सरकारी विभाग यदि नागरिकों को निरंतर रूप से सहभागी बनाये तो झीलें रहेंगी स्वच्छ -तेज शंकर पालीवाल
उदयपुर, 28 फरवरी : एक सशक्त, निज स्वार्थ मुक्त व पर्यावरणीय दृष्टिकोण से युक्त स्वैच्छिक नागरिक आंदोलन से ही उदयपुर का झील तंत्र पूर्णतया नष्ट होने से बचा हुआ है। यह विचार रविवार को आयोजित झील संवाद में व्यक्त किये गए।
झील विशेषज्ञ डॉ अनिल मेहता ने कहा कि प्रशासन व सरकार के लिए भी झीलें व आयड़ नदी एक केंद्र बिंदू है। लेकिन, सरकारी कार्मिकों के बदलते रहने, राजनीतिक नेतृत्व व सत्ता में परिवर्तन होने एवं प्राथमिकताओं के बदलते रहने से सरकारी विभागों व संस्थाओं के लिए झील-नदी संरक्षण एक सतत व प्रमुख कार्य नही रह पाता। लेकिन उदयपुर के नागरिक समाज की वैज्ञानिक दृष्टिकोण से परिपूर्ण सक्रिय भूमिका ने झीलों व आयड़ नदी को सदैव एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनाये रखा है। इस नागरिक भूमिका को और अधिक मजबूत बनाने की जरूरत है।
इसी संदर्भ में झील प्रेमी तेज शंकर पालीवाल ने कहा कि सरकारी विभाग यदि नागरिकों को निरंतर रूप से सहभागी बनाये तो झीलें स्वच्छ रहेगी , उन पर अतिक्रमण रुकेंगे एवं देशी प्रवासी पक्षियों व लाभदायक प्रजाति की मछलियों के आवास सुरक्षित रह सकेंगे।
पर्यावरणविद नंद किशोर शर्मा ने कहा कि उदयपुर का सौभाग्य है कि यंहा विशुद्ध पर्यावरण सेवा के लिए कार्य करने के लिए कई नागरिक कार्यकर्ता निरंतर क्रियाशील है। यही नागरिक शक्ति झीलों के मुद्दे को विस्मृत नही होने देती है तथा सरकार पर निरंतर दबाव बनाए रखती है।
शिक्षाविद कुशल रावल ने कहा कि विद्यालयों , महाविद्यालयों के इको क्लब, एन एस एस, एन सी सी से जुड़े विद्यार्थी झील संरक्षण में प्रभावी भूमिका निभा सकते है।

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