क्या उदयपुर के प्राइवेट अस्पतालों में अब तक एक भी कोरोना पॉजिटिव या संदिग्ध मरीज नहीं आया ?
उदयपुर सहित पूरे भारत में कोरोना महामारी का असर देखा जा रहा है। लेकिन इस दौर की सबसे महती जरुरत मेडिकल व्यवस्था केवल सरकारी तंत्र के भरोसे चल रही है और सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों सहित मेडिकल कर्मी इस विपदा के दौर में बिना डरे अपनी सेवाएं देकर मानवता को बचाने में जुटे है।
वही उदयपुर में कई बड़े प्राइवेट अस्पताल फ़िलहाल नए पेशेंट्स न तो आउटडोर में देख रहे है और न ही आवश्यक और अत्यावश्यक ऑपरेशन/सर्जरी कर रहे है।
प्राइवेट अस्पतालों में जो अस्पताल अपनी सेवाएं दे रहे है उनको लेकर न्यूज़एजेंसीइंडिया के कुछ सवाल है :
- उदयपुर शहर के कितने अस्पताल रेड हॉस्पिटल्स की श्रेणी में है ? अर्थात कितने प्राइवेट हॉस्पिटल में कोरोना पॉजिटिव मरीज है ?
- उदयपुर शहर के कितने अस्पताल येलो हॉस्पिटल्स की श्रेणी में है ? अर्थात कितने प्राइवेट हॉस्पिटल में कोरोना पॉजिटिव संदिग्ध मरीज है ?
- क्या उदयपुर प्रशाशन के पास इन हॉस्पिटल्स के कामकाज की जानकारी है या नहीं ? जैसे कितने मरीज आउटडोर में आ रहे है ? कितने मरीज नार्मल सर्जरी और कितने मरीज एक्सीडेंटल ट्रॉमा सर्जरी के लिए अस्पताल आ रहे है ? महत्वपूर्ण बात ये कि इनमे कितने मरीज कोरोना संदिग्ध मरीज है और इनमे से कितने मरीजों की कोरोना जाँच की गयी है या सरकारी सिस्टम (उदयपुर प्रशाशन )को इस बावत जाँच करने की जानकारी दी गयी है ?
- क्योंकि ये पता नहीं है कौन कोरोना पॉजिटिव है और कौन नहीं ? ऐसे में प्राइवेट अस्पतालों के आउटडोर में बैठने वाले डॉक्टर्स की सुरक्षा के लिए क्या प्राइवेट हॉस्पिटल प्रबंधन ने उन्हें PPE किट ,N95 मास्क और हेड शील्ड दे रखी है या नहीं ? और अगर नहीं दी गयी है तो क्या प्राइवेट अस्पतालों के आउटडोर में बैठने वाले डॉक्टर्स की सुरक्षा की जिम्मेदारी इनके प्रबन्धन की है या नहीं ? इन मेडिकल कर्मियों की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा ?
- इन प्राइवेट अस्पतालों में पिछले 45 दिनों में कितने मरीज भीलवाड़ा,बांसवाड़ा या प्रतापगढ़ से इनके अस्पताल में इलाज करवाने आये ? आए तो क्या इनके पास इनका कोई रिकॉर्ड है या नहीं ? क्या इस रिकॉर्ड को सरकार और स्थानीय प्रशाशन के साथ साझा किया गया अथवा नहीं ?
- इन प्राइवेट अस्पतालों में पिछले 45 दिनों में कितने मरीज संदिग्ध थे जो इलाज के दौरान कोरोना सिम्पटोमैटिक (तेज़ बुखार के साथ खांसी और साँस लेने में दिक्कत जैसे लक्षण ) नज़र आये थे ?क्या इन अस्पतालों में इन मरीजों के सैंपल जाँच के लिए भेजे गए अथवा नहीं ?
- क्या इन प्राइवेट अस्पतालों में 45 दिनों में संदिग्ध मरीज आये थे ,अगर हाँ ! तो कितने डॉक्टर्स और स्वास्थ्य कर्मी इससे प्रभावित हुए और क्या इन चिकित्साकर्मियों को क्वारैंटीन किया गया अथवा नहीं ?
- अगर चिकित्साकर्मियों को क्वारैंटीन किया गया तो क्या इन प्राइवेट अस्पतालों के पास इनका कोई लिखित रिकॉर्ड है या नहीं ? इस बावत इन अस्पतालों ने जिला प्रशाशन को सूचित किया या नहीं ?
- क्या इन प्राइवेट अस्पतालों के प्रबंधन को अपने चिकित्साकर्मी और अन्य पैरामेडिक्स की सुरक्षा की चिंता है या नहीं ? क्या कारण है कि एक भी संदिग्ध इन अस्पतालों से रिपोर्ट नहीं किया गया ? इन प्राइवेट अस्पतालों के प्रबंधन ने अपने कितने चिकित्साकर्मी और अन्य पैरामेडिक्स की कोरोना जांचे करवाई है ?
- क्या जाँच नहीं करवा कर ये अस्पताल अपने कर्मचारियों सहित समूचे शहर के लोगों की जान दांव पर नहीं लगा रहे ?
- प्राइवेट अस्पताल जानते है कि अगर इनके यहाँ एक भी संदिग्ध कोरोना रोगी पाया जाता है तो इनके अस्पताल को सील किया जा सकता है और चिकित्साकर्मी और अन्य पैरामेडिक्स को क्वारंटीन किया जा सकता है जिससे अस्पताल को आर्थिक नुकसान हो सकता है और भविष्य में इनके यहाँ मरीज आने से कतरा सकते है। यही कारण है कि ज्यादातर अस्पताल ने अब अपने आउटडोर या तो बंद कर दिये है या संचालित तो कर रहे लेकिन आउटडोर के चिकित्साकर्मियों को PPE किट ,N95 मास्क और हेड शील्ड आदि नहीं दी जा रही है।
व्यापार ने उदयपुर के लोगो और चिकित्साकर्मियों की जान को दांव पर लगा दिया है।