राजस्व अधिकारियों के साथ अगले 15 दिन में वीडियो कान्फ्रेंस कर पात्र गरीब परिवारों को आवासीय पट्टे देने का कार्य किया जायेगा- राजस्व मंत्री
जयपुर, 5 मार्च। राजस्व मंत्री हरीश चौधरी ने शुक्रवार को विधानसभा में आश्वस्त किया कि आगामी 15 दिनों में राजस्व अधिकारियों के साथ वीडियों कान्फ्रेंस कर सभी पात्र गरीब परिवारों को प्राथमिकता से पट्टे देने का कार्य किया जायेगा।
राजस्व मंत्री शून्यकाल में विधानसभा सदस्य ज्ञानचंद पारख की ओर से पाली जिले की रोहट तहसील के कतिपय गाँवो में गैर आबादी भूमि को आबादी भूमि में परिवर्तित करने के लम्बित प्रकरणों के सम्बन्ध में रखे गये ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर अपना जवाब दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि दो वर्ष पूर्व भी यह बात सदन में उठाई गई थी और उसके बाद हमने नियमों में शिथिलता देकर पट्टे दिये, लेकिन इस दौरान आबादी भूमि में परिवर्तन किये बिना ही ग्राम पंचायत द्वारा पट्टे दिये जो नियमानुसार सही नहीं है। उन्होंने कहा कि पट्टे लेने वालों की भी दो तरह की श्रेणी है जिसमें एक तो वास्तव में गरीब परिवार है और वह अज्ञानता की वजह से सरकारी जमीन पर काबिज हो गया । उन्होंने कहा कि ऎसे लोगों को पट्टे देने के लिए राज्य सरकार नियमों में जरूर शिथिलता देगी लेकिन दूसरी श्रेणी में वे लोग है जो प्रभावशाली और भूमाफिया है जो भूमि को हड़पने की मंशा से कार्य करते है उनको सरकारी भूमि से कैसे बाहर निकाले यह एक चूनौती है।
राजस्व मंत्री ने कहा कि गरीब परिवार चाहे अनुसूचित जाति, जनजाति या बीपीएल श्रेणी का है उन सबको नियमों में शिथिलता देते हुए पट्टे देने के प्रयास किये जायेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले वर्ष कोरोना के कारण कार्यो की प्राथमिकता बदल गई, लेकिन फिर से गांव के गरीब व वंचित परिवारों को प्राथमिकता से पट्टे मिले इस पर काम करना होगा। विधानसभा अध्यक्ष डॉ.सी.पी.जोशी द्वारा नरेगा में तीन वर्ष तक कार्य करने वाले श्रमिकों को भी आवासीय पट्टे देने के निर्देश पर चौधरी ने आश्वस्त किया कि नरेगा में तीन वर्षाे से लगातार कार्य कर रहे श्रमिकों को भी नियमानुसार पट्टे देने के प्रयास किये जायेंगे।
इससे पहले राजस्व मंत्री ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जवाब में अविकल रूप से बताया कि जिला कलक्टर पाली से प्राप्त सूचना में रोहट तहसील के कुल 43 गांवो में 944 परिवार 321.09 बीघा सरकारी भूमि पर लगभग 15-20 वर्षो से आवास बना कर निवास कर रहे है, जिनकी सूची उन्होंने सदन के पटल पर रखी है। उन्होंने बताया कि इनमें से 13 ग्रामों में पूर्ण रूप से प्रतिबन्धित भूमि पर विभिन्न व्यक्ति आवास बना कर निवास कर रहे है, जिनमें आबादी विस्तार हेतु भूमि आरक्षित की जाकर आवंटन नहीं किया जा सकता है तथा 7 ग्रामों की सरकारी भूमि जोधपुर पाली मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण(रीको) के पक्ष में राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि शेष 23 ग्रामों में से वर्तमान में ग्राम पंचायत भाखरीवाला द्वारा ग्राम अरटिया में आबादी विस्तार हेतु भूमि आवंटन का निवेदन करने पर ग्राम अरटिया के खसरा नम्बर 107 रकबा 9.02 हैक्टेयर किस्म गै.मु. गोचर में आबादी बसी होने के कारण उक्त भूमि को आबादी विस्तार हेतु आरक्षित कर आवंटन कराने के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया है जो प्रक्रियाधीन है। चूंकि प्रकरण मे आवेदित भूमि की किस्म गै.मु. गोचर है। उन्होंने बताया कि इस प्रकरण का राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर द्वारा डी.बी.सिविल रिट याचिका(पीआईएल) संख्या 1554/2004 गुलाब कोठारी बनाम राज्य सरकार एवं अन्य में दिनांक 12 जनवरी 2017 एवं उक्त सम्बन्ध में निरन्तरता में राजस्व (ग्रुप 6) विभाग द्वारा पत्र दिनांक 20 मई 2019 में दिये गये निर्देशों के क्रम में प्रकरण का परीक्षण किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि परीक्षणोपरान्त प्रकरण में नियमानुसार कार्यवाही की जावेगी। इसके अतिरिक्त जहां तक ग्राम पंचायतों द्वारा सरकारी भूमियों पर भूखण्ड काट कर विभिन्न व्यक्तियों को पट्टे जारी किये जाने का प्रश्न है, तो इस सम्बन्ध में ऎसा कोई सर्वे अभी तक नहीं करवाया गया है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि किन-किन ग्राम पंचायताें द्वारा सरकारी भूमियों पर पट्टे जारी किये गये है। इस संबंध में पृथक से सर्वे करवाया जा रहा है सर्वे में प्राप्त होने वाली सूचना के आधार पर नियमों के तहत कार्यवाही किया जाना संभव होगा।

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