जयपुर, 06 मार्च । राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने कहा है कि फिजियोथेरेपिस्ट भारत की प्राचीन चिकित्सा विज्ञान और पद्धति की मूल जड़ों को पहचानने का प्रयास करें। साथ ही चिकित्सा को केवल उपचार नहीं, बल्कि सेवा और साधना का माध्यम बनाएं।
श्री देवनानी जयपुर के बिरला सभागार में राजस्थान फ़िजियो समिट -2026 का मुख्य अतिथि के रूप में उद्धाटन करते हुए समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। “फ़िजियोथेरेफी से फ़िजियोपैथी” विषय पर आयोजित इस दो दिवसीय सेमिनार में देश के 30 विश्वविद्यालयों के 2000 से अधिक संभागी भाग ले रहे हैं।
विधानसभा अध्यक्ष श्री देवनानी ने कहा कि आज फिजियोथेरेपी जिस समग्र दृष्टिकोण की बात कर रही है, वह हमारे ऋषियों ने हजारों वर्ष पहले स्थापित कर दिया था। हमारे शास्त्रों में प्राण, नाड़ी, चक्र, संतुलन, ऊर्जा प्रवाह इन सभी का वर्णन मिलता है। यह वही अवधारणाएँ हैं जिन्हें आज दुनिया न्यूरो रिहैबिलिटेशन, माइंड-बॉडी कनेक्शन और फंक्शनल रिकवरी के नाम से जान रही है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि हम सब मिलकर इस यात्रा को आगे बढ़ाएं उपचार से समझ तक, समझ से चेतना तक और यह चेतना मानवता तक आगें बढ़े इसका प्रयास करें।
श्री देवनानी ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुरूआत करवा कर न केवल भारत की स्वास्थ्य परंपरा के समन्वय की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया हैं बल्कि इसे वैश्विक पहचान भी दिलाई है। आज विश्व के सभी देश चाहें वे किसी भी धर्म के अनुयायी हों अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को अपना रहें है।
श्री देवनानी ने कहा कि भारत ज्ञान का भण्डार है। हम विश्व गुरू हैं लेकिन हमारा उद्देश्य कभी जोर जबरदस्ती से अपना साम्राज्य बढ़ाना नहीं बल्कि सारे विश्व का मार्गदर्शक बनना है और हम इस भूमिका का सदा निर्वहन करते आ रहें हैं और आगे भी हमेशा करते रहेंगे।
विधानसभा अध्यक्ष श्री देवनानी ने कहा कि “राजस्थान फिजियो समिट 2026” उस परिवर्तन का प्रतीक है, जहाँ चिकित्सा केवल शरीर के उपचार तक सीमित नहीं रह जाती, बल्कि वह मनुष्य के सम्पूर्ण अस्तित्व को समझने की दिशा में आगे बढ़ती है। फिजियोथेरेपी का वास्तविक स्वरूप केवल व्यायाम या पुनर्वास नहीं है, बल्कि यह शरीर की भाषा को समझने का विज्ञान है। जब शरीर दर्द के माध्यम से संकेत देता है, तो फिजियोथेरेपी उस संकेत को सुनती भी है और समझती भी है।
विधानसभा अध्यक्ष ने फिजियो विद्यार्थियों से कहा कि आप केवल एक पेशा नहीं चुन रहे, बल्कि एक दृष्टिकोण का निर्माण कर रहे हैं। जब आप किसी रोगी का उपचार करें, तो उसे केवल एक “केस” के रूप में न देखें, बल्कि एक जीवित चेतना के रूप में देखें।
फ़िजियोथेरेफी में पीजी संकाय खोलने की मांग का उत्तर देते हुए विधानसभाध्यक्ष श्री देवनानी ने कहा कि इसके लिए सतत और सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है । साथ ही फ़िजियोथेरेफी संस्थानों के लिए सही व्यक्तियों और संस्थानों का पंजीयन भी उतना ही आवश्यक है । विधानसभाध्यक्ष श्री देवनानी ने समारोह में उल्लेखनीय कार्य करने वाले व्यक्तियों को ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित किया ।
उद्घाटन सत्र समारोह में विशिष्ट अतिथि और राजस्थान स्वास्थ्य विश्वविद्यालय के कुलगुरू श्री प्रमोद येओले, एम्स जोधपुर के अध्यक्ष और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ एस एस अग्रवाल, सनराइज ग्रुप के चेयरमैन श्री हरीश राजानी, जय दुर्गा ग्रुप के निदेशक डॉ अनिल गुप्ता, आर आर ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशन के श्री राम बाबू शर्मा, विनायक ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशन के चेयरमैन श्री राजेन्द्र चौधरी तथा डीन और समिट के अध्यक्ष डॉ ध्रुव तनेजा के साथ ही अन्य कई विशिष्ट जन भी उपस्थित थे।