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clean-udaipur फतहसागर के सत्यानाश पर आमादा UIT,झीलों के प्रति स्थानीय प्रशाशन लापरवाह !
News Agency India September 01, 2019 05:31 PM IST

फतहसागर के सत्यानाश पर आमादा UIT,झीलों के प्रति स्थानीय प्रशाशन लापरवाह !

फतहसागर कहे तो उदयपुर संस्कृति। चाहे बच्चे हो या बूढ़े ,हर उदयपुरवासी जुड़ा है फतहसागर से। अगर यूँ कहे तो फतहसागर उदयपुर की पहचान है तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी लेकिन इस फतहसागर को बरबाद करने पर तूला है स्थानीय प्रशाशन। जी हाँ ! फतहसागर की स्थिति कुछ ऐसी है कि हर कोई इसका व्यवसायिक दोहन करने में लगा है चाहे बम्बईया मार्केट का कचरा बंसियो पर हो या नाश्ता और मक्को के भुट्टों के ठेले।


नगर निगम द्वारा बनाई गयी मेवाड़ दर्शक दीर्घा और जानकारी अव्वल तो अधूरी है वहीं इस के काँच टूट गए है। फतहसागर पर स्थित कुछ नगर निगम के उध्यान बरसों से पुरानी दशा में ही है और कोई नया पेड़ पौधा नज़र नहीं आता। पूरा फतहसागर वेंडर जोन बनता जा रहा है।फतहसागर की कई पोल लाइट्स बंद पड़ी है वहीं म्यूजिकल पोल सालों से दम तोड़ रहे है। बम्बईया बाजार के सामने नाव प्लेटफॉर्म के आसपास फतहसागर के पानी में कचरा और गन्दगी आम बात हो गयी है।

सबसे खतरनाक बात ये है कि रानी रोड की तरफ अमरूदों के बाग़ के सामने UIT और स्थानीय प्रशाशन ने फतहसागर के पानी में दो बड़े टापू बनाने की कोशिश है जो तकनीकी स्तर पर खामियों से भरे पड़े है। आपको बताते चले कि ये टापू पक्षियों के निवास के लिए बनाए गए है जो झील के बीच बनाये गए है। ऐसी क्या जरुरत पड गयी कि पक्षियों के निवास के लिए फतहसागर जैसी झील पर अतिक्रमण किया गया। वैसे भी फतहसागर के आसपास बड़ी तक ग्रीनबेल्ट है और काफी मात्रा में पक्षी इन इलाकों में रहते भी है।

बरहाल टापू ऐसे बनाये गए कि इन पर इक्का दुक्का छोटे पौधे लगाए गए है। इनके बढ़ने में अभी भी 10 साल ओर लग जाएंगे। टापू की मिटटी के नीचे पत्थर की भरायी नहीं करी गयी और अब ये टापू इतने पोले हो गए है कि कोई इंसान इस पर खड़ा नहीं हो सकता। धीरे धीरे टापू की मिटटी फतहसागर झील में मिलती चली जा रही है। समझ नहीं आता UIT और स्थानीय प्रशाशन ने फतहसागर के पानी में दो बड़े टापू क्यों बनाये ? समूचे फतहसागर की खूबसूरती पर धब्बा लगा दिया। ये भी स्पष्ट नहीं है कि UIT और स्थानीय प्रशाशन ने फतहसागर के पानी में दो बड़े टापू बनाने के लिए राष्ट्रीय झील संरक्षण नीति का पालन भी किया है कि नहीं ?

वैसे भी फतहसागर में पेट्रोल चलित नाव चलाने की अनुमति देकर स्थानीय प्रशाशन बरसो से जलीय इको सिस्टम के साथ अत्याचार कर रहा है। पता नहीं क्यों नाव संचालन के टेंडर में सोलर नाव या चप्पू वाली नाव का जिक्र नहीं किया जाता। फतहसागर की पाल पर विभूति पार्क बनाकर वैसे भी पाल की मजबूती के साथ खिलवाड़ किया जा चूका है। जलीय घास के गट्ठर हमेशा पाल किनारे पड़े रहते है। फतहसागर मर रहा है और स्थानीय प्रशाशन सो रहा है।

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