापित !
भारत दुनिया की सबसे बड़ी चेहरा पहचान प्रणाली स्थापित करने की योजना बना रहा है। संभावित रूप से जहाँ ये निगरानी उपकरण बनाने वाली कंपनियों के लिए एक आकर्षक अवसर है वही गोपनीयता की वकालत करने वाले अधिवक्ताओं के लिए मुखालफत का अवसर है कि कहीं ये योजना चीनी शैली वाले दमनकारी राज्य का नेतृत्व तो नहीं करने जा रही ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार अगले महीने पूरे भारत में निगरानी कैमरों के माध्यम से चेहरे की पहचान के आंकड़ों को केंद्रीकृत करने के लिए एक प्रणाली बनाने के लिए निविदाएं खोलने वाली है । यह पासपोर्ट से लेकर उंगलियों के निशान तक सबकुछ दर्ज करने वाले डेटाबेस के साथ जुड जाएगा जिसे आपके आधार कार्ड से भी लिंक किया जा सकेगा। सबसे बड़ा फायदा भारत के पुलिस बल को मिलने वाला है जिससे अपराधियों, लापता व्यक्तियों और शवों की पहचान करने में मदद मिलेगी।
सरकार का कहना है कि यह कदम दुनिया के सबसे बड़े पुलिस बलों में से एक की मदद करने के लिए बनाया गया है, जिसमें हर 724 नागरिकों के लिए एक ही पुलिस अधिकारी है जो कि वैश्विक मानदंडों से नीचे है । यह कंपनियों के लिए भी एक वरदान हो सकता है। अनुमान है कि भारत का चेहरे की पहचान का बाजार 2024 तक छह गुना बढ़ कर चीन के बराबर होगा।
लेकिन यह परियोजना एक ऐसे राष्ट्र में भी खतरे की घंटी बजा रही है, जिसमें कोई डेटा गोपनीयता कानून नहीं है और सरकार के पास विकट परीस्थितियों में सिर्फ इंटरनेट सेवा बंद करने का विकल्प है,ऐसे में फेसिअल डाटा का गलत इस्तेमाल की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है ।पिछले वर्ष सरकार द्वारा प्रस्तुत डेटा संरक्षण विधेयक अभी भी कैबिनेट द्वारा अनुमोदित नहीं किया गया है या संसद में पेश नहीं किया गया है। देश में पहले से ही आधार को लागू करने में कई समस्याएं आ रही हैं, जो दुनिया के सबसे बड़े बायोमेट्रिक डेटाबेस में से एक है, जो बैंक खातों से लेकर आयकर दाखिलों तक सब कुछ जोड़ता है।
पुलिस बलों के लिए सिस्टम ठीक से लागू होने पर अपराध से लड़ने के लिए ये एक मारक उपकरण साबित होने वाला है । भारत ने पिछले तीन दशकों में 100 से अधिक आतंकवादी हमले देखे हैं, जिसमें मुंबई में लक्जरी होटल और एक ट्रेन स्टेशन शामिल है, जिसमें 2008 में 166 लोग मारे गए थे।