कोरोना काल ने जिम इन्डस्ट्री को किया बेहाल
पिछले कुछ वर्षों में जिम शब्द युवाओं और फिटनेस पसन्द लोगों के जीवन मे एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। इस शब्द से वैसे तो हमारी पिछली पीढ़ी भी बहुत पहले से वाकिफ है। लेकिन पहले जिम का मतलब होता था अखाड़े जिनसे पहलवान निकलते थे। जिम संस्कृति विदेशों से हमारे देश मे आई है। पहले जिम में सिर्फ स्पोर्ट्स से जुड़े हुए खिलाड़ी, पावर लिफ्टर आदि ही जाते थे। पहले के जिम जिन साजो सामानों से लैस होते थे वे किसी कारखाने सा परिदृश्य प्रस्तुत करते थे। भारी भरकम वजन उठाने के लोहे से बने हुए सामान जिनमे उपकरण सीमित संख्या में ही होते थे। जिम से निकलने वाले बॉडी बिल्डरों का एक अलग ही रौब और रुतबा होता था।
बॉलीवुड और हॉलीवुड फिल्मों का प्रभाव भारतीयों के दैनिक जीवन पर गहरा असर डालता है। फिल्मों का फैशन, संगीत और दिखाई जाने वाली और प्रयोग की जाने वाली हर चीज दैनिक जीवन का हिस्सा बन जाती है। यहाँ तक कि विज्ञापन भी फिल्मों में इस प्रकार दिखाए जाते है कि वह वस्तुएँ हमारे दैनिक जीवन मे मुख्य रूप से प्रयुक्त होने लग जाती है। पहले की हमारी भारतीय फिल्मों में दिखाए जाने वाले अभिनेता भी साधारण कद काठी व शारीरिक रूप से मसल मेन नहीं हुआ करते थे। पिछले कुछ दशकों में आई फिल्मो में सबसे पहले अक्षय कुमार और अजय देवगन खिलाड़ी और स्टंट मेन की छवि लेकर फिल्मों में प्रस्तुत हुए। फिर आये ऋतिक रोशन और अन्य समकक्ष अभिनेता जो बेहरतीन डांसर होने के साथ ही जिम की मस्क्यूलर बॉडी के साथ नजर आये, इसके बाद तो लगभग सभी अभिनेताओं ने बॉडी बनाकर शर्ट लेस शक्तिमान छवि दिखाना शुरू कर दिया। फिल्मों का प्रभाव सबसे पहले और ज्यादा युवाओं पर होता है। इसीलिए सूंदर देह और हष्ट पुष्ठ बनाने वाले कारखाने चल पड़े जिन्हें हम सभी जिम कहते है।
जिम में टेक्नोलॉजी और आधुनिक उपकरणों के शामिल होने के बाद हर बड़े शहर में ब्रांडेड वातानुकूलित जिम शरू होने लगे जिन्होंने युवाओं को अधिक आकर्षित किया। जिम के उपकरण इतने बेहतरीन होते चले गए कि आसानी से और चोट लगने के कम जोखिम के साथ बॉडी बनाई जा सकती है। बेशक बॉडी बिल्डिंग के लिए खान पान का भी अहम रोल है।
जिम अपने आकार प्रकार और अन्य सुविधाओं के कारण अलग अलग स्तर के होते है जिनमें मासिक 500 रुपये से लेकर कई हज़ारों रुपये मासिक तक का खर्च जिम की गुणवत्ता के हिसाब से आता है। इसके अलावा यदि आप पर्सनल ट्रेनिंग लेते है तो ट्रेनर को मासिक तनख्वाह के साथ ही पर्सनल ट्रेनिंग में कुछ प्रतिशत लाभांश भी मिलता है, कई ट्रेनर की आजीविका तो केवल पर्सनल ट्रेनिंग पर ही आधारित है।
जिम आज के आधुनिक जीवन मे खुद को फिट बनाये रखने का बेहतर माध्यम तो है ही एक बहुउद्देश्यीय रोजगार भी है। लेकिन कोरोना संकट ने इस व्यवसाय पर जो संकट उत्पन्न किया है उसके कारण कई जिम स्थाई रूप से बंद हो गए है और कई बंद होने की कगार पर है, जिम में काम करने वालों पर भी बड़ा रोजगार और आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। पिछले वर्ष लंबी अवधि के लिये बंद हुए जिम खुल तो गए थे लेकिन वर्तमान में बढ़ते कोरोना संक्रमण पुनः कुछ दिनों के लिए बंद कर दिए गए है, जो अब लंबी अवधि के लिये बंद रह सकते है, मेम्बर्स की बॉडी बनवाने वाले ट्रेनर कब तक घर चला पाएंगे ? यह एक ऐसी समस्या है जिससे पार पाना अब दूर की कौड़ी हो। सरकार को इस व्यवसाय से जुड़े लोगों के बारे में भी कुछ सोचना होगा जो केवल इसी काम पर आश्रित है।
स्टोरी : पत्रकार जयवन्त भैरविया की कलम से

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