जयपुर, 24 मार्च। संसदीय कार्य मंत्री श्री शांती कुमार धारीवाल ने गुरूवार को विधानसभा मे वित्तमंत्री की ओर से बताया कि राजस्थान लेखा सेवा अधिकारियों के विरूद्ध वर्ष 2018 से जनवरी 2022 तक अनियमितता के जो मामले सामने आये है उनमें 9 अधिकारियों के विरूद्ध एफआईआर दर्ज है तथा एक अधिकारी को निलम्बित कर दिया गया है।
श्री धारीवाल ने प्रश्नकाल में विधायको द्वारा इस सम्बन्ध में पूछे गये पूरक प्रश्नों के जवाब में बताया कि अनियमितता के मामले सामने आने पर राजस्थान लेखा सेवा के अधिकारियों के विरूद्ध एफआईआर दर्ज की गई है तथा एक अधिकारी उम्मेद सिंह को कल ही निलम्बित किया गया है। उन्होंने बताया कि उम्मेद सिंह के विरूद्ध तीन प्रकरण में 16 सीसीए के तहत जाँच चल रही है तथा एक प्रकरण में गबन का आरोप है जिसमें एफआईआर दर्ज की गई है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस अधिकारी के विरूद्ध चल रही 16 सी.सी.ए की जाँच पूरी होने व निर्णय आने के बाद ही वसूली व निलम्बन की कार्यवाही की जा सकती है, लेकिन अधिकारी को कल निलम्बित कर दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि जाँच रिपोर्ट में आरोप साबित होने पर वसूली और निलम्बन दोनो कार्यवाही की जायेगी।
श्री धारीवाल ने बताया कि यह प्रकरण अपराधी प्रवृति का है और इसकी जाँच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा की जाती है। उन्होंने कहा कि मामले में अन्वेषण के उपरान्त ही राज्य सरकार चालान की स्वीकृति देती है। उन्होंने कहा कि न्यायालयों में अभियोजन स्वीकृत होने के पश्चात दोषी ठहराये जाने पर ही नियमानुसार निलम्बन की कार्यवाही होती है। संसदीय कार्यमंत्री ने बताया कि अब मामला एसीबी में और यह भी सही है कि एसीबी में समय लगता है।
उन्होंने बताया कि मामला 56 लाख के गबन का ही नहीं है एक मामले में तो 10 करोड़ से भी अधिक राशि का गबन करने का संगीन मामला है। उन्होंने बताया कि अधिकारी के विरूद्ध वर्ष 2020 में 16 सीसीए का मामला दर्ज किया गया और अब तक कोई कार्यवाही नहीं की गई लेकिन मेरे द्वारा अधिकारियों को निर्देश दिये जाने पर कल एक अधिकारी को निलम्बित किया गया है।
इससे पहले विधायक श्री नरपतसिंह राजवी के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में श्री धारीवाल ने बताया कि राजस्थान लेखा सेवा अधिकारियों के विरूद्ध अनियमितता के मामले जनवरी, 2018 से जनवरी, 2022 तक 10 मामले सामने आये है। उन्होंने इसका विवरण सदन के पटल पर रखा। उन्होंने कहा कि अंकित अधिकारियों में से 9 अधिकारियों के विरूद्ध एफआईआर दर्ज है, जिनकी सूची उन्होंने सदन के पटल पर रखी। उन्होंने कहा कि उक्त अधिकारियों के विरूद्ध प्रकरण विभागीय जांच में अथवा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के स्तर पर विचाराधीन है। तीन प्रकरण अभियोजन स्वीकृति हेतु कार्मिक विभाग में प्रक्रियाधीन है। प्रकरणों में माननीय न्यायालय द्वारा अथवा कार्मिक विभाग द्वारा अंतिम निर्णय होने के पश्चात् तद्नुसार कार्यवाही की जायेगी।