करंट से नहीं बल्कि जहरीली गैस से हुई थी मनवाखेड़ा में चार श्रमिकों की मौत !
उदयपुर के मनवाखेड़ा में सीवरेज के मेनहॉल में उतरे चार श्रमिकों की मौत करंट से नहीं बल्कि सीवर की जहरीली गैस से दम घुटने के कारण हुई थी।चारों मृतकों के पोस्टमार्टम के बाद खुलासा हुआ कि शरीर के अंगो पर जहर का असर था और मृतकों को हॉस्पिटल ले जाते वक़्त 2 मजदूरों के मुँह से झाग भी निकल रहे थे। मेडिकल बोर्ड ने सभी मजदूरों के विसरा सैंपल लिए हैं ताकि मृत्यु के कारणों की विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट मिल सके। सीवरेज का काम करने वाली गुजरात के बड़ौदा की कंपनी दिनेश चन्द्र आरआर अग्रवाल कंपनी ने इसका काम एक ओर कंपनी प्रोजेक्टी बिल्ड होम को सबलेट कर दिया था जो कि टेंडर के नियमों का सरासर उल्लंघन है । निगम किसी भी कंपनी को जब काम का ठेका देती है, तो उसकी शर्तें उस कंपनी को पूरी करनी होती है। ऐसे में वह कंपनी अपने अधीन किसी अन्य कंपनी को ठेका हस्तान्तरित नहीं कर सकती है।
मृतक के परिजनों ने सीवरेज लाइन के कार्य का ठेका लेने वाली कंपनी डीआर अग्रवाल और इसके साथ काम करने वाली कंपनी प्रोजेक्टी बिल्ड होम के अधिकारियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 304ए के तहत मामला दर्ज करवाया है और सुचना दी कि कंपनी अधिकारियों ने मौके पर काम करने वाले धर्मचंद, कान सिंह, कैलाष और प्रहलाद को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के सीवरेज मेन हॉल में उतार दिया और वहां दम घुटने से उन चारों की मौत हो गयी। कंपनी अधिकारियों की लापरवाही से यह हादसा हुआ और चारों की मौत कारित हुई है।
आपको बताते चले कि मेनहॉल लगभग दो महीने से बंद पड़ा था और उसमें नाले का पानी रिस कर डेढ़ फीट तक भर गया था। गहरायी में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाने की संभावना होती है और ऐसे में कयास है कि ऑक्सीजन की मात्रा कम होने से और बंद पड़े मेनहॉल में भरे गंदे पानी से जहरीली गैस बन गयी हो और जैसे ही एक-एक कर चारों श्रमिक मेनहॉल में उतरे, दम घुटने से एक एक कर चारों की मृत्यु हो गयी हो ।
वैसे भी मृतकों शरीर पर करंट लगने से होने वाले काले निशान नहीं पाए गए और नहीं ही किसी ओर अंग पर बिजली के झटकों का प्रभाव देखा गया।