करिये दर्शन : हिंगलाज माता मन्दिर जहाँ स्थानीय मुस्लिम करते है सुरक्षा !
हिंगलाज माता मन्दिर, पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रान्त के हिंगोल नदी के तट पर स्थित है। ये मंदिर मकरान रेगिस्तान के खेरथार पहाड़ियों की एक शृंखला के अंत में है। मंदिर एक छोटी प्राकृतिक गुफा में बना हुआ है। जहां एक मिट्टी की वेदी बनी हुई है। देवी की कोई मानव निर्मित छवि नहीं है। बल्कि एक छोटे आकार के शिला की हिंगलाज माता के प्रतिरूप के रूप में पूजा की जाती है।
यहां गिरा था देवी सती का सिर
जब देवी सती ने आत्मदाह किया तो भगवान शिव उनके शव को लेकर ब्रह्मांड में घूमने लगे। शिव के मोह को भंग करने के लिए भगवान विष्णु ने अपने चक्र से सती के देह के टुकड़े कर दिए। जहां-जहां सती के अंग गिरे, वो स्थान शक्तिपीठ कहलाए। मान्यता है कि हिंगलाज शक्तिपीठ में देवी सती का सिर गिरा था।
मुस्लिम भी करते हैं पूजा
पाकिस्तान के मुस्लिम भी हिंगलाज माता पर आस्था रखते हैं और मंदिर को सुरक्षा प्रदान करते हैं। वे इस मंदिर को नानी का मंदिर कहते है। एक प्राचीन परंपरा का पालन करते हुए स्थानीय मुस्लिम जनजातियां, तीर्थयात्रा में शामिल होती हैं और तीर्थयात्रा को नानी का हज कहते हैं।
माता की एक झलक पाने के लिए मंदिरों के बाहर भक्तों की लंबी कतारे लगी रहती है और अगर वो मां का शक्तिपीठ है तो उसकी तो बात ही अलग है। वैसे तो माता सभी के दुखों को कम करती हैं, लेकिन एक शक्तिपीठ ऐसा भी है जो हिन्दू मुसलमान के भेदभाव को मिटाता है।इस मंदिर में दर्शन के लिए आपको पाकिस्तान सरकार की इजाजत लेनी पड़ेगी। माता का ये शक्तिपीठ हिंगजाल देवी के नाम से जाना जाता है। जो बलूचिस्तान राज्य में स्थित हैं। पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु के चक्र से कटकर यहां पर देवी सती का सिर गिरा था। इसलिए यह स्थान चमत्कारी और दिव्य माना जाता है।
पाकिस्तान में देवी हिंगलाज को नानी का मंदिर और नानी का हज भी कहते हैं। इस स्थान पर आकर हिंदू और मुसलमान का भेद भाव मिट जाता है। दोनों ही भक्ति पूर्वक माता की पूजा करते हैं।
ब्रह्मवैवर्त पुराण में कहा गया है कि जो एक बार माता हिंगलाज के दर्शन कर लेता है, उसे पूर्वजन्म के कर्मों का दंड नहीं भुगतना पड़ता है। मान्यता है कि परशुराम जी द्वारा 21 बार क्षत्रियों का अंत किए जाने पर बचे हुए क्षत्रियों ने माता हिंगलाज से प्राण रक्षा की प्रार्थना की। माता ने क्षत्रियों को ब्रह्मक्षत्रिय बना दिया, इससे परशुराम से इन्हें अभय दान मिल गया।
एक मान्यता यह भी है कि रावण के वध के बाद भगवान राम को ब्रह्म हत्या का पाप लगा। इस पाप से मुक्ति पाने के लिए भगवान राम ने भी हिंगलाज देवी की यात्रा की थी। राम ने यहां पर एक यज्ञ भी किया था। माता हिंगलाज माता वैष्णों की तरह एक गुफा में बैठी हैं।
Nani Mandir in #Balochistan is one of the most precious place to protect for the #Baloch people, it's safe existence is the proof of our religious tolerance and love with other communities.@narendramodi @TarekFatah @majorgauravarya @RahulGandhi @myogiadityanath @rajnathsingh pic.twitter.com/Th4eKSvZwk
— Saleem Bakhtiar (@saleembakhtair) June 18, 2019