पीछोला में दौड़ रही होटल वालो की अवैध नावें,सीज़ होने के बाद भी चला रहे सीज़ नावें !
उदयपुर की पीछोला झील में हो रहे गड़बड़ झालो और झीलों पर होटल वालों द्वारा किये गए कब्ज़ों की विस्तृत खबर न्यूज़ एजेंसी इंडिया ने 28 जनवरी 2018 को अपने पाठकों तक पहुचायी थी जिसमे न केवल होटल वालो द्वारा पीछोला में अवैध नावों का संचालन का ज़िक्र था बल्कि अवैध नावों के फोटो,वीडियो के साथ नावों में रेस्टोरेंट के साथ शराब परोसे जाने की सूचना भी दी गई थी। साथ ही अपने पाठकों को सबसे पहले बता दिया कि कुछ नाव जिस्मफरोशी के लिए देर रात किराये भी दी जाती है।
इसके साथ ही आपको बताते चले कि झील के मालिकाना हक नगर निगम उदयपुर के पास है और बोटिंग और जेट्टी प्लेटफॉर्म की स्वीकृति भी यही विभाग देता है। लेकिन इसकी फाइल्स और सूचना कहाँ और किस अधिकारी के पास है ,इस बारे में सभी अधिकारी कन्नी काटते नज़र आते है।
जहाँ पीछोला में नाव संचालन का टेण्डर नगर निगम ने शर्तों सहित इस साल 10 प्रतिशत बढ़ाते हुए 2 करोड़ 64 लाख रूपये में उदयपुर की यश एम्यूजमेंट कंपनी को दिया। लेकिन सारी शर्तों और मानकों को पूरा करने के बावजूद भी यश एम्यूजमेंट कंपनी की नावों को पर्याप्त पर्यटक नहीं मिलते है। इसका कारण ये है कि पीछोला झील किनारे कई होटल वाले जिसमे होटल लेक पिछोला,होटल जगत निवास ,होटल आमेट हवेली,होटल द लीला पैलेस ,होटल ताज लेक पैलेस ,होटल ओबेराय उदयविलास और अन्य कई होटल वाले अवैध रूप से पीछोला में नाव संचालन कर पर्यटकों को घूमाते है। खास बात ये है कि इन होटल वालों के पास पर्यटकों को घूमाने के लिए कोई अधिकृत लाइसेंस भी नहीं है और ये केवल अपने ग्राहकों को झील किनारे से होटल तक लाने के लिए अधिकृत है। ये होटल वाले बिना किसी फीस को दिए अवैध तौर पर झील में नावें चलाते है। खास बात ये भी है कि सूर्यास्त के बाद भी देर रात 1 बजे तक इनकी नावें पीछोला में दौड़ती रहती है।
इन नावों में वैध - अवैध सभी तरह के काम देर रात देखे जाते है। इन सभी होटल की नाव व्यवस्था ऐसी नहीं है जो नगर निगम और परिवहन विभाग के नियमो और तय मानकों पर खरी उतरती हो और किसी भी होटल वाले के पास अपनी रेस्क्यू बोट तक नहीं है जो आपात परीस्थितियों में नाव सवार और सवारियों की मदद कर सके ! अगर कभी हादसा होता है तो ये होटल वाले अपनी सवारियों को कैसे बचाएँगे ? कौन जिम्मेदार होगा अगर हादसे में किसी की जान चली जाती है ?
कई होटल वाले तो इनसे भी आगे निकल गए है और इनके पास पर्सनल पोन्टून है (जिसे इन्होने फिलहाल नगर निगम की कार्यवाही के बाद पीछोला से निकाल कर अन्यत्र कही छूपा दिया गया है ) जिस पर देर रात ये होटल नाव के माध्यम से झील में ले जाकर कैंडल लाइट डिनर तक करवाते है।
जहाँ आम आदमी को झील किनारे अपना घर होने के पर सामान्य काम करवाने के लिए उदयपुर नगर निगम सहित अन्य विभागों के चक्कर लगाने पड़ते है और उन्हें अनुमति नहीं मिलती ,वही ये होटल वाले बेधड़क झीलों में अवैध निर्माण कर रहे है। जहाँ अधिकृत नाव संचालक करोड़ो रूपये खर्च कर अपनी लागत तक वसूल नहीं पा रहा है वही ये होटल वाले बिना पैसे दिए रोजाना लाखों तक कमा रहे और सरकारी राजस्व को चुना लगा रहे।
क्या कारण है कि नगर निगम उदयपुर,प्रादेशिक परिवहन विभाग,प्रदुषण निंयत्रण विभाग,नेशनल लेक कंज़र्वेशन प्रोजेक्ट,पर्यटन विभाग और नगर विकास प्रन्यास के अधिकारी इन होटल वालों के खिलाफ कार्यवाही करने से बचते नज़र आते है ?
होटल वालों की हिम्मत और पैसे के दम पर होने वाले संबंधों की बानगी देखिये कि अभी चार दिन पहले परिवहन विभाग ने तीन होटल की पार्टी बोट को सीज़ कर उनके लाइसेंस निरस्त कर दिए थे फिर भी आमेट हवेली होटल की नाव अगले दिन सुबह बेख़ौफ़ संचालित हो रही थी।12 जनवरी 2020 तक इनकी नाव सीज़ होने के बाद भी पीछोला में पर्यटकों को घूमा रही थी। (देखे वीडियो) मतलब साफ है कि ये होटल वाले इतने बेख़ौफ़ है कि इन्हें प्रशाशन का भय तक नही है या सभी इनके संबधी है ।
हद्द तो ये है कि कई होटल वालों जैसे जगत निवास और उदयकोठी होटल वाले तो नाव पर रेस्टोरेंट चलाकर देर रात तक झील में व्यावसायिक गतिविधियाँ चलाते है। इनकी बोट में बिस्किट,कोल्ड ड्रिंक और अन्य सामग्री तक परोसी अथवा बेचीं जाती है। साथ में इन नावों को पार्टियों के लिए किराये भी दिया जाता है। कई नावें ऐसी भी है जिसमे आप हज़ारों रूपये खर्च कर पूरी रात आप कमरे नुमा घर में बीता सकते है।
कई होटल्स अवैध रूप से झील में पोन्टून लगा कर रातों में कपल्स डिनर का आयोजन कर लाखो रुपए बना भी रहे है और सिस्टम चुपचाप बना हुआ मूक देख रहा है। एक और बात गौर करने योग्य ये है कि इन होटल्स की जेट्टियो का किराया इतना कम है कि किसी भी एक छोटी नाव के एक दिन के संचालन खर्च से इनका साल भर का किराया वसूल हो जाता है और साल भर इनकी वैध -अवैध नावें करोड़ो रूपये की चांदी कूटने में लगी रहती है।
उदयपुर नगर निगम के साथ स्थानीय नगरीय निकाय विभाग को इनके पुनः किराये निर्धारण की अत्यन्त आवश्यकता है जिससे उदयपुर नगर निगम और राजस्थान सरकार को करोडो की अतिरिक्त आय मिल सके। साथ ही ऐसे निगरानी तंत्र के गठन की भी आवश्यकता है जो सिर्फ झीलों के इश्यूज के बारे में कार्यवाही कर सके,सतत निगरानी रख सके। फ़िलहाल झील सरंक्षण समिति सहित नेशनल लेक डेवलपमेंट प्रोजेक्ट सरीखे काम पीछोला को मायूस ही कर रहे है। आम उदयपुरवासी सहित गरीब पर्यटक किनारे बैठ झील को निहार रहे है और होटल्स वाले झील के अंदर अपनी दुकाने चलाकर आम लोगो के साथ सरकार को ठेंगा दिखा रहे है।