आम लोगों का सहारा रोडवेज़ को बर्बाद करने पर तुली है गहलोत सरकार !
लाखों लोग राजस्थान रोडवेज से सफर करते है और कारण है रोडवेज बसों की समय प्रतिबद्धतता और सुरक्षा। कई ऐसे क्षेत्र भी है जहाँ रोडवेज घाटे में चलकर भी दूरस्थ क्षेत्रों में अपनी सेवायें दे रही है। यात्रा के दौरान यात्री को इन्सुरेंस के साथ वाहन खराब होने पर दूसरी बस की व्यवस्था भी रोडवेज द्वारा की जाती है। समय पर सुरक्षित यात्रा में राजस्थान रोडवेज का कोई सानी नहीं है।
लेकिन पिछली पूर्ववर्ती भाजपानीत सरकार के साथ वर्तमान कांग्रेस सरकार भी राजस्थान रोडवेज का दम घोटने पर तुली हुई है। चुनाव से पहले कांग्रेस ने राजस्थान रोडवेज की विभिन्न यूनियन वालो को सब्ज़ बाग़ दिखाए गए और कहा गया कि कांग्रेस आते ही रोडवेज को नया जीवनदान देगी। लेकिन हुआ कुछ नहीं। सरकार के पहले बजट में रोडवेज का नाम तक नहीं है।
रोडवेज बचाने के लिए सभी मजदुर संगठन एक हो गए है और अपनी संयुक्त बैठक में 16 जुलाई 2019 मंगलवार को पूरे प्रदेश में रोडवेज की सभी इकाइयों पर विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया।
सरकार की नज़र रोडवेज की पूरे राजस्थान में पड़ी अचल सम्पत्ति पर है जिनकी कीमत हज़ारो करोड़ रुपए है। सरकार इन सम्पत्तियों को बेचकर या तो रोडवेज को बंद करने के मूड में है या प्राइवेट हाथो मे देने की तैयारी में है। अगर ऐसा होता है तो जहाँ राजस्थान में रेल नेटवर्क पहले से ही उन्नत नहीं है ,वही जनता को यातायात की समस्या से जूझना पड सकता है।
वही दुसरी ओर रोडवेज को बचाने रोडवेज के कर्मचारी अपनी जेब से चंदा इकठ्ठा कर रोडवेज बसों का काम करवा रहे है ताकि रोडवेज सुचारु रूप से चल सके।