उदयपुर में पहाड़ों को काटना- तालाबो को पाटना ला सकता है बर्बादी-डॉ अनिल मेहता !
उदयपुर, 7 फरवरी, उत्तराखंड में ग्लेशियर टूटने से उपजी बाढ़ और हुए जान माल की हानि पर झील प्रेमियों ने दुःख व्यक्त किया है। रविवार को आयोजित संवाद में विशेषज्ञ डॉ अनिल मेहता ने कहा कि जंगलों के कटने, प्रदूषण, ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन से धरती का तापमान बढ़ रहा है। ग्लोबल वार्मिंग व क्लाइमेट चेंज संकट के कारण ग्लेशियरों के टूटने की प्रक्रिया बढ़ी है।
मेहता ने कहा कि उदयपुर सहित पूरे राजस्थान में भी यदि पहाड़ों व पेड़ों को काटना, झीलों तालाबो को पाटना जारी रहा तो हमे गंभीर बाढ़ व सूखे की समस्याओं से पीड़ित होना पड़ेगा।
झील प्रेमी तेज शंकर पालीवाल ने कहा कि उत्तराखंड व हिमाचल के पहाड़ी क्षेत्र से लेकर चेन्नई जैसे तटीय क्षेत्रों में जलप्लावन यह साबित कर रहा है कि प्रकृति को नुकसान पंहुचाना इंसानों के लिए जानलेवा साबित होता है। उदयपुर को इससे सबक लेना चाहिए।
पर्यावरणविद नंदकिशोर शर्मा ने कहा कि उदयपुर के आसपास नेशनल व स्टेट हाईवे निर्माण में पहाड़ों को बेतरतीब काटने व प्राकृतिक नालों में मलबा जमा करने से कई स्थानों पर प्राकृतिक जल व्यवस्था व प्रवाह को क्षति पंहुची है। यह स्थिति आपदाओं का कारण बन सकती है।
संवाद से पूर्व पिछोला के इमली घाट जनाना पर आयोजित श्रमदान में झील क्षेत्र से तैरती हुई गन्दगी,पॉलीथिन,पानी शराब की बोतलें, नारियल,फूल मालाये,घरेलू सामग्री ,कपड़े एवम बदबू मरती खाद्य सामग्री निकाली गई ।
श्रमदान में मोहन सिंह चौहान,द्रुपद सिंह,कुशल रावल,कृष्णा कोष्टी,हिमांशु चोटरानी,लाला मीणा, तेज शंकर पालीवाल व नन्द किशोर शर्मा ने भाग लिया।

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