शेफर्ड मेमोरियल चर्च उदयपुर,इतिहास और ईसाई धर्म का मेवाड़ में आगमन !
महाराणा फ़तेह सिंह जी ने बेदला राव साहब को आदेश देकर जार्ज शेफ़र्ड को चर्च की जगह दी।
उदयपुर का पहला मिशनरी स्कूल
बेदला राव साहब
127 साल के स्कॉटिश शैली वाला शहर के पहले शेफर्ड चर्च का इतिहास कम रोचक नहीं है। 1877 सन् तक उदयपुर में ईसाई समुदाय के केवल 23 जने थे इनमें भी कोई स्थाई नहीं थे। ये विदेश मे नौकरी कर रहे थे या साथ मे लाए गए थे।
तब डा जार्ज शेफर्ड नवम्बर सन् 1877 में दुसरी बार उदयपुर आये।
डा. शेफर्ड के मन में ईसाई धर्म की प्रचार प्रसार की प्रबल भावना थी। वो ईस्ट इंडिया कंपनी की तरफ से आये थे।डा.शेफर्ड काफी समय तक परेड ग्राउंड वर्तमान में गांधी ग्राउंड में टेंट लगाकर रहे।
उस समय उन्होंने जब ईसाई समुदाय के लोगों को इकट्ठा करने के लिए आंकड़े बनाए तब कुल जमा 23 जनसंख्या उदयपुर में थी। डा. शेफर्ड ने अपने पहले चरण के लिए बेदला राव से मदद मांगी। फलस्वरूप बेदला राव ने शेफर्ड के पहले चरण का अर्थ एक हॉस्पिटल खोलना था तब राव बेदला ने महाराणा सज्जनसिंह जी से शेफर्ड को मिलवाकर डिस्पेंसरी की जगह दिलवाकर मण्डी में इसे खुलवाया।
डा जार्ज शेफर्ड ने लोगों को विश्वास में लेकर अंग्रेजी ईलाज और शल्य चिकित्सा के लिए प्रेरित किया। तब लोग क्लोरोफॉर्म और चीरफाड़ से डरते थे परन्तु धीरे धीरे लोगों को लाभ मिला तो लोगो का विश्वास बढ़ने लगा। डा.शेफर्ड ने ग्यारह महीने में 27472 रोगी देखे जिसमेें 14 के सफल आपरेशन किए गए। ये सभी ईलाज निशुल्क धनी लोगों के चंदे से होता।
अब डाक्टर का अगला मिशन इसाई धर्म का प्रसार करना था। तब डॉ शेफर्ड ने ईसाई मिशनरी स्कूल खोला। फिर अगले चरण में सभी 23 जने जो ईसाई समुदाय के थे, उनकी एक पिकनिक रखी गयी और उन्होंने इन सभी को अपना उद्देश्य बताया। तब कुछ राजपूत और भील मुस्लिम समुदाय के लोगों ने स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन कर यह आबादी 50 तक पहुँचा दी।
फिर अगला चरण गिरिजा घर की स्थापना थी ,जहां पर सामूहिक प्रार्थना की जा सके, तब 1890 महाराणा से अनुरोध कर चर्च और हॉस्पिटल के लिए जगह मांगी।1890 में उस समय के स्टेट इंजिनियर मिस्टर थामसन ने आर्किटेक्ट से मिलकर जगह तलाश की। डा शेफर्ड ने भी इसके लिए पैसे जुटाए और आखिर कर 5 जुलाई 1891 में उदयपुर में ईसाई धर्म का पहला गिरिजा घर शुरू हुआ। यही चर्च वर्तमान चेटक सर्कल के नजदीक जार्ज शेफर्ड मेमोरियल चर्च के नाम से जाना जाता है।
इतिहासकार : जोगेन्द्र नाथ पुरोहित
शोध :दिनेश भट्ट (न्यूज़एजेंसीइंडिया.कॉम)
Email:erdineshbhatt@gmail.com
दुर्लभ किताब जिसमे ईसाई धर्म के इतिहास का उल्लेख है।