आबकारी विभाग की एमनेस्टी योजना 30 जून तक, मूलधन एवं ब्याज पर मिलेगी छूट !
जयपुर, 31 मार्च। आबकारी विभाग के राजस्व बकाया के पुराने प्रकरणों को शीघ्र निस्तारित करने के लिए सरकार ने आबकारी एमनेस्टी योजना वर्ष 2021 की घोषणा की है। इसके तहत पुराने प्रकरणों में मूलधन एवं ब्याज में आकर्षक छूट दी जाएगी।
आबकारी आयुक्त डॉ. जोगाराम ने बताया कि 31 मार्च 2020 से पूर्व के आबकारी राजस्व बकाया प्रकरणों पर योजना लागू होगी। उक्त दिनांक तक की अवधि के मांग सृजन के प्रकरण भी इसमें सम्मिलित होंगे चाहे उनके आदेश 1 अप्रेल 2020 या उसके पश्चात जारी किए गए हों। उन्होने बताया कि आबकारी ठेकों के बैक-आउट निविदादाताओं एवं अन्य बकाय राजस्व प्रकरणों के बाकीदारों से बकाया राशि वसूली के प्रकरणों को शीघ्र निस्तारित करने के उद्देश्य से सरकार ने यह योजना लागू की है। 31 मार्च 2009 तक के प्रकरणों में मूल बकाया राशि का 5 प्रतिशत जमा करवाने पर शेष 95 प्रतिशत व सम्पूर्ण ब्याज माफ कर दिया जाएगा। 01 अप्रेल 2009 से 31 मार्च 2014 तक के प्रकरणों में मूल बकाया राशि का 75 प्रतिशत जमा करवाने पर शेष 25 प्रतिशत मूल राशि व सम्पूर्ण ब्याज राशि माफ कर दी जाएगी। 01 अप्रेल 2014 से 31 मार्च 2020 तक के बकाया प्रकरणों में सम्पूर्ण मूल राशि जमा करवाने पर ब्याज की सम्पूर्ण राशि माफी योग्य होगी।
31 मार्च 1989 तक के बैक-आउट के अलावा प्रकरणों में मूल राशि का 10 प्रतिशत जमा करवाने पर शेष पूर्ण राशि एवं सम्पूर्ण ब्याज माफ कर दिया जाएगा। 01 अप्रेल 1989 से 31 मार्च 2009 तक के बैक-आउट के अलावा प्रकरणों में 50 प्रतिशत मूल राशि जमा करवाने पर शेष राशि व सम्पूर्ण ब्याज माफी योग्य होगा। 01 अप्रेल 2009 से 31 मार्च 2014 तक के बैक-आउट से अलावा प्रकरणों में 80 प्रतिशत मूल राशि जमा करवाने पर शेष मूल राशि व सम्पूर्ण ब्याज माफ होगा। 01 अप्रेल 2014 से 31 मार्च 2020 तक के बैक-आउट के अलावा बकाया प्रकरणों की पूरी राशि जमा करवाने पर सम्पूर्ण ब्याज की छूट मिलेगी। जिन प्रकरणों में मूल राशि पूर्व में जमा करवा दी गई है और सिर्फ ब्याज बाकी है उन प्रकरणों में आवेदन करने पर सम्पूर्ण ब्याज में छूट मिलेगी। 31 मई 2021 तक योजना के तहत आवेदन किया जा सकता है।
इन प्रकरणों पर लागू नहीं होगी योजना-
आबकारी आयुक्त ने बताया कि जो आबकारी राजस्व बकाया प्रकरण राजस्थान आबकारी अधिनियम 1950 एवं एनडीपीएस एक्ट 1985 के तहत आपराधिक प्रवृत्ति से संबंधित होगा उस प्रकरण में इस योजना का लाभ नहीं दिया जाएगा। जिन प्रकरणों में पूर्व में सम्पूर्ण राशि जमा करवाई जा चुकी है उन पर विचार नहीं किया जाएगा। पूर्व में आंशिक राशि जमा करवाई जा चुकी है तो शेष राशि पर ही योजना का लाभ मिल सकेगा। यदि प्रकरण न्यायिक अथवा अर्दृ न्यायिक प्रक्रिया में लम्बित है तो इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए न्यायालय में वाद वापस लेने का प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करना होगा। योजना में निर्णित प्रकरण किसी भी न्यायालय में चुनौती योग्य नहीं होगें। इस बाबत बाकीदार की ओर से 500 रुपए के स्टाम्प पेपर पर वचन पत्र देना होगा।

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