उदयपुर नगर निगम की लापरवाही, गोवर्धन विलास झील रपट की गंदगी ओवरफ्लो से नालें में समायी !
आज 31 अगस्त 2020 के दिन सुबह गोवर्धन सागर के रपट की बजाय पास बनाये गेट से पानी बहता हुआ सतोरिया नाले की ओर बढ़ चला। इसका कारण पिछले साल आई भारी बारिश के कारण गोवर्धन विलास नाले से अत्यधिक वेग से पानी ओवरफ्लो पॉइंट पर निकला था, इस कारण इंजीनियरों ने गेट के नीचे की दीवार तुड़वा कर पानी की निकासी की टेम्पररी व्यवस्था करवाई थी। लेकिन उस दिन के बाद से इस गेट की तकनीकी जाँच करवाने की व्यवस्था पर किसी अधिकारी या इंजीनियर ने ध्यान नहीं दिया और आज गोवर्धन विलास झील ओवरफ्लो हो चली है ।
इसका सीधा मतलब यह है कि झील को पूर्ण भराव क्षमता पर नहीं भरा जा सकेगा और पानी बहता हुआ बर्बाद चला जाएगा।
साथ ही यदि पानी ज्यादा आता है तो पिछले साल की तरह मंदिर वाली पाल पर फिर से रिसाव शुरू होने की संभावना है क्योंकि पिछले साल रिसाव के समय आये अधिकारियों ने कहा था कि झील जब खाली हो जाएगी तब पाल की मरम्मत की जा सकेगी।
एक साल बीत जाने के बाद भी आज भी हालात जस के तस है और अभी से मंदिर वाली पाल पर सीपेज शुरू हो गए है।
झील के पानी को सहेजने की बजाय बहाया जा रहा है। यदि पिछले साल गेट के नीचे की दीवार ऊँची होने की वजह से तोड़ी गई तो फिर बाद में झील की भराव क्षमता के अनुरूप इसे दुरुस्त क्यों नही किया गया ?
क्यों अब तक ओवरफ्लो रपट की सफाई नहीं करवायी गयी ? किस दिन का इंतजार नगर निगम उदयपुर के अधिकारी कर रहे थे ? गंदगी बहते हुए पूरे नाले में जगह जगह पानी को जाम करेगी और जनता भुगतेगी !
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