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clean-udaipur कोरोना की तीसरी लहर के आने के बारे में अलग अलग मत, जानिये क्या है हक़ीक़त ?
News Agency India June 02, 2021 10:02 AM IST

कोरोना की तीसरी लहर के आने के बारे में अलग अलग मत, जानिये क्या है हक़ीक़त ?

भारत में कोरोना की दूसरी लहर ने लोगों को आर्थिक,सामाजिक और स्वास्थ्य की दृष्टि से झकझोंर दिया है। कई लोगों को इस बीमारी ने ऐसे दंष दिए है जिसे वो कभी भूल नहीं पाएंगे। अब भारत में कोरोना की तीसरी लहर को लेकर विभिन्न संस्थाओं सहित राजनेताओं और विशेषज्ञों के अलग अलग बयान आ रहे है। डॉ एनके अरोड़ा, अध्यक्ष, COVID वर्किंग ग्रुप के अनुसार ICMR एक स्टडी लेकर आया है जिसमें कहा गया है कि तीसरी लहर देर से आने की संभावना है। हमारे पास देश में हर किसी का टीकाकरण करने के लिए 6-8 महीने की विंडो अवधि है। आने वाले दिनों में, हमारा लक्ष्य हर दिन 1 करोड़ खुराक देने का है। इसके साथ ही भारत में जायडस कैडिला वैक्सीन का ट्रायल लगभग पूरा हो चुका है। जुलाई के अंत तक या अगस्त में, हम 12-18 आयु वर्ग के बच्चों को यह टीका देना शुरू कर सकते हैं।

उधर कुछ विशेषज्ञ कह रहे कि महाराष्ट्र में ये लहर आने वाले 2-4 सप्ताह में दस्तक दे सकती है और दूसरी और एम्स का कहना है कि इसमें 6 सप्ताह का समय लग सकता है और अब ICMR का कहना है कि 6-8 महीने का समय लग सकता है लेकिन किस पर विश्वास किया जाए ? ICMR किस आधार पर कह सकता है कि 6-8 महीने में तीसरी लहर आएगी ? कौन सा संस्करण तीसरी लहर का कारण बनेगा? डेल्टा प्लस या बिल्कुल नया संस्करण ? केन्द्र सहित कोई भी राज्य सरकार इस बात पर काम करते दिखती नज़र नहीं आती कि तीसरी लहर आनी ही नहीं चाहिए ? कोई ये नहीं कह रहा कि आइए अपने सिस्टम को इतना मजबूत और अनुशासित बनाएं कि तीसरी लहर कभी न आए ! कई राज्य सरकारों ने कोरोना लॉक डाउन के प्रतिबंधों में शिथिलता दे दी है और बाजार लगभग खुल चुके है लेकिन अभी भी जनता मास्किंग और प्रोटोकॉल को लेकर उतनी गंभीर नजर नहीं आती जितनी होनी चाहिए और न ही राज्य सरकारों के तंत्र इस पर गंभीर होते दिख रहे है।

तीसरी लहर को रोकने के कदम

तीसरी लहर आए या न आए लेकिन राज्य सरकारों को चाहिए कि इसे आने से कैसे रोका जाय और आने से पहले क्या क्या जरुरी इंतज़ाम किये जाय ? दूसरी लहर में ऑक्सीजन और दवाएं आदि के लिए मारामारी देखी गयी। वेंटिलेटर के लिए लोग भटकते देखे गए। लेकिन तीसरी लहर आने से पहले केंद्र सहित राज्य सरकारों ने क्या इसके लिये पर्याप्त इंतजाम किये है अथवा नहीं ? ये प्रश्न कठिन और अनुत्तरित ही दिखता है। हालाँकि भारत भर में टीकाकरण जारी है लेकिन टेस्टिंग को लेकर अब सुस्ती देखी जा रही है जो कमजोर कड़ी साबित हो सकती है। महामारी के प्रसार को रोकने के लिए मास्क आदि नहीं पहनने वाली जनता और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करने वाले प्रतिष्ठानों/दुकानों पर भारी जुर्माने के प्रावधान से तीसरी लहर के प्रसार को रोका जा सकता है लेकिन इस पर जमीनी स्तर केवल खाना-पूर्ति ही नजर आ रही है। सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करना, सभी प्रोटोकॉल का पालन करना और अंत में जनता का टीकाकरण करना ही एकमात्र तरीका है जिससे भारत की रक्षा की जा सकती है।सामान्य तौर पर नई लहर तीन माह के अंतराल पर आती है लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करेगा कि लोग बचाव के नियमों का कितना पालन करते हैं और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए किस तरह के कदम उठाए जाते हैं।

इसके साथ ही पहले से कोरोना संक्रमित होकर सही हो चूके लोगों में टीकों की जरूरत नहीं है या नहीं ? इस पर भी बहुत कम जानकारी अब तक सामने आयी है । कई लोग कह रहे कि यदि एक बार RTPCR या एंटीबॉडी पॉजिटिव है, तो टीकों की कोई आवश्यकता नहीं है,लेकिन इस बात पर विश्वास करना अभी गले नहीं उतरने जैसा है। हालाँकि प्राकृतिक प्रतिरक्षा, टीकों की तुलना में अधिक मजबूत होती है और एक ही वायरस के लगभग सभी प्रकारों से रक्षा कर सकती है,इस बात को लेकर भी कुछ ज्यादा तथ्य अब तक सामने नहीं आये है । वैसे एक बार प्राकृतिक रूप से संक्रमण के बाद पुन: संक्रमण दर केवल 0.4% है। वहीं दूसरी और विशेषज्ञ ये भी कह रहे कि हल्के लक्षणों वाले लोगों को अपर्याप्त एंटीबॉडी प्राप्त हुई हैं, ये संभावित संक्रमण से बचाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। केवल मध्यम और गंभीर रोगियों को अच्छी संख्या में एंटीबॉडी प्राप्त हुई हैं।

देश की बड़ी आबादी को जल्द टीका लगाना सबसे बड़ी चुनौती है। जब तक बड़ी आबादी को टीका नहीं लग जाता तब तक संक्रमण बढ़ने का खतरा बना रहेगा। वायरस में बार-बार म्युटेशन भी हो रहा है। वायरस में म्युटेशन होने के बाद ही नया स्ट्रेन बाहर से भारत आया और पूरे देश में दूसरी लहर फैल गई। वायरस में अब भी म्यूटेशन हो रहा है। इसलिए नए म्यूटेशन का पता लगाने के लिए अध्ययन करना होगा। संक्रमण रोकने का पूरे देश में लाकडाउन बेहतर विकल्प नहीं है। इससे आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होती है।

 

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