गीतांजलि हॉस्पीटल मृत व्यक्ति का करता रहा उपचार,वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल !
प्राइवेट हॉस्पिटल में उपचार और भर्ती मरीजों के अजीबो गरीब अनुभव से हर कोई वाकिफ है। कहीं जानबूझ कर ऑपरेशन की जरुरत नहीं होने पर मरीजों को डर दिखा कर ऑपरेशन कर दिये जा रहे है तो कहीं जान बुझ कर ऐसी जाँचों की फेरहिस्त थमा दी जाती है जो मरीज की बीमारी से सम्बंधित ही नहीं होती।
दयनीय स्थिति तब हो जाती है जब परिजनों को आपात काल में मरीज को ICU में भर्ती कराना होता है और अस्पताल वाले मरीज के सम्बन्ध में कोई सटीक जानकारी परिजनों को उपलब्ध नहीं कराते है। परिजनों से पहले ही आवश्यक शर्तों पर साइन करवा लिए जाते है जिसमे मरीज की जान से संबधित खतरा होने पर अस्पताल की जिम्मेदारी नहीं होने और परिजनों द्वारा पेमेंट जमा कराने की बात होती है।
एक बार मरीज गंभीर स्थिति में ICU में भर्ती हो जाये फिर मरीज की क्या स्थिति है ? क्या इलाज चल रहा है ? कब क्या होने वाला है ? इससे परिजनों को अवगत भी नहीं कराया जाता है। शुरू हो जाती है ICU में तमाम तरह जरुरी और गैर जरुरी जाँचो की कवायद। परिजन ICU में अंदर जाकर अपने मरीज को देख नहीं पाते। अगर मरीज स्वस्थ हो जाता है तो परिजन बिना विवाद किये तीमारदारी के लिए घर रवाना हो जाते हो जाते है और अगर मृत्यु हो जाए तो गम में प्राथमिकता अंतिम संस्कार की मान तैयारियों में लग जाते है।
लेकिन दर्द तो तब होता है जब परिजनों को पता चलता है कि उनके मरीज की तो काफ़ी वक़्त या दिनों पहले मृत्यु हो गयी थी लेकिन अस्पताल पैसे ऐठने के लिए जान बूझकर मरीज को वेंटीलेटर पर रखे रहते है क्योंकि वेंटीलेटर मशीन सोने का अण्डा देने वाली मुर्गी होती है। एक दिन का वेंटीलेटर मशीन और दवाइयों का खर्चा हज़ारो में आता है जिसे मरीज के परिजनों को देना होता है। कुछ डॉक्टर्स जिनकी मासिक पगार लाखों में है और जो एक से ज्यादा हॉस्पिटल्स में नियमित सेवा देते है उनका फ़र्ज़ बन जाता है येन केन प्रकारेण अस्पताल को ज्यादा से ज्यादा पैसा मरीजों के मार्फ़त पहुँचाया जाय। इससे उनकी प्रसिद्धि बढ़ती है ,हॉस्पिटल की आमदनी भी।
ऐसा ही एक किस्सा सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है जिसमे उदयपुर के गीतांजली हॉस्पिटल में एक मरीज ICU में भर्ती था और उसके परिजन उसका उपचार करवा रहे थे। ICU में बहुत पहले ही मरीज की मृत्यु हो जाती है लेकिन अस्पताल प्रशाशन उन्हें इस बारे में नहीं बताता है लेकिन जब परिजन जबरदस्ती ICU मे घूस कर मरीज को देखते है तो मरीज मृत मिलता है। परिजनों के चिल्लाने पर डॉक्टर और अन्य उसे पम्प देकर हार्ट फेलियर की बात कहते है। लेकिन समझ से परे ये है ICU में होने के बाद भी मृत अवस्था में मरीज कैसे पड़ा रहा ? क्यों मरीज पर स्टाफ का ध्यान नहीं गया ? कितने समय से मरीज़ मृत था ? क्यों परिजनों को मरीज की मौत के बारे में नहीं बताया गया ?
घटना के बारे में पड़ताल करने पर पता चला कि प्रकरण पुराना है और सोशल मीडिया पर पहले भी वायरल हुआ था।
भगवान बचाये ऐसे अस्पतालों से लोगों को !