दिल्ली रेड फोर्ट ब्लास्ट: डॉक्टरों के आतंकी गिरोह में 20 लाख की फंडिंग, फर्टिलाइज़र से IED तैयारी, आपसी विवाद ने डाली साजिश में दरार
दिल्ली के ऐतिहासिक रेड फोर्ट के पास हुए विस्फोट में पकड़े गए आरोपी—डॉ. मुज़म्मिल, डॉ. अदील, उमर और शाहीन—ने मिलकर लगभग ₹20 लाख की रकम जुटाई थी, जो उमर को सौंपी गई। इन लोगों ने गुरुग्राम, नूंह और आसपास के इलाकों से 20 क्विंटल से अधिक NPK फर्टिलाइज़र खरीदी, जिसे विस्फोटक (IED) बनाने के लिए तैयार किया जा रहा था।
जांच में यह सामने आया कि उमर और डॉ. मुज़म्मिल के बीच पैसों के बंटवारे और उपयोग को लेकर आपसी विवाद हो गया था। उमर ने 2–4 सदस्यों का गुप्त Signal ग्रुप भी बनाया था, जिसके माध्यम से साजिश की बातचीत और योजनाएँ तय होती थीं। पकड़े गए अधिकांश आरोपी डॉक्टर हैं, जिनका तुर्की-बेस्ड हैंडलर 'Ukasa' से कनेक्शन सामने आया है, और ये लोग Jaish-e-Mohammad जैसे आतंकी संगठन से प्रेरित बताए जा रहे हैं।
आपसी विवाद—जांच एजेंसियों का खुलासाएजेंसी सूत्रों के अनुसार, उमर और डॉ. मुज़म्मिल के बीच आपसी विश्वास में कमी और पैसे को लेकर गंभीर डिफरेंस उत्पन्न हो गया था, जिससे योजना में देरी और साजिश में इनटर्नल तनाव बढ़ गया। इसी आपसी विवाद के चलते, ब्लास्ट की सटीक टाइमिंग और हमले की अंतिम रणनीति भी प्रभावित हुई।
उमर के अत्यधिक रैडिकल विचार, रिसोर्स मैनेजमेंट और निर्देशन में मतभेद जगजाहिर हुए।यह मामला देशभर में आतंकी नेटवर्क के सफाए और आतंरिक सुरक्षा को लेकर बेहद अहम माना जा रहा है। जांच एजेंसियां आपसी विवाद सहित विदेशी और स्थानीय लिंक और पूरे फंडिंग सर्किट की बारीकी से जांच कर रही हैं