मध्य प्रदेश में मिला कोरोना का डेल्टा प्लस वैरिएंट, महाराष्ट्र में तीसरी लहर की तैयारियां !
मध्य प्रदेश में कोरोना की दूसरी लहर से अभी पूरी तरह कामयाब होने की ओर था तो वहीं अब एक नए वैरिएंट ने राजधानी भोपाल में दस्तक दी है। शहर में कोरोना का नया वैरिएंट डेल्टा प्लस मिलने से एक बार फिर से भय का माहौल बन गया है। डेल्टा प्लस वैरिएंट दूसरी लहर में तबाही मचाने वाले डेल्टा वैरिएंट का ही बदला स्वरूप है।
भोपाल के बरखेड़ा पठानी में एक महिला की टेस्टिंग में नए वैरिएंट का पता चला है जिसकी पुष्टि एनएसडीसी ने की है। महिला को कोरोना वैक्सीन लग चुकी है और उसकी तबीयत फिलहाल ठीक है। डेल्टा वैरिएंट की पुष्टि होने के महिला के संपर्क में आए लोगों का पता लगाया जा रहा है।
एमपी में कोरोना टेस्टिंग के बाद सैम्पल को एनएसडीसी और हायर रिसर्च इंस्टीट्यूट में भेजा जा रहा है जिससे उसके जेनेटिक वैरिएंट के बारे में पता चल सके। एनसीडीसी को एक सैंपल में नया वैरिएंट मिला है। इसके बारे में और जानकारी जुटाई जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना के डेल्टा प्लस वैरिएंट पर मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल दवा का भी असर नहीं होता। दो दवा कंपनियों कंपनियों ने हाल ही में यह इंजेक्शन तैयार किया है। उम्मीद जताई जा जा रही है कि संक्रमण से लड़ने में यह कारगर साबित होगा।
वहीं दूसरी और महाराष्ट्र में कोरोना वायरस की तीसरी लहर का खतरा मंडरा रहा है जिसे देखते हुए तैयारियों का दौर शुरू हो चुका है। ये तीसरी लहर कोरोना वायरस के नए प्रकार ‘डेल्टा प्लस' की वजह से आने की अटकलें है। राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बुधवार को एक बैठक की और संभावित तीसरी लहर के लिए पर्याप्त मेडिकल सप्लाई रखने के निर्देश देने का काम किया।
कोरोना वायरस के नए प्रकार ‘डेल्टा प्लस' के बारे में जानकारी
- कोरोना वायरस का अति संक्रामक ‘डेल्टा' प्रकार उत्परिवर्तित होकर ‘डेल्टा प्लस' या ‘एवाई.1' बन गया है।
- भारत में फिलहाल इसे लेकर घबराने की बात नहीं है क्योंकि देश में अब भी इसके बेहद कम मामले हैं।
- वैज्ञानिकों की मानें तो ‘डेल्टा प्लस' प्रकार, वायरस के डेल्टा या ‘बी1.617.2' प्रकार में उत्परिवर्तन होने से बना है जिसकी पहचान पहली बार भारत में हुई थी और यह महामारी की दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार था।
- वैज्ञानिकों ने कहा है कि हालांकि, वायरस के नए प्रकार के कारण बीमारी कितनी घातक हो सकती है इसका अभी तक कोई संकेत नहीं मिला है, डेल्टा प्लस उस ‘मोनोक्लोनल एंटीबाडी कॉकटेल' उपचार का रोधी है जिसे कुछ दिन पहले ही में भारत में स्वीकृति मिली है।
- दिल्ली स्थित सीएसआईआर- जिनोमिकी और समवेत जीव विज्ञान संस्थान (आईजीआईबी) में वैज्ञानिक विनोद स्कारिया ने रविवार को अपने ट्विटर वॉल् पर बताया कि के417एन उत्परिवर्तन के कारण बी1.617.2 प्रकार बना है जिसे एवाई.1 के नाम से भी जाना जाता है।
- वैज्ञानिक विनोद स्कारिया ने कहा कि यह उत्परिवर्तन सार्स सीओवी-2 के स्पाइक प्रोटीन में हुआ है जो वायरस को मानव कोशिकाओं के भीतर जाकर संक्रमित करने में सहायता करता है।
- स्कारिया ने ट्विटर पर लिखा कि भारत में के417एन से उपजा प्रकार अभी बहुत ज्यादा नहीं है। यह सीक्वेंस ज्यादातर यूरोप, एशिया और अमेरिका से सामने आए हैं।
- स्कारिया ने यह भी कहा कि उत्परिवर्तन, वायरस के विरुद्ध प्रतिरोधक क्षमता से भी संबंधित हो सकता है।
- वहीं रोग प्रतिरोधक क्षमता विशेषज्ञ विनीता बल ने कहा कि हालांकि, वायरस के नए प्रकार के कारण ‘एंटीबाडी कॉकटेल' के प्रयोग को झटका लगा है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि वायरस अधिक संक्रामक है या इससे बीमारी और ज्यादा घातक हो जाएगी।
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